पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

महामारी का असर:काेराेनाकाल में जन्मे 73,529 बच्चों में से 45,789 काे नहीं मिली विटामिन-K की खुराक

जोधपुर3 महीने पहलेलेखक: महावीर प्रसाद शर्मा
  • कॉपी लिंक
कई विशेषज्ञों ने माना है कि बीसीजी का टीका लगा चुके लोगों पर कोरोना का दुष्प्रभाव काफी कम रहा, अब यही टीका लगाने से मासूम वंचित रह गए। - Dainik Bhaskar
कई विशेषज्ञों ने माना है कि बीसीजी का टीका लगा चुके लोगों पर कोरोना का दुष्प्रभाव काफी कम रहा, अब यही टीका लगाने से मासूम वंचित रह गए।
  • 9878 बच्चे बीसीजी और 30227 हेपेटाइटिस-बी के टीके से रहे वंचित
  • काेराेना वैक्सीनेशन में जोधपुर 96% लक्ष्य पर, लेकिन महामारी काल में रुका रहा बच्चाें का टीकाकरण

देश-दुनिया में अभी कोरोना वैक्सीन की चर्चाओं के बीच जोधपुर में कोरोनाकाल में नवजातों के टीकाकरण को लेकर बेहद घातक लापरवाही हुई। अप्रैल से लेकर जनवरी तक के 10 महीनों में चिकित्सा विभाग इस रुटीन टीकाकरण काे भूल गया।

इस दौरान शहरी क्षेत्र में 20,305 एवं ग्रामीण में 53,224, यानि 73,529 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें से 45,789 बच्चों को जन्म के साथ मिलने वाली विटामिन के की डोज तक नहीं मिली। इसके साथ ही हजारों बच्चों को डिप्थीरिया, टीबी, हेपेटाइटिस जैसी 10 से ज्यादा बीमारियों व संक्रमण से बचाने वाले टीके भी समय पर नहीं लगे।

भास्कर ने इस संबंध में वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों से बात की तो उन्होंने कहा कि- टीकाकरण की यह चूक इन नवजातों में आगे चलकर घातक असर दिखा सकती है। साथ ही तकरीबन काबू में आई कई बीमारियों को भी फिर से फैला सकती हैं।

जोधपुर में टीकाकरण का यह हाल रहा कि वह नवंबर के आंकड़ों के आधार पर प्रदेश में 32वें स्थान पर पहुंच गया। आरसीएचओ डॉ. कौशल दवे ने भी माना कि अप्रैल से मई तक कोरोना के सघन अभियान के चलते रुटीन वैक्सीन प्रभावित हुआ। इसके साथ ही उन्होंने जोड़ा कि बचे हुए बच्चों के लिए 22 फरवरी से मिशन इंद्रधनुष आयोजित किया जाएगा। इसमें छूटे हुए सभी बच्चों को वैक्सीनेट किया जाएगा।

बच्चों के लिए कोरोना से ज्यादा खतरनाक...

  • जन्म के तुरंत बाद बीसीजी का टीका जरूरी होता है। यह गंभीर टीबी से रोकता है।
  • पोलियो खुराक साल में दो बार पिलाना जरूरी है। इससे समूह में हर्ड इम्यूनिटी आती है।
  • इसी समय रोटा वायरस का टीका लगाते हैं। इससे डायरिया की रोकथाम होती है।
  • 9 महीने के समय मीजल्स-रुबेला का टीका लगाया जाता है। इसके नहीं लगाने से खसरा का खतरा जो कोरोना से कई गुना ज्यादा खतरनाक है।

वैक्सीनेशन में गैप रहना सिस्टम का फेलियर है
^जन्म के समय ही महत्वपूर्ण टीके लगने ही चाहिए। कोरोनाकाल में अधिकांश डिलेवरी अस्पतालों में हो रही हैं। इसके बावजूद वहां नवजातों को वैक्सीन नहीं लगना सिस्टम का फेलियर है। जन्म के समय यदि विटामिन-के नहीं लगता है तो ब्लीडिंग और बीसीजी नहीं लगने पर टीबी हो सकती है। टीके नहीं लगने के दुष्परिणाम इन बच्चों में आगे भी देखने को मिल सकते हैं।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- व्यक्तिगत तथा व्यवहारिक गतिविधियों में बेहतरीन व्यवस्था बनी रहेगी। नई-नई जानकारियां हासिल करने में भी उचित समय व्यतीत होगा। अपने मनपसंद कार्यों में कुछ समय व्यतीत करने से मन प्रफुल्लित रहेगा ...

    और पढ़ें