भास्कर एक्सक्लूसिवमौत के मुंह में हंसती-खेलती रही दो साल की अंकिता:दादी गले लगाकर खूब रोई; बोली-अब इसे दूर न होने दूंगी

जयपुर/बांदीकुई (दौसा)3 महीने पहलेलेखक: राजीव वर्मा और लोकेश पाठक

राजस्थान में दौसा के बांदीकुई के पास जस्सापाड़ा गांव। एक बच्ची अपने भाई के साथ खेल रही थी, दौड़ रही थी, हंस रही थी। कौन कह सकता है कि 24 घंटे पहले यही बच्ची मौत के मुंह में थी। मां बदहवास होकर रो रही थी तो 800 किलोमीटर दूर से लौट रहे पिता और ताऊ बार-बार कार ड्राइवर को कह रहे थे..गाड़ी तेज चलाओ।

24 घंटे में बहुत कुछ बदल गया, लेकिन एक चीज नहीं बदली...2 साल की अंकिता की मुस्कान। एक दिन पहले जमीन से 100 फीट नीचे बोरवेल में फंसी थी, भूखी-प्यासी थी, तो भी खिलखिला रही थी, खेल रही थी।

पानी बेटी ने नहीं पिया था, कंठ मां के सूख रहे थे। बार-बार पुकारती रही- बेटा पानी पी ले। दादा कमल सिंह गांव वालों के साथ रेस्क्यू ऑपरेशन की हर अपडेट सैकड़ों किमी दूर अंकिता के पिता तक पहुंचा रहे थे। दादी भगवान से मिन्नतें कर रही थी कि किसी भी हाल में पोती सुरक्षित बाहर आ जाए। शाम को जब अंकिता को बोरवेल से निकाला गया तो घर और गांववालों की जान में जान आई।

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान अंकिता का 5 सेकेंड का एक वीडियो भी रिकॉर्ड हुआ। मासूमियत और जिंदादिली से भरा ये वीडियो सिखाता है कि किसी भी परिस्थिति में घबराने से बेहतर है, मुस्कुराते हुए उसका सामना किया जाए।

पहले देखिए, साढ़े 7 घंटे तक बिना पानी और खाने के क्या कर रही थी अंकिता...

अब जानिए कि हुआ क्या था?
दौसा जिले के बांदीकुई के पास जस्सापाड़ा गांव। सुबह के कोई 11 बज रहे थे। दो साल की मासूम अंकिता घर के बाहर अपने दादा कमल सिंह के साथ खेल रही थी। यहां एक बोरवेल खुदा था, जिसे भरने के लिए कमल सिंह उसमें मिट्‌टी डाल रहे थे। अंकिता की मां मंदिर गई थी। प्यास लगी तो कमल सिंह घर के अंदर पानी पीने चले गए।

मुश्किल से एक मिनट बाद ही जब वापस लौटे तो अंकिता गायब थी। यहां वहां देखा और फिर जैसे ही बोरवेल से उसके रोने की आवाज सुनी तो सन्न रह गए। भागे-भागे गांव वालों को बुलाकर लाए और इसके बाद शुरू हुआ अंकिता को बाहर निकालने का रेस्क्यू।

संघर्ष के साढ़े 7 घंटे और खेलती रही अंकिता
100 फीट की गहराई, कच्चा बोरवेल। अंदर ना रोशनी और ना ही ऑक्सीजन। 12.30 बज चुके थे और अंकिता ने सवेरे से थोड़ा सा दूध पिया था। जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए उसे एक घंटा हो चुका था। उसे निकालने की कोशिशें शुरू हो चुकी थीं, लेकिन कब तक निकल पाएगी, यह कह पाना मुश्किल था।

इन सबके बीच राहत की बात यह थी कि उस तक ऑक्सीजन पहुंचाई जा चुकी थी और थोड़ी देर बाद एक कैमरा भी उस तक भेजा जा चुका था। इस कैमरे को बार-बार पकड़ने की कोशिश करती रही। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम उस पर नजर रखने लगी।

