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राज्यपाल ने किया जैन संतों का स्वागत:नेपाल-भूटान होकर जयपुर के राजभवन पहुंची अहिंसा यात्रा, कलराज मिश्र बोले- आचार्यश्री महाश्रमण से मुलाकात सौभाग्य

जयपुरएक वर्ष पहले
राज्यपाल ने किया जैन संतों का स्वागत।

श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ की अहिंसा यात्रा आज राजभवन पहुंची। राज्यपाल कलराज मिश्र ने आचार्यश्री महाश्रमण और संतों का राजभवन में स्वागत किया। राज्यपाल कलराज मिश्र ने कहा कि संतों की संगत मिलना सौभाग्य की बात होती है। उन्होंने कहा कि लोगों को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति का संकल्प दिलाने के लिए आचार्यश्री की प्रेरणा से निकाली जा रही अहिंसा यात्रा की पहल सराहनीय है। राज्यपाल ने आचार्यश्री को अपनी पुस्तक ‘संविधान, संस्कृति और राष्ट्र’ के साथ ही दो साल के कार्यकाल की पुस्तक ‘सर्वांगीण विकास की नई राह’ की कॉपी भेंट की।

राज्यपाल कलराज मिश्र और आचार्यश्री महाश्रमण की भेंट।
राज्यपाल कलराज मिश्र और आचार्यश्री महाश्रमण की भेंट।

2014 से चल रही है अहिंसा यात्रा

आचार्यश्री महाश्रमण ने बताया कि दिल्ली के लाल किले से 9 नवम्बर 2014 से शुरू हुई अहिंसा यात्रा नेपाल, भूटान और भारत के 20 से ज्यादा राज्यों से होती हुई राजस्थान पहुंची है। दिल्ली जाकर यह यात्रा पूरी होगी। जयपुर प्रवास के दौरान जैन संत धर्मसभा और फेरियां निकाल रहे हैं। जिसमें लोगों को अणुव्रत रखने, भोग और रोग से बचने के लिए योग की ओर बढ़ने, आत्मा का कल्याण करने का संदेश दे रहे हैं। अणुव्रत का मतलब छोटे-छोटे नियमों के जरिए भोगों पर कंट्रोल किया जाए और मन को साफ रखने की कोशिश की जाए।

1 करोड़ से ज्यादा लोगों को नशामुक्ति का दिलाया संकल्प

आचार्यश्री ने अब तक 50 हजार किमी से ज्यादा की पदयात्रा की है। उनकी प्रेरणा से 1 करोड़ से ज्यादा लोग नशामुक्ति का संकल्प ले चुके हैं। अहिंसा पदयात्रा के जरिए वे 15 हजार किलोमीटर पैदल चल चुके हैं। अहिंसा यात्रा के तीन मुख्य उद्देश्यों में सदभावना,नैतिकता और नशामुक्ति अभियान शामिल हैं। इसमें किसी भी धर्म-जाति, वर्ग, संप्रदाय का व्यक्ति अहिंसा हिस्सा ले सकता है। वह यात्रा में दो रूपों में जुड़ सकता है। वह खुद अहिंसा यात्रा के संकल्प ले। साथ ही दूसरों को अहिंसा यात्रा के संकल्प स्वीकार करने के लिए मोटिवेट करे। इस अहिंसा यात्रा पर नेपाल सरकार की ओर से डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है।

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