पेपरलीक मामले की नहीं होगी सीबीआई जांच:धारीवाल ने कहा- 8 साल तो इन्वेस्टिगेशन चलता रहेगा, कटारिया बोले- पेपरलीक के डाकू बाहर घूम रहे

जयपुर15 दिन पहले

विधानसभा में पेपरलीक मुद्दे पर बहस के जवाब में संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विपक्ष की सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया। धारीवाल ने कहा- इस मामले को अगर सीबीआई को दिया गया तो क्या होगा? 8 साल तो इन्वेस्टिगेशन चलता रहेगा और जो सारे दस्तावेज हैं वे सब सीबीआई ले जाएगी। फिर 15 साल तक भर्ती परीक्षाएं नहीं हो पाएगी। स्टूडेंट्स का भविष्य खराब हो जाएगा।

पेपरलीक मामले में तेजी से जांच करवाई जा रही है और इसकी डे-टू-डे मॉनिटरिंग की जा रही है। दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाएंगे। हमारा कमिटमेंट है कि स्टूडेंट्स का भविष्य खराब न हो इसलिए परीक्षा करवाकर भर्ती की जाएगी। राजस्थान पुलिस जांच करने में सक्षम है और सीबीआई जांच की मांग को खारिज करता हूं।

इससे पहले पेपरलीक पर बहस के दौरान जमकर हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने पेपरलीक से जुड़े मामले में शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला के जवाब पर सवाल उठाते हुए इसके विरोध में बायकॉट करने की घोषणा की। इस पर धारीवाल ने कहा कि पहले पूरा जवाब सुनकर जाइए।

धारीवाल के टोकने पर कटारिया नाराज हो गए और कहा- क्या जवाब सुन लें। इसके बाद कटारिया और धारीवाल के बीच नोकझोंक हो गई। बीजेपी विधायकों ने भी हंगामा शुरू कर दिया। स्पीकर सीपी जोशी ने हंगामा बढ़ते देख पेपरलीक पर बहस को खत्म कर दिया और 1 बजकर 57 मिनट पर 10 मिनट के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।

स्पीकर बोले- परंपरा तोड़कर मैंने बहस को मंजूरी दी है
सदन की फिर से कार्यवाही शुरू होने के बाद पेपरलीक पर बहस शुरू हुई। स्पीकरजोशी ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस के दिन स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा नहीं होती,लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए परंपरा तोड़कर पेपरलीक के स्थगन पर चर्चा की मंजूरी दी है। हमें भर्ती प्रक्रिया से परीक्षाओं के पैटर्न पर चर्चा की जरूरत है।

कटारिया बोले- शर्म की बात है पेपरलीक के डाकू बाहर घूम रहे
पेपरलीक पर बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने सरकार पर जमकर हमला बोला। कटारिया ने कहा- इस सदन की कमेटी बनाकर कम से कम परीक्षा प्रणाली को सुधारने का कदम उठाइए। बड़े शर्म की बात है कि जिन लोगों को केवल दिखाने के लिए पेपरलीक मामले में पकड़ा था, उन सब की जमानत हो गई और डाकू बाहर घूम रहे हैं। जो पांच से सात लाख रुपए लेकर पेपर सॉल्व करवा रहे थे, उनकी जमानत हो गई।

केवल दिखावे के लिए पकड़ा था, आप कुछ नहीं कर पा रहे। जनता हमें और आप दोनों को देख रही है। पेपरलीक के डाकू तभी पकड़े जाते, जब गंभीरता से जांच होती। मंत्री ने केवल सतही जवाब दिया है। बाहर के राज्यों का नाम लेकर आप बच नहीं सकते। अब तो परीक्षा सिस्टम देखकर बोलने का मन ही नहीं करता। कुछ सुधार होना नहीं है।

राठौड़ बोले- पेपरलीक मामले की जांच में सरकार पक्षपात कर रही

बहस के दौरान उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा- पेपरलीक मामले की जांच में सरकार पक्षपात कर रही है। कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा के पेपरलीक हुए, वे स्कूल कांग्रेस नेताओं के थे, आज तक उन स्कूलों की मान्यता खत्म नहीं की। झोटवाड़ा की दिवाकर स्कूल का नाम कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा में पेपर लीक करने में आया था, उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की।

एसआई परीक्षा में जागृति स्कूल जयपुर के खिलाफ भी कार्रवाई नहीं की। यह स्कूल कांग्रेस नेता का है, इसलिए कार्रवाई नहीं की। इस तरह दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। एंटी चीटिंग बिल के नाम पर कुछ लोगों पर कार्रवाई करना और कुछ को छोड़ देना, यह पक्षपात किया जा रहा है। इस सरकार को युवा की आह खा जाएगी।

