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मंत्रियों पर भारी पड़ गया एक अफसर:नेता बनने की तैयारी में कलेक्टर; सीएम फेस वाले नेताओं के अरमानों पर फिरा पानी

जयपुर8 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
  • हर शनिवार पढ़िए और सुनिए- ब्यूरोक्रेसी और राजनीति से जुड़े अनसुने किस्से

पूर्वी राजस्थान का 3-3 मंत्रियों वाला जिला किसी न किसी वजह से चर्चाओं में रहता है। सत्ताधारी पार्टी के विधायक और एक बोर्ड अध्यक्ष ने सड़कों पर मंत्री के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। डैमेज कंट्रोल के लिए पिछले दिनों विकास योजनाओं को लेकर तीन मंत्रियों ने बैठक बुलाई।

बैठक में पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर शिकायतों का अंबार लग गया। बैठक में बड़े अफसर ने सड़कों का काम ठीक होने का दावा किया, इसी बैठक में जब फील्ड के इंजीनियर से हकीकत पूछी तो पोल खुल गई। फील्ड वाले इंजीनियर ने कह दिया कि जिस सड़क का जिक्र है उसका तो काम ही शुरू नहीं हुआ। मंत्री से लेकर बड़े अफसरों की हालत देखने लायक थी।

मंत्रियों को अफसर ने दिया झटका
पिछले दिनों सत्ता के बड़े घर से जुड़े एक अफसर की कुछ मंत्रियों ने प्रदेश के मुखिया से शिकायत की। मंत्रियों ने स्मूद कम्युनिकेशन के साथ क्विक रिस्पाॅन्स नहीं मिलने की शिकायत की थी। कुछ दिनों बाद अफसर ने मंत्रियों से फोन करके अपने प्रति नाराजगी का कारण पूछ लिया। मंत्री इस बात को लेकर हैरान थे कि जो बात दो लोगों के बीच हुई वह अफसर तक कैसे पहुंच गई। सिस्टम को नहीं जानने वाले अक्सर यह गलती कर जाते हैं, अब मंत्री डिफेंसिव मोड में हैं। ऐसा पहले भी कइयों के साथ हो चुका है। वैसे भी पानी में रहकर मगर से बैर मोल लेना समझदारी नहीं होती, जो इस बात का सियासी मर्म समझते हैं, वे इस तरह शिकायतों में नहीं पड़ते। अब तो मंत्री भी कहने लगे हैं कि जो चल रहा है, चलने दीजिए।

पुतले पर कंफ्यूजन में नेता

सत्ताधारी पार्टी ने ईस्टर्न कैनाल को लेकर हाल ही में राजधानी में केंद्रीय मंत्री के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। पहले टॉप लीडरशिप के आने का दावा था, लेकिन बाद में जयपुर जिले के नेता ही जुटे। प्रदेश लेवल से केंद्रीय मंत्री का पुतला जलाने के डायरेक्शन थे, लेकिन जयपुर के नेता पीएम का पुतला जलाने ले आए। विरोध-प्रदर्शन के बाद जैसे ही पुतला जलाने की बारी आई तो सत्ताधारी पार्टी के स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन के युवा नेता ने केंद्रीय मंत्री का पुतला जला दिया। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि नेता समझ ही नहीं पाए और पीएम का पुतला रह गया। इस कंफ्यूजन का कारण यह था कि जयपुर के एक नेता केंद्रीय मंत्री का पुतला जलाने के पक्ष में नहीं थे। इस सियासी भाईचारे की भी अलग कहानी है।

साउथ के माइनोरिटी नेता की पब्लिसिटी से हैरान सत्ताधारी पार्टी
साउथ के चर्चित माइनोरिटी नेता का जयपुर दौरा सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं के लिए कयास लगाने वाला बन गया है। सत्ताधारी पार्टी के नेता इस बात से हैरान थे कि इतनी पब्लिसिटी कैसे मिल गई? सत्ताधारी पार्टी में मैनेजमेंट के महारथी माने जाने वाले एक माइनोरिटी के विधायक ने किसी से साउथ वाले नेता के दौरे को मिली पब्लिसिटी के कारणों पर चर्चा की। विधायक को सामने वाले का लॉजिक पसंद नहीं आया और लॉजिक दिया कि सब केंद्र की सत्ता के टॉप लेवल से सेट था, तभी इतनी पब्लिसिटी मिली है, अन्यथा हमें तो नहीं मिलती। अब उन्हें कौन समझाए कि न्यूज वैल्यू भी कोई चीज होती है।

