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राजस्थान में राहुल की दूसरी सभा:पदमपुर में राहुल बोले- मोदी ने नोटबंदी, जीएसटी और लॉकडाउन के झटके के बाद तीन ऑप्शन भूख, बेरोजगारी और आत्महत्या के दिए

पदमपुर-गंगानगर3 महीने पहले
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श्रीगंगानगर के पदमपुर में राहुल ने करीब 27 मिनट तक किसान महापंचायत को संबोधित किया। - Dainik Bhaskar
श्रीगंगानगर के पदमपुर में राहुल ने करीब 27 मिनट तक किसान महापंचायत को संबोधित किया।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान के दो दिन के दौरे पर हैं। शुक्रवार को पहले दिन उन्होंने दो जगह पर किसान महापंचायत की। पहली हनुमानगढ़ के पीलीबंगा में दूसरी श्रीगंगानगर के पदमपुरा में। दोनों जगह कमोबेश एक जैसी बातें कहीं। नए कृषि कानूनों को लेकर उन्होंने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पहले दिन से ही झटके दिए। नोटबंदी, जीएसटी और अचानक लॉकडाउन लगाकर। अब वह कह रहे हैं कि कृषि कानून से किसानों को ऑप्शन मिलेगा। हां, उन्होंने ऑप्शन दिया, पहला भूख, दूसरा बेरोजगारी और तीसरा आत्महत्या। आप सिर्फ शॉक ऑब्जरवर की भूमिका में हैं। पदमपुर में राहुल ने 27 मिनट भाषण दिया। राहुल से पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत 4 मिनट और सचिन पायलट 5 मिनट बोले।

पदमपुर में रैली के मंच पर मूडे लगे हुए थे, जबकि इससे पहले पीलीबंगा में मंच पर कुर्सी-सोफे की जगह खाट बिछी हुई थी। पढ़ें, पदमपुर में उनके भाषण की बातें...

देश मुश्किल दौर से गुजर रहा
"देश मुश्किल दौर से गुजर रहा है। पहले कोरोना ने देश के लाखों लोगों को दुख दिया। हर परिवार को चोट मारी। अब मोदी अपने मित्रों के लिए आप पर चोट मार रहे हैं। हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा बिजनेस कृषि है। इसमें सिर्फ किसान नहीं, छोटे दुकानदार, मजदूर, लोडर सहित करोड़ों लोग काम करते हैं। यह 40 लाख करोड़ रुपए का धंधा है। मगर इस बिजनेस और बाकी बिजनेस में फर्क है। बाकी को एक या दो उद्योगपति कंट्रोल करते हैं। टेलीफोन या मोबाइल के बिजनेस देखिए। इसमें एक या दो लोग दिखेंगे, लेकिन कृषि एक ऐसा धंधा है, जिसको करोड़ों लोग चलाते हैं। ये किसी का नहीं है। यह भारत माता का बिजनेस है।"

भारत माता को बहुत चोट लगने वाली है
"जिस दिन कृषि का धंधा एक या दो लोगों के हाथ चला गया, उस दिन भारत माता को बहुत चोट लगने वाली है। हम यह समझते हैं। उसकी रक्षा करते हैं। इसलिए हमने आपको एमएसपी दी, बीज दिलाए, पानी दिलाया। यह सिर्फ धंधा नहीं है। कोई भी मुश्किल आती है तो कृषि का बिजनेस यानी देश के 40 प्रतिशत लोग काम करते हैं। मीडिया में, टीवी में कानूनों के बारे में कोई कुछ कहता नहीं है। अब आप ही मुझे बताइये कि अगर कोई भी कहीं भी, कितनी भी खरीद कर सकता है तो इस मंडी की क्या जरूरत। पहले किसान कानून का लक्ष्य मंडियों को खत्म करना है। केवल एक व्यक्ति को खरीदने का अधिकार होना चाहिए। दूसरा कानून कहता है- जितना भी अनाज, फल, सब्जी बड़े उद्योगपतियों को जमा करने की छूट है। इसकी कोई सीमा नहीं। एक लाख टन, दस लाख टन, एक करोड़ टन। दूसरे कानून का लक्ष्य जमाखोरी शुरू करने का है। अब इससे फायदा किसको होगा।"

किसान उपभोक्ता बनकर अपना ही अनाज महंगा खरीदेगा
"आज एक उद्योगपति है, जिसके गोदाम में हिन्दुस्तान का 40 प्रतिशत अनाज है। दूसरे कानून के बाद जब किसान अनाज सब्जी और फल बेचने जाएगा, उसी समय बड़ा उद्योगपति अपने गोदाम से मार्केट में डालेगा। वैसे ही अनाज के दाम गिरेंगे। जब दाम गिरेंगे तो किसान को अपनी मेहनत के लिए सही दाम नहीं मिलेंगे। जब वही किसान उपभोक्ता बनकर दुकान में अपना ही अनाज खरीदने जाएगा तो उद्योगपति बाजार से अनाज, फल व सब्जी अपने गोदाम में लेगा और किसान को महंगा अनाज, महंगे फल व सब्जी खरीदने पड़ेंगे। फायदा किसको होगा। किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी को नहीं बल्कि अरबपतियों को होगा। यह धंधा नरेंद्र मोदीजी दो लोगों को सौंपना चाहते हैं।"

संसद के भाषण का भी जिक्र किया
बोले- "मैंने कल संसद में भाषण दिया। 20-25 मिनट बोला। आमतौर पर किसी की मौत हो जाती है तो दो मिनट का मौन रखा जाता है। सेना के लोग शहीद होते हैं, लोग मरते हैं, सांसद मरते हैं तो दो मिनट का मौन रखते हैं। मैंने देखा कि हिन्दुस्तान की संसद में दो मिनट का मौन नहीं रखा गया, उन किसानों के लिए जो आंदोलन में शहीद हो गए। मैं खड़ा हो गया, और दो मिनट का मौन रखने की बात कही। मैंने सभी सांसदों को कहा। क्योंकि ये हमारे किसान हैं और हमें भोजन देते हैं, लेकिन दुख की बात है कि सभी खड़े हुए , लेकिन भाजपा का कोई सांसद एक मिनट भी खड़ा नहीं हुआ। क्या मैंने गलती की?"

कंटेंट व फोटो: संदीप धामू, पदमपुर

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