बिल्ली को तो दूध की रखवाली नहीं सौंप दी?
राठौड़ ने कहा- आप यूपी की बात कर रहे थे, यूपी में पेपर लीक करने पर एनएसए लगता है आप भी लगाओ। इस बार आरपीएससी से पेपर आउट हुआ है। आरपीएससी ही प्रश्न का सिलेक्शन करने वाला है। केवल आरपीएससी चेयरमैन को ही पता होता है कि पेपर कहां से प्रिंट होता है। कहीं बिल्ली को तो दूध की रखवाली करने का जिम्मा नहीं सौंप दिया।

टेक्निकल हेल्पर की परीक्षा में एक ही सेंटर से 50 स्टूडेंट पास हुए। शिक्षक भर्ती का पेपर लीक करने वाला सुरेश ढाका और उसका साथी यूथ कांग्रेस के चुनाव में साइबर हैकिंग करके मुकेश भाकर को हरवाकर चहेते उम्मीदवार को चुनाव जितवाया था। ये तार तो कहीं के कहीं जुड़ रहे हैं।

सीएम सलाहकार ने कहा- आरपीएससी में हम किस तरह के लोगों को बैठाते हैं?
सीएम के सलाहकार और सिरोही से निर्दलीय विधायक संयम लोढ़ा ने बुलडोजर पर सवाल उठाने के साथ आरपीएससी और कर्मचारी चयन बोर्ड में अध्यक्ष लगाने के तरीके पर सवाल उठाए। लोढ़ा ने कहा- आरपीएससी, कर्मचारी चयन बोर्ड, सरकार सब अपनी-अपनी दुनिया में हैं, कोई धणी-धोरी है। मंत्री सेक्रेटरी के खिलाफ रोना रो रहे हैं।

आरपीएससी में हम किस तरह के लोगों को बैठाते हैं? क्या मेरिट लेकर हम चलते हैं? पूरी जिंदगी जो अपनी जेब में पर्स लेकर नहीं घूमते उन्हें आरपीएससी में बैठा दिया। जब तक इन संवैधानिक संस्थाओं का स्तर हम नहीं सुधारेंगे, तब तक इसी तरह से राजस्थान का नौजवान बर्बाद होता रहेगा।

जो लोग रीट में आरोपी थे वे कैसे कॉफी डे में बैठकर कॉफी पीते रहे, उन्हें क्यों नहीं पकड़ा जा रहा था? कौन जिम्मेदारी लेगा इसकी? आप इसे हल्के में मत लीजिए और पुख्ता इंतजाम नहीं किए और आने वाले समय में पेपरलीक हो गया तो आपको कोई पानी पिलाने वाला नहीं मिलेगा।

यूपी में बुलडोजर पर सवाल उठाए, अब आप ये राजस्थान में क्या ले आए?
सीएम सलाहकार ने कहा- जब उत्तर प्रदेश में बुलडोजर चल रहा था तो हम ही कह रहे थे कि कानून के शासन के हिसाब से चलना चाहिए, अब आप ये क्या ले आए राजस्थान में? क्या आप ने मान लिया है कि आपका कानून, आपकी सत्ता, आपका शासन सब नियंत्रण करने में सक्षम नहीं है और इसीलिए आप बुलडोजर लेकर आ गए?

और वह भी एक किराए की बिल्डिंग पर चलाने के लिए, इस तरह के तरीके इस्तेमाल करके राजस्थान के नौजवान के आक्रोश को खत्म नहीं कर सकते। मेहरबानी करके परीक्षा के तरीके बदलिए, जिला स्तर पर एग्जाम करवाइए। जिले के मूल निवासियों को बोनस अंक दीजिए और अपनी टेक्नोलॉजी को अपराधियों से आगे जाकर अपडेट करिए, तब पेपरलीक रुकेंगे।

स्कूलों में खाली पदों पर शिक्षा मंत्री को घेरा

विद्या संबल योजना में सरकारी स्कूलों में गेस्ट फैकल्टी पर टीचर लगाने की योजना पर शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला सदन में घिरते दिखे। शिक्षा मंत्री ने कहा- गेस्ट फैकल्टी योजना को कुछ समय के लिए स्थगित किया है। इसे रद्द नहीं किया है।

