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पीए के जरिए घूसखोरी का मामला:पूर्व कलेक्टर इंद्रसिंह राव का नया पता: कैदी नंबर-2446, बैरक नंबर- 27; सेंट्रल जेल कोटा

कोटा2 वर्ष पहले
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इंद्रसिंह राव को एक दिन का रिमांड पूरा होने बाद एसीबी ने शुक्रवार को कोटा में जज के आवास पर पेश किया था। यहां से जेल भेज दिया गया।- फाइल। - Dainik Bhaskar
इंद्रसिंह राव को एक दिन का रिमांड पूरा होने बाद एसीबी ने शुक्रवार को कोटा में जज के आवास पर पेश किया था। यहां से जेल भेज दिया गया।- फाइल।
  • जेल में बीतेगा नव वर्ष, 6 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजे गए
  • नार्को टेस्ट और वॉइस सैम्पल देने से राव ने किया इनकार

पीए के जरिए घूस लेने के आरोप में बारां के पूर्व कलेक्टर इंद्रसिंह राव को 6 जनवरी तक जेल भेज दिया है। जेल सूत्रों के मुताबिक, कोटा सेंट्रल जेल में राव का कैदी नंबर 2446 है और उसे बैरक नंबर 27 में रखा गया है। उधर, पेशी और जेल जाने के दौरान भी राव के तेवर नहीं बदले। जेल में इस दौरान मीडिया ने राव से बात करने का प्रयास किया, लेकिन वह चुप रहा।

इंद्रसिंह राव को एक दिन का रिमांड पूरा होने बाद एसीबी ने शुक्रवार को कोटा में जज के आवास पर पेश किया था। यहां से जेल भेज दिया गया। करीब ढाई बजे एसीबी की टीम कड़ी सुरक्षा के बीच इंद्रसिंह राव को लेकर जिला जज योगेंद्र कुमार पुरोहित के आवास पर पहुचीं। 10 मिनट की पेशी के बाद जिला जज ने आरोपी राव को 6 जनवरी तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। जेल परिसर में गाड़ी से उतरने के बाद एसीबी के जवानों ने तलाशी ली। जेब से दोनों हाथ बाहर निकलवाए और ब्लेजर खुलवाया। बुधवार को गिरफ्तारी के बाद से राव एक ही ड्रेस में था।

नार्को टेस्ट से किया इंकार
एसीबी ने इंद्र सिंह राव से नार्को टेस्ट व वॉइस सैम्पल देने की मांग की थी। लेकिन आरोपी पूर्व कलेक्टर ने मना कर दिया। इधर, पेशी और जेल जाने के दौरान इंद्र सिंह राव का कलेक्टर वाला रुतबा भी नजर आया। जिला जज के आवास पर पेशी के बाद इंद्र सिंह हाथ पीछे करके अपने वकील से बात करते हुए नजर आए।

9 दिसंबर को हुई थी पीए की गिरफ्तारी
बारां में 9 दिसम्बर को पेट्रोल पंप की NOC जारी करने की एवज में 1 लाख 40 हजार रिश्वत लेते कोटा ACB की टीम ने बारां कलेक्टर इंद्र सिंह राव के पीए महावीर नागर को गिरफ्तार किया था। मीडिया से बातचीत में महावीर ने बड़ा खुलासा किया था। महावीर ने कबूला था कि इतने पैसे छोटा कर्मचारी ले सकता है क्या? उच्चाधिकारी के कहने पर पैसे लिए जाते थे। जो रकम ली गई है वो पूरी ही कलेक्टर को देनी थी। ACB की पूछताछ में PA ने बताया था कि रिश्वत की रकम में कुछ हिस्सा बाबुओं था। बाकी कलेक्टर का हिस्सा था।

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