इस बीच उसे निप्पल वाली पानी की बोतल पहुंचाई गई। ऊपर से मां आवाज लगाती रही- बेटा पानी पी ले, लेकिन अंकिता पानी नहीं पी पाई। कुछ देर बाद उसका एक ऐसा वीडियो आया, जिसे देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह गया। 100 फीट की गहराई पर कई घंटों से भूखी यह मासूम आराम से खेल रही थी। सामने मिट्‌टी की कच्ची दीवारों से वह पहले हाथों पर मिट्‌टी लगा लेती और फिर उसे झाड़ देती। चारों ओर घूम-घूम कर वह ऐसा बार-बार करती रही। जैसे उसे यह खबर ही ना हो कि वह कहां है और एक-एक पल उस पर कैसे भारी पड़ता जा रहा है।

संकट की इस घड़ी का सामना करने के लिए उसने इस खेल को ही मौत के सामने ढाल बना लिया। काफी देर तक वह इसी तरह से खेलती रही और आखिरकार साढ़े 7 घंटे की मशक्कत के बाद उसे सकुशल निकाल लिया गया। जब वह बाहर आई तब भी मुस्कुरा ही रही थी।

घर लाकर दादी ने उतारी नजर
बाहर निकालने के बाद अंकिता को अस्पताल ले जाया गया। रात भर वह दौसा के जिला अस्पताल में डॉक्टर्स की निगरानी में रही। शुक्रवार सुबह उसे छुट्‌टी दे दी गई। घर पहुंचते ही सबसे पहले दादी चंदो ने उसे सीने से लगा लिया और फिर उसकी नजर उतारी। दादी ने कहा- मेरी बच्ची नया जन्म लेकर आई है, अब कभी इसे खुद से दूर नहीं होने दूंगी।

रात को पहुंचे पिता
इस हादसे के वक्त अंकिता के पिता और ताऊ करीब 800 किमी दूर डूंगरपुर में थे। वे वहां ठेकेदारी का काम करते हैं। खबर मिलते ही वे कार लेकर वहां से रवाना हुए। शाम पौने सात बजे उन्हें मासूम को सकुशल निकाले जाने की खबर भी मिल गई थी। करीब 16 घंटे की यात्रा के बाद सवेरे 4 बजे सीधे दौसा अस्पताल पहुंचे। बेटी को सामने देखते ही भावुक हाे गए और उसे गले लगा लिया।

अंकिता के ताऊ सुमेरसिंह ने बताया कि अंकिता बहुत ही नटखट है। वह एक मिनट के लिए भी कहीं नहीं बैठती। अस्पताल से आने के बाद भी उसकी घर पर बदमाशियां शुरू हो गईं।

प्लान A और प्लान B पर एक साथ हो रहा था काम
अंकिता को बचाने के लिए बचाव एजेंसी दो प्लान पर काम कर रही थी। एक प्लान था कि बोरवेल के समानांतर 100 फीट गहरा गड्‌ढा खोदा जाए और फिर वहां से एक सुरंग बनाकर बच्ची को निकाला जाए। इस प्लान का एग्जीक्यूशन शुरू हो गया था, लेकिन इसे पूरा होने में सुबह भी हो सकती थी। इसलिए एनडीआरएफ ने देसी जुगाड़ से अंकिता को बचाने के प्लान B पर भी काम शुरू कर दिया। यह देसी जुगाड़ काम आया और बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

सिर्फ आधे घंटे में अंकिता को निकाल लाई एनडीआरएफ
नेशनल डिजास्टर रिजर्व फोर्स(एनडीआरएफ) ने बोरवेल में फंसी मासूम को इस फोर्स ने महज आधे घंटे में बाहर निकाल लिया था। अब सवाल उठता है कि जब एनडीआरएफ इतनी सक्षम है तो उसे पहले ही क्यों नहीं बुलाया गया। इसके पीछे भी एक बड़ा कारण है। दरअसल, जब स्थानीय स्तर पर सिविल डिफेंस, एसडीआरएफ के प्रयास असफल होने लगते हैं तभी एनडीआरएफ की टीम को बुलाया जाता है।

करीब 3 बजे एनडीआरएफ को टीम को दौसा कलेक्टर कमर चौधरी ने फोन कर दिया। तत्काल टीम किशनगढ़ से रवाना हो गई। करीब 6 बजे एनडीआरएफ की टीम जस्सापाड़ा पहुंच गई और तुरंत रेस्क्यू शुरू कर करीब 6 बजकर 40 मिनट पर बच्ची को बाहर निकाल लिया।

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