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जायकाकभी सुना है घेवर, गुलकंद, गुलाब जामुन वाला केक:MBA गोल्ड मेडलिस्ट ने शुरू किया ऐसा बिजनेस, सालाना 40 करोड़ का कारोबार

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: छवि टाक

घेवर, रसमलाई, मोती चूर, गुलाब जामुन, ठंडाई, केवड़ा, गुलकंद। ये वो नाम हैं जो हर मिठाई की दुकानों और इसे खाने के शौकीनों के दिलों पर राज करते हैं। एक बार नाम सुनकर ही मुंह में पानी आ जाता है, लेकिन क्या आपको पता है कि आपकी इन फेवरेट मिठाइयों से केक भी बनते हैं, वो भी एगलेस।

अब आप सोचेंगे भला ऐसे केक भी कहीं मिलते हैं क्या? जी हां बिल्कुल...राजस्थानी जायका की टीम इस बार पहुंची जयपुर की 'अवन दी बेकरी' पर। जहां ट्रेडिशनल मिठाइयों के फ्यूजन से बनते हैं ऐसे अनूठे केक जिनका बेहतरीन टेस्ट आपका दिल जीत लेगा...

एक जमाना था जब 17वीं शताब्दी में आटे का खमीर उठाकर उसमें मक्खन, अंडा और शहद मिलाकर मीठी, सिकी हुई रोटी बनती थी। इसी गोल शेप वाली खमीर रोटी को केक के रूप में जन्मदिन पर काटा जाने लगा। धीरे-धीरे कप केक्स, डोनट्स, बन केक, केक बॉल्स और जिमीज बनाए जाने लगे। रोम और इंग्लैंड से शुरू हुए इस जायके के बदलते ट्रेंड्स में इंडो वेस्टर्न तड़का लगाया जयपुर के मयंक ने।

राजस्थान में घेवर खाने और खिलाने की परंपरा है। हरियाली तीज के मौके पर खासकर बेटियों के ससुराल में घेवर का सिंजारा भिजवाया जाता है। इसी मौके को खास बनाने के लिए इस बार स्पेशल घेवर केक लॉन्च किया है। मयंक ने ऐसी ही फेवरेट मिठाइयों का केक के साथ फ्यूजन किया। आज 10 से ज्यादा वैरायटी की डिमांड इतनी है कि कई सेलिब्रिटी भी इनका केक ऑर्डर करते हैं।

दिल्ली की महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी से MBA गोल्ड मेडलिस्ट मयंक ने 2014 में जयपुर लौटकर अपना फूड बिजनेस स्टार्ट किया। मयंक कहते हैं, गुलाबी नगरी जायकों का शहर है, यहां मिठाइयों पर ज्यादा जोर दिया जाता है। मेरा फूड बिजनेस ठीक चल रहा था, लेकिन कुछ डिफरेंट करने की चाह ने मुझे फ्यूजन रेसिपी की तरफ मोड़ दिया। साल 2016 में पहली बार ठंडाई केक बनाया। उस वक्त दिमाग में कई सारे डाउट्स थे कि ऐसा केक कोई पसंद करेगा या नहीं। ये एक्सपेरिमेंट करना इतना आसान नहीं था। एक्सपर्ट शेफ के साथ करीब 17 बार ट्राई किया। हर बार गड़बड़ हो रही थी। इतने रिजेक्शन झेलने के बाद परफेक्ट ठंडाई केक बनकर तैयार हुआ।

इस केक को जब मार्केट में लॉन्च किया तो हमें बहुत शानदार रिस्पॉन्स मिला। वनीला, चॉकलेट, स्ट्रॉबेरी जैसे केक्स को टक्कर दी। पहले महीने ही हमने करीब 350 ठंडाई केक बेच दिए थे। जिसके बाद फ्यूजन केक की एक सीरीज ही शुरू कर दी। ठंडाई के बाद गुलकंद, रसमलाई, काजू कतली, मोती चूर, केसर बादाम, केवड़ा, गुलाब जामुन, चीज और राज भोग केक भी लॉन्च किए। अब घेवर केक लॉन्च किया है। इसका भी मार्केट से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

मयंक कहते हैं जयपुर के लोग मिठाई बहुत पसंद करते हैं। मुझे कुछ अलग हटकर करना था। इसलिए सोचा क्यों न ऐसा कोई केक बनाया जाए जिसमें इंडियन स्वीट्स का तड़का हो और ऊपर से वेस्टर्न सजावट भी। इसी को ध्यान में रखते हुए एक्सपेरिमेंट करते गए। दूसरी बात, लोग केक्स को लेकर काफी हैल्थ कांशियस रहते हैं, कि ये नुकसान करता है, इसमें एग होते हैं, लेकिन हम प्योर एगलेस केक बनाते हैं।

10 साल की उम्र से कुकिंग
मयंक कोलकाता की मारवाड़ी फैमिली से बिलॉन्ग करते हैं, लेकिन पिछले कुछ सालों से फैमिली अलवर में शिफ्ट है। मयंक बताते हैं कि वे बचपन से ही पापा के साथ वीक एंड कुकिंग करते थे। यह शौक पढ़ाई के दौरान भी जारी रहा। फिर यूरोप से उन्होंने केक और ब्रेकफास्ट डिशेज बनाना सीखा।

दो स्टेट में 9 आउटलेट
मयंक बताते हैं कि उनके केक आइटम्स की डिमांड जयपुर ही नहीं कई शहरों में है। शुरुआत डब्ल्यूटीपी में पहले शोरूम से की थी, आज 9 आउटलेट्स हैं। जिसमें 6 जयपुर के वैशाली, शयाम नगर, मानसरोवर, सी- स्कीम, मालवीय नगर, जवाहर नगर और बाकी तीन गुजरात के अहमदाबाद में है। जल्द ही इसे ब्रांड के तौर पर नया बिजनेस मॉडल भी लेकर आएंगे। राजस्थान के कई शहरों में फ्रेंचाइजी सिस्टम भी शुरू करेंगे।

करोड़ों का कारोबार
मयंक ने बताया कि उनके आउटलेट्स पर ठंडाई, गुलकंद, रसमलाई, मोती चूर, केवड़ा, गुलाब जामुन चीज, घेवर केक 550 रुपए में, केसर बादाम- 600 और काजू कतली केक 750 रुपए में मिलता है। एक आउटलेट्स पर डेली 250 से 300 के ऑर्डर मिलते हैं। सभी आउटलेट्स का सालाना कारोबार करीब 40 करोड़ से ज्यादा का है।

राजस्थानी जायका के दूसरे एपिसोड यहां देखें-

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