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राजस्थान के मैरिज रजिस्ट्रेशन बिल पर याचिका:कहा- 18 साल से कम उम्र की लड़की से रिलेशन बनाना रेप तो शादी कैसे मान्य; राज्य-केंद्र को हाईकोर्ट का नोटिस, सुनवाई 22 नवंबर को

जयपुर4 महीने पहले
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बिल में लड़के के 21 साल और लड़की की 18 साल से कम उम्र का होने पर भी मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से करवाने का प्रावधान है।- प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
बिल में लड़के के 21 साल और लड़की की 18 साल से कम उम्र का होने पर भी मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से करवाने का प्रावधान है।- प्रतीकात्मक फोटो।

सरकार की ओर से हाल ही में पास किए गए राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण संशोधित अधिनियम-2021 को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए जनहित याचिका लगाई गई है। याचिका में कहा गया है कि 18 साल से कम उम्र की लड़की से सेक्सुअल रिलेशन बनाना रेप तो शादी कैसे मान्य हो सकती है। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

राज्य सरकार और भारत सरकार को बनाया पार्टी
याचिकाकर्ता ने राजस्थान के मुख्य सचिव और भारत सरकार के महिला व बाल विकास मंत्रालय के सचिव को पार्टी बनाया है। अलवर निवासी एडवोकेट और सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश ठाकुरिया ने एडवोकेट अमितोष पारीक के जरिए यह जनहित याचिका दायर की है। इस पर जस्टिस सबीना और जस्टिस मनोज कुमार व्यास की खंडपीठ ने आदेश जारी करते हुए अगली सुनवाई 22 नवम्बर को तय की है।

राजस्थान हाईकोर्ट,जयपुर।
राजस्थान हाईकोर्ट,जयपुर।

राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण संशोधित अधिनियम-2021 को चुनौती
याचिका में राजस्थान अनिवार्य विवाह पंजीकरण संशोधित अधिनियम-2021 को तो चुनौती दी ही गई है। साथ ही कहा गया है कि भारत सरकार के चाइल्ड मैरिज की रोकथाम के एक्ट 2006 के सेक्शन 3 में चाइल्ड मैरिज को वॉइडेबल बताया गया है। जबकि यह शुरू से ही अवैध और वॉइड होना चाहिए। इसके साथ ही पीआईएल में संविधान के आर्टिकल 14, 15 और 21 का भी हवाला दिया गया है। साथ ही एक लड़की के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होने, सरकार की ओर से चाइल्ड मैरिज को बढ़ावा देने, चाइल्ड मैरिज की रोकथाम के 1929 के कानून का नए एक्ट से उल्लंघन होने, भारत सरकार के चाइल्ड मैरिज रोकथाम के एक्ट 2006 का उल्लंघन होने, भारत सरकार के चाइल्ड मैरिज रोकथाम के लिए 2006 के कानून के सेक्शन 3 को भी चुनौती दी गई है। साथ ही आईपीसी पैनल कोड, 1860 और बच्चों को सेक्सुअल अपराधों से बचाने के लिए 2012 के एक्ट का हवाला दिया गया है। पीआईएल में राजस्थान में चाइल्ड मैरिज की रोकथाम के लिए कोर्ट से गुहार लगाई गई है।

चाइल्ड मैरिज के खिलाफ जनहित याचिका
चाइल्ड मैरिज के खिलाफ जनहित याचिका

याचिकाकर्ता का तर्क, असंवैधानिक बिल पास किया
याचिका में कहा गया है कि राजस्थान कम्पलसरी रजिस्ट्रेशन ऑफ मैरिज अमेंडमेंट एक्ट 2021 के तौर पर सरकार ने एक असंवैधानिक बिल पास किया है। बिल में लड़के के 21 साल और लड़की के 18 साल से कम उम्र का होने पर भी मैरिज रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से करवाने का प्रावधान है। जबकि, भारत सरकार के 2006 के एक्ट में और अलग-अलग कोर्ट्स के ऑर्डर में यह स्पष्ट है कि विवाह के लिए लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल से कम नहीं होनी चाहिए। लड़का-लड़की में इस उम्र से कम में सेक्सुअल संबंध को रेप माना गया है। इंडियन पेनल कोड का सेक्शन 375 भी यह कहता है कि 18 साल की उम्र से कम उम्र की लड़की से सेक्सुअल संबंध बनाने को बलात्कार के अपराध के तौर पर माना जाएगा। फिर चाहे वह उस नाबालिग लड़की की सहमति से ही क्यों न हुआ हो।

राज्य सरकार के असंवैधानिक बिल से बाल विवाह को मिलेगा बढ़ावा
याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने 17 सितम्बर 2021 को संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ जाकर यह बिल पास किया है। जो कि प्रदेश में बाल विवाह को बढ़ावा देने वाला है। सरकार बाल विवाह की रोकथाम के बजाय उसे बढ़ावा देने का काम कर रही है। इस एक्ट से बड़े स्तर पर जनता प्रभावित होगी।

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