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पूनिया बोले-फुल टाइम गृहमंत्री नहीं होना राजस्थान का दुर्भाग्य:कांग्रेस राज में SC-ST सबसे ज्यादा प्रताड़ित, 20 अगस्त को BJP जयपुर में करेगी आंदोलन

जयपुरएक महीने पहले
पूनिया बोले-फुल टाइम गृहमंत्री नहीं होना राजस्थान का दुर्भाग्य - Dainik Bhaskar
पूनिया बोले-फुल टाइम गृहमंत्री नहीं होना राजस्थान का दुर्भाग्य

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा- यह राजस्थान का दुर्भाग्य है कि कांग्रेस सरकार को साढे 3 सालों में कोई पूर्णकालिक गृहमंत्री मिला ही नहीं। मुख्यमंत्री अगर रफॉर्म करते तो भी शिकायत नहीं होती, लेकिन हालातों से ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री को राजस्थान की जनता की सुरक्षा से कोई मतलब नहीं है। गहलोत को अपनी कुर्सी से सरोकार है।

कुर्सी की सुरक्षा उनके लिए जनता की सुरक्षा से बड़ी है।पूनियां ने कहा राजस्थान की कानून व्यवस्था बिगड़ गई है। कांग्रेस सरकार के शासन में सबसे ज्यादा पीड़ित और प्रताड़ित कोई है वह SC-ST तबके हैं। महिला अत्याचार, अवैध खनन, साधु-संतों पर अत्याचार, मॉब लिंचिंग, हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार जैसे मुद्दों को लेकर बीजेपी 20 अगस्त को जयपुर में बड़ा प्रदर्शन करेगी।

कांग्रेस सरकार ने बहुसंख्यक हिंदुओं को प्रताड़ित करना तय कर लिया

प्रदेश बीजेपी मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर पूनिया ने कहा - ऐसा लगता है कि कांग्रेस सरकार ने यह तय कर लिया है कि बहुसंख्यक हिंदुओं को इसी तरीके से प्रताड़ित करना है। कांग्रेस ने 2018 के अपने घोषणापत्र में इस बात का भरोसा दिलाया था कि प्रदेश की कानून व्यवस्था को दुरुस्त रखेंगे, पुलिस को आधुनिक बनाएंगे, रिसोर्स देंगे और क्राइम कंट्रोल करेंगे। किसी भी प्रदेश की कानून व्यवस्था इसलिए महत्वपू्र्ण होती है कि शांति व्यवस्था और सद्भाव से उसकी आर्थिक तरक्की का संबंध होता है। पिछले दिनों उदयपुर में जिस तरह कन्हैयालाल का सिर कलम किया गया, उसके बाद उदयपुर के पर्यटन व्यवसाय की सारी बुकिंग निरस्त हो गई। लोग डर गए। देशी-विदेशी पर्यटन और वेडिंग डेस्टिनेशन को नुकसान हुआ। लोगों के रोजगार पर भी नैगेटिव इफेक्ट पड़ा। राजधानी जयपुर तक घटनाएं होने लगी हैं।

साढ़े 3 साल में 7.97 लाख मुकदमे दर्ज हो चुके

पूनिया ने कहा-पुलिस थानों के बाहर एक पंचलाइन लिखी होती है, आमजन में विश्वास-अपराधियों में डर, लेकिन कांग्रेस के राज में अशोक गहलोत की सरपरस्ती में अपराधियों में भरोसा और आमजन में भय, यह पंचलाइन इस रूप में बदली जा सकती है। राजस्थान में साढ़े 3 साल में अब तक 7 लाख, 97 हजार 693 मुकदमे दर्ज हुए हैं। 6 हजार 325 हत्याएं हो चुकी हैं। 5 हजार से ज्यादा लूट हो चुकी हैं। चोरी की वारदात 1 लाख 29 हजार 489 हो चुकी हैं। महिलाओं पर अत्याचार के मामले 1 लाख 45 हजार 288 दर्ज हो चुके हैं। बच्चियों, महिलाओं पर रेप और गैंगरेप संबंधी 22 हजार 148 दर्ज हो चुके हैं। 26 हजार 794 मामले एससी से संबंधित मामले दर्ज हुए। 7 हजार 374 मामले एसटी संबंधी दर्ज हुए हैं। साल 2020 के मुकाबले 2022 में हत्या, हत्या का प्रयास, डकैती, लूट, अपहरण, बलात्कार, चोरी, नकबजनी में बढ़ोतरी हुई है। चोरी के मामलों में 21.53 प्रतिशत, लूट 28.57 प्रतिशत, बलात्कार 19.34 प्रतिशत और महिला अत्याचार में 18.75 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई।

यह पहली बार हुआ है जो कभी नहीं हुआ। सीएम डिफेंस में कहते हैं एफआईआर को फ्री कर दिया। लेकिन कोई बलात्कार पीड़िता रेप की शिकायत लेकर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने जाती है, तो उसके साथ थाने में ही बलात्कार होता है,फिर एफआईआर झूठी कैसे हो सकती है। इसका मतलब कहीं ना कहीं धुंआ है, इसीलिए आग है।

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