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14 फोटोज में देखें बजाज का सफर:छोटे गांव से 1 लाख करोड़ का बना बजाज ग्रुप; दादा जमनालाल राजस्थान के सीकर से थे, वर्धा के सेठ ने गोद लिया था

सीकर6 महीने पहले
सीकर जिले के काशी का बास में स्थित राहुल बजाज के परिवार की हवेली। बजाज के परिवार के कुछ सदस्य अभी भी यहां रहते हैं।

बजाज ग्रुप के पूर्व चेयरमैन राहुल बजाज का शनिवार को पुणे में निधन हो गया। वे पिछले कई सालों से कैंसर से जूझ रहे थे। बजाज परिवार मूलत राजस्थान के सीकर जिले के काशी का बास गांव के रहने वाले थे। 2011 में जब राहुल बजाज सीकर गए थे तो उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा था कि आप सभी जमनालाल बजाज को जानते हैं, मैं उनका पोता हूं।

इसी गांव से निकलकर राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज ने बिजनेस में एक के बाद एक कई कीर्तिमान स्थापित किए, इसी की बदौलत आज बजाज ग्रुप 1 लाख करोड़ के मार्केट कैपिटल वाला ग्रुप बन चुका है।

राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज को गोद लेने के बदले गांव में बनवाया गया था कुआं।
राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज को गोद लेने के बदले गांव में बनवाया गया था कुआं।

वर्धा के सेठ ने राहुल के दादा को लिया था गोद
जमनालाल बजाज एक गरीब परिवार में पैदा हुए थे। जो सिर्फ चौथी क्लास तक पढ़े। उन्हें वर्धा के सेठ बछराज ने गोद लिया था। इसके बदले जमनालाल बजाज के परिवार ने गांव में एक कुआं बनवाने की मांग की थी। इसके बाद वे अपने नए परिवार के साथ ही रहे। जमनालाल बजाज को गांधी जी उन्हें अपना पांचवा बेटा कहते थे। राहुल बजाज पर भी जमनालाल बजाज का प्रभाव रहा।

राहुल बजाज का जन्म कोलकाता में 10 जून 1938 में हुआ था। उनके पिता कमलनयन बजाज और मां सवित्री बजाज थीं। अपनी शुरुआती पढ़ाई कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल से पूरी की। इसके बाद दिल्ली के सेंट स्टीफन कॉलेज ग्रेजुएशन की डिग्री ली। फिर राहुल बजाज ने मुंबई से लॉ और हावर्ड से एमबीए की डिग्री ली।

जमनालाल बजाज की मां बर्डडी बाइजी चरखे पर सूत कातते हुए। पूरा बजाज परिवार महात्मा गांधी से प्रभावित रहा है।
जमनालाल बजाज की मां बर्डडी बाइजी चरखे पर सूत कातते हुए। पूरा बजाज परिवार महात्मा गांधी से प्रभावित रहा है।

1965 में बजाज समूह की जिम्मेदारी संभाली थी
राहुल बजाज ने 1965 में बजाज समूह की जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद 1980 के दशक में बजाज टू व्हीलर बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी रही। राहुल बजाज ने बजाज स्कूटर को घर-घर पहुंचाया तो उनके बेटे राजीव बजाज ने बजाज बाइक्स को नए मुकाम तक पहुंचाया।

राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज को गोद लेने वाले सेठ बछराज।
राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज को गोद लेने वाले सेठ बछराज।

पहली बार गांव आए तो हुआ था भव्य स्वागत
राहुल बजाज 2011 में जब पहली बार अपने पैतृक गांव काशीकाबास पहुंचे थे तो वहां ग्रामीण महिलाओं ने मंगलगीतों के साथ उनका स्वागत किया था।

राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज। वे महात्मा गांधी से प्रभावित थे।
राहुल बजाज के दादा जमनालाल बजाज। वे महात्मा गांधी से प्रभावित थे।
सीकर के काशी का बास में स्थित बजाज परिवार की हवेली।
सीकर के काशी का बास में स्थित बजाज परिवार की हवेली।
कमलनयन बजाज और मां सावित्री बजाज के साथ राहुल और बहन सुमन।
कमलनयन बजाज और मां सावित्री बजाज के साथ राहुल और बहन सुमन।
दादा जमनालाल बजाज के साथ राहुल बजाज। फोटो 1939 की है।
दादा जमनालाल बजाज के साथ राहुल बजाज। फोटो 1939 की है।
उदयपुर में सीमेंट फैक्ट्री का उद्घाटन करती राहुल बजाज की दादी जानकी देवी बजाज।
उदयपुर में सीमेंट फैक्ट्री का उद्घाटन करती राहुल बजाज की दादी जानकी देवी बजाज।
जमनालाल बजाज एक सी क्लास कैदी के रूप में, जेल के कुएं से पानी खींचते हुए।
जमनालाल बजाज एक सी क्लास कैदी के रूप में, जेल के कुएं से पानी खींचते हुए।
जमनालाल बजाज महात्मा गांधी के साथ। उन्होंने वर्धा में काफी जमीन महात्मा गांधी के आश्रम के लिए दान की थी।
जमनालाल बजाज महात्मा गांधी के साथ। उन्होंने वर्धा में काफी जमीन महात्मा गांधी के आश्रम के लिए दान की थी।
राहुल बजाज 2011 में जब पहली बार अपने पैतृक गांव काशी का बास पहुंचे थे तो स्थानीय लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया था।
राहुल बजाज 2011 में जब पहली बार अपने पैतृक गांव काशी का बास पहुंचे थे तो स्थानीय लोगों ने उनका आत्मीय स्वागत किया था।
राहुल बजाज सीकर के बजाज सर्किल पर स्थानीय लोगों के साथ। यहां उनके दादा जमनालाल बजाज की मूर्ति लगी है।
राहुल बजाज सीकर के बजाज सर्किल पर स्थानीय लोगों के साथ। यहां उनके दादा जमनालाल बजाज की मूर्ति लगी है।
राहुल बजाज गांव में अपना पुश्तैनी घर भी देखने पहुंचे थे। आज भी उनकी हवेली मौजूद है।
राहुल बजाज गांव में अपना पुश्तैनी घर भी देखने पहुंचे थे। आज भी उनकी हवेली मौजूद है।
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