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राजस्थान उपचुनाव पर भास्कर एग्जिट पोल:3 में से 2 सीट सुजानगढ़ और सहाड़ा पर कांग्रेस की जीत के आसार, राजसमंद पर कांटे की टक्कर

राजस्थान3 महीने पहले
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राजस्थान में 17 अप्रैल को 3 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए थे। इसका रिजल्ट 2 मई को आना है। जनता का मूड जानने के बाद भास्कर ने तीनों सीटों का एग्जिट पोल किया है। पोल के मुताबिक, कांग्रेस की दो और सीट बढ़ सकती हैं, जबकि एक सीट पर कांटे की टक्कर है। यह सीट है राजसमंद।

यहां पर किरण माहेश्वरी की बेटी दीप्ति माहेश्वरी को मजबूत माना जा रहा है, लेकिन ऐनवक्त पर भितरघात व गुलाबचंद कटारिया के महाराणा प्रताप को लेकर दिए विवादित बयान से सस्पेंस बना हुआ है। सुजानगढ़ और सहाड़ा सीट कांग्रेस के खाते में जाती दिख रही है।

कांग्रेस ने सुजानगढ़ और सहाड़ा, भाजपा ने राजसमंद में सहानुभूति कार्ड खेलते हुए दिवंगत विधायकों के परिजनों को टिकट दिए हैं। ऐसे में कांग्रेस का सहानुभूति कार्ड सफल होता दिख रहा है। भाजपा के सहानुभूति कार्ड के चलने में पेंच है। राजसमंद सीट पर चौंकाने वाले परिणाम आ सकते हैं। कांग्रेस और भाजपा दोनों में से किसी का प्रत्याशी जीत सकता है।

सुजानगढ़: कांग्रेस का सहानुभूति कार्ड कामयाब, भाजपा को खींचतान का नुकसान
सुजानगढ़ में वोटिंग प्रतिशत कम रहा। कम वोटिंग प्रतिशत ने चौंकाया जरूर है, लेकिन दिवंगत मास्टर भंवरलाल के बेटे मनोज मेघवाल के प्रति सहानुभूति देखी गई है। इसी फैक्टर के चलते कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग हुई है। जो परिणाम में बदलती दिख रही है। भाजपा उम्मीदवार खेमाराम मेघवाल को पार्टी के एक धड़े की तरफ से अंदरूनी तौर पर नुकसान पहुंचाने की भी चर्चा है। इसका असर वोटिंग पर हुआ। आरएलपी उम्मीदवार सोहन नायक ने दोनों पार्टियों के वोट काटे हैं, लेकिन भाजपा का नुकसान ज्यादा हुआ है। यही वजह है कि बूथों पर कांग्रेस मजबूत दिखी।

2008 से लेकर अब तक के विधानसभा चुनाव में सबसे कम मतदान इस बार हुआ। माना ये भी जाता है कि कम मतदान प्रतिशत सत्ताधारी पार्टी के ही पक्ष में जाता है। हर बार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-भाजपा में सीधी टक्कर रहती थी, इस बार आरएलपी की एंट्री से कुछ जातिगत वोटर्स के बंटवारे से दोनों दलों के वोट कटने तय माने जा रहे हैं।

सहाड़ा: पितलिया-आरएलपी फैक्टर से भाजपा को नुकसान, ऐनवक्त पर भाजपा प्रत्याशी को कोरोना होने का भी नुकसान
सहाड़ा में दिवंगत कांग्रेस विधायक कैलाश त्रिवेदी की पत्नी गायत्री देवी को टिकट देकर चला गया सहानुभूति कार्ड कामयाब होता दिख रहा है। कैलाश त्रिवेदी परिवार की प्रतिष्ठा और सहानुभूति दोनों ही कांग्रेस के पक्ष में गईं हैं। भाजपा को सहाड़ा में अपने ही बागी लादूलाल पितलिया को दबाव देकर नाम वापस करवाने और आरएलपी उम्मीदवार बद्रीलाल जाट से भी नुकसान हुआ है।

सहाड़ा में जातीय ध्रुवीकरण भी हुआ है, इसका नुकसान भाजपा को हुआ। भाजपा उम्मीदवार रतनलाल जाट वोटिंग से ठीक तीन दिन पहले कोरोना पॉजिटिव हो गए। इस वजह से दो नुकसान हुए- पहला-आखिर का चुनाव मैनेजमेंट गड़बड़ा गया। दूसरा- मतदाताओं में एक मैसेज यह भी चला गया कि वापस उपचुनाव का सामना न करना पड़े।

हालांकि, जाट ने अपने सकुशल होने का मैसेज भी दिया, लेकिन अफवाहों ने नुकसान जरूर पहुंचाया। उधर, लादूलाल पितलिया के समर्थकों ने भी भाजपा से दूरी बनाई और नोटा में वोट दिए। इसका सीधा नुकसान भाजपा को और फायदा कांग्रेस को ही हुआ है। आखिर में ठीक से चुनाव मैनेजमेंट नहीं संभाल पाना, पितलिया-आरएलपी फैक्टर ने भाजपा का जबरदस्त नुकसान किया। ऊपर से आखिर में भाजपा उम्मीदवार के कोरोना पॉजिटिव होने से भी रणनीतिक बढ़त कांग्रेस के खाते में चली गई।

राजसमंद: ग्राउंड में भाजपा मजबूत, लेकिन आखिरी दिनों में बदले समीकरण से उलझन
राजसमंद सीट पर पब्लिक पर्सेप्शन में भाजपा को सहानुभूति कार्ड का फायदा मिलता दिख रहा है, लेकिन यहां आखिर में गड़बड़ाए समीकरणों ने उलझन बढ़ा दी है। भाजपा की पूर्व मंत्री रहीं किरण माहेश्वरी की छवि ने उनकी बेटी काे यहां पर कई इलाकों में बढ़त दिलाई है। भाजपा ने किरण माहेश्वरी की बेटी दीप्ति माहेश्वरी को टिकट दिया। वहीं, कांग्रेस में केलवा के मार्बल व्यापारी तनसुख बोहरा को उम्मीदवार बनाया गया। पर्सेप्शन और प्रचार में भाजपा मजबूत है, लेकिन उन्हें भितरघात का सामना भी करना पड़ा है। राजसमंद सीट भाजपा का गढ़ रही है।

कांग्रेस के उम्मीदवार तनसुख बोहरा के सामने पहचान का संकट था, युवा वर्ग से उनका जुड़ाव नहीं दिखा। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया की महाराणा प्रताप को लेकर की गई बयानबाजी से नाराजगी का असर अगर वोटिंग पर हुआ है तो यहां भाजपा को कुछ नुकसान हो सकता है। कांग्रेस के लिए यहां उम्मीद भाजपा का भितरघात और कटारिया के बयान से नुकसान ही है, यहां भाजपा की जीत में उलझन के पीछे यही दो बड़े फैक्टर हैं। राजसमंद सीट फील्ड से लेकर पर्सेप्शन तक भाजपा उम्मीदवार का पलड़ा भारी था, लेकिन भितरघात और कटारिया के बयान से नुकसान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
(नोट: भास्कर ने अपना एग्जिट पोल अपने न्यूज नेटवर्क के रिपोर्टर्स और स्ट्रिंगर्स की मदद से किया है)

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