वहीं, पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी के सवाल के जवाब में कल्ला ने कहा कि राजस्थान में सरकारी नौकरियों में बाहरी लोगों को रोकने के लिनए केवल स्थानीय राजस्थानियों के लिए आरक्षण का प्रावधान लागू नहीं होगा।

बजट सत्र के दूसरे दिन नेता प्रतिपक्ष ने सबसे पहले स्कूलों में खाली पड़े पद का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि - इतने समय से पद खाली पड़े हैं। बच्चों को कौन पढ़ाएगा? इस पर मंत्री ने तर्क दिया कि आरक्षण का प्रावधान करने के लिए कुछ समय के लिए योजना स्थगित की है।

अब स्कूल प्रिंसिपल लगा सकेंगे गेस्ट फेकल्टी

इस बीच, स्पीकर सीपी जोशी ने हस्तक्षेप करते हुए कहा- शिक्षकों के खाली पदों को गेस्ट फैकल्टी से भरने की योजना सिरे नहीं चढ़ी।

आप संविदा पर करना चाहते हैं या केवल गेस्ट फैकल्टी पर। सालभर तक विद्या संबल योजना में पद नहीं भरने से बच्चों की पढ़ाई नहीं हो रही है। इसकी व्यवस्था करें। इस पर शिक्षा मंत्री बीडी कल्ला ने कहा, 'अब आगे से स्कूल प्रिंसिपल के स्तर पर गेस्ट फैकल्टी लगाए जा सकेंगे। प्रिंसिपल को इसका अधिकार दिया जाएगा।'

सरकारी नौकरी में स्थानीय राजस्थानियों को आरक्षण का कोई प्रस्ताव नहीं
बाहरी लोगों को राजस्थान में सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने से रोकने के संबंध में सरकार के पास फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है।

आज विधानसभा में शिक्षा मंत्री ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 16 (2) अनुसार निवास स्थान के आधार पर सार्वजनिक नियोजन में भेदभाव नहीं किया जा सकता।

निवास स्थान के आधार पर सरकारी नौकरी में कानूनी प्रावधान करने का अधिकार अनुच्छेद 16 (3) अनुसार केवल संसद को है।

वर्तमान में प्रदेश की भर्तियों में स्‍थानीय प्रदेशवासियों के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान नहीं है। आरक्षित वर्गों- एससी, एसटी, ओबीसी, एमबीसी और ईडब्ल्यूएस की कुल भर्तियों में सें 64% पदों पर केवल राजस्‍थान के स्‍थानीय निवासियों से भरे जाने का प्रावधान है। इसके अलावा भूतपूर्व सैनिकों के पद भी स्‍थानीय निवासियों से भरे जाने का प्रावधान है।

आज फैसला करेंगे स्पीकर
पेपर लीक के अलावा आज उपनेता प्रतिपक्ष के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पर भी फैसला होगा। सीएम के सलाहकार संयम लोढ़ा ने दो दिन पहले ही विधानसभा सचिव को विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया था। यह प्रस्ताव खारिज होता है या अनुमति मिलती है। इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

लोढ़ा ने तर्क दिया कि 81 विधायकों के इस्तीफों का मामला विधानसभा स्पीकर के पास लंबित था, उस पर कोई फैसला नहीं किया गया था।

बीजेपी विधायक दल के उपनेता राजेंद्र राठौड़ ने इस्तीफों पर स्पीकर के फैसले से पहले ही एक दिसंबर 2022 को जनहित याचिका दायर कर दी।

यह स्पीकर की अवमानना तो है ही विधायकों के विशेषाधिकार का हनन है। संयम लोढ़ा ने आज विधानसभा में विशेष अधिकार हनन का प्रस्ताव उठाने की अनुमति मांगी है।

कल सदन में तख्तियां लहराने और लगातार हंगामे के कारण आरएलपी के तीनों विधायकों को सदन से दिन भर के लिए सस्पैंड कर दिया गया था। तीनों विधायकों को मार्शल बुलाकर सदन से निकाला गया था।

सदन की कार्यवाही सोमवार तक स्थगित
राज्यपाल के अभिभाषण पर आज बहस के दौरान बीजेपी विधायकों ने सरकार को कानून व्यवस्था, पेपरलीक, बेरोजगारी सहित कई मुद्दों पर जमकर घेरा। अब 25 से लेकर 29 जनवरी तक विधानसभा की कार्यवाही नहीं चलेगी। अब 30 जनवरी को सदन चलेगा। 30 और 31 जनवरी को राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस होगी। 1 फरवरी को ​सदन की छुट्टी रहेगी। 2 फरवरी को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बहस का जवाब देंगे।

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