विपक्षी पार्टी में सीएम फेस वाले नेताओं को साफ मैसेज
विपक्षी पार्टी में सीएम फेस बने नेताओं ने सोशल मीडिया से नरेटिव बनाने की हर संभव कोशिश की, लेकिन असल फैसला तो पार्टी लीडरशिप करेगी। संगठन की तरफ से हाल ही में सीएम फेस बने नेताओं को इसका साफ तौर पर संकेत भी दिया गया है। नरेटिव बनाने वाले नेताओं को टॉप लेवल से वाया मीडिया मैसेज पहुंचाने की खबरें हैं। समझदार नेता संकेत समझकर काम में जुट गए हैं, क्योंकि मौजूदा सियासी हवा में होगा वही जो दिल्ली तय करेगी। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री के जयपुर दौरे में बहुत कुछ साफ हो चुका है।

राजनीति में आने को तैयार एक कलेक्टर

एक सीमावर्ती जिले के कलेक्टर इन दिनों अपने डेमोक्रेटिक रुझान की वजह से चर्चा का विषय बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर नेताओं के अंदाज में ही शुभकमानाएं बधाई देते हैं। कलेक्टर का नेताओं वाला अंदाज बेवजह नहीं है। दरअसल, रिटायरमेंट के बाद सीमावर्ती जिले की किसी सीट पर उनकी निगाह है। अगले महीने रिटायर होने के बाद कलेक्टर साहब सियासत में कदम रख सकते हैं। कलेक्टर का सियासी अंदाज देखकर जिले के विधायक भी मन ही मन परेशान हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि कहीं रिटायरमेंट के बाद उनकी ही सीट से टिकट की दावेदारी नहीं कर दें। पहले भी कई अफसर रिटायर होकर विधानसभा की सीढ़ियां चढ़ते रहे हैं।

सत्ता के सबसे बड़े ऑफिस का पावर इम्बेलेंस

राजधानी के विकास वाली संस्था से सत्ता के सबसे बड़े ऑफिस में एक अफसर की नियुक्ति से ब्यूरोक्रेसी में हैरानी है। शहरी संस्था से आने वाले अफसर की सत्ता के सबसे बड़े ऑफिस के सर्वेसर्वा अफसर से ट्यूनिंग नहीं बताई जा रही, लेकिन सीधे टॉप लेवल से यह नियुक्ति हो गई। पहले पश्चिमी राजस्थान से ताल्लुक रखने वाले एक अफसर का नाम था, लेकिन बाद में हालात बदल गए। दरबारी पॉलिटिक्स का नियम भी सही है कि वहां एकता नहीं होनी चाहिए, इसलिए एक नई धारा के अफसर की एंट्री करवाई गई। वैसे पुराना इतिहास यह है कि यहां से दो अफसर पहले जा चुके हैं, अब साढ़े तीन साल में तीसरे अफसर की एंट्री है, आगे तेल देखो और तेल की धार देखो लेकिन इतना तय है यहां पॉवर इम्बैलेंस जरूर हो गया है।

कई अफसरों को उल्टी पड़ी लॉबिंग
ब्यूरोक्रेसी में कई पावर सीकर्स को इस बार लॉबिंग करना उल्टा पड़ गया है। आईटी से जुड़े एक अफसर इस महकमे से दूसरी जगह जाना चाहते थे, कारण था टॉप लेवल का भारी दखल और खुद का नाम के लिए होना। दूसरे विभाग में जाने के लिए लॉबिंग करवाई ,अफसर का विभाग तो बदल गया लेकिन नई जगह को ब्यूरोक्रेसी में बर्फ की पोस्टिंग माना जाता है। सब उल्टा पुलटा हो गया। ऐसा ही एक महिला अफसर के साथ हुआ, महिला अफसर ने भी जनता से जुड़े लाइमलाइट वाले विभाग के लिए लॉबिंग की लेकिन उन्हें भी साइडलाइन वाली पोस्टिंग मिली। अब जानकार उलटी गंगा बहने का कारण तलाश रहे हैं।

इलेस्ट्रेशन : संजय डिमरी

वॉइस ओवर: प्रोड्यूसर राहुल बंसल

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