गहलोत का पायलट कैंप के मंत्रियों पर तंज:मंत्रिपरिषद की बैठक में कहा- ये तो छोड़कर चले गए थे; 80 विधायक नहीं गए, तभी सरकार बची

जयपुर8 महीने पहले

कांग्रेस की महंगाई के खिलाफ 12 दिसंबर को होने वाली रैली की तैयारी बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बगावत करने वाले सचिन पायलट खेमे के मंत्रियों और विधायकों पर फिर तंज कसा है। कहा- आप मंत्री इसीलिए हो कि 80 लोग छोड़कर नहीं गए। तभी आज सरकार है और हम मंत्रिपरिषद की बैठक कर रहे हैं। रमेश मीणा, विश्वेंद्र सिंह, हेमाराम चौधरी तो छोड़कर चले गए थे। 80 विधायक रुके और हमें छोड़कर नहीं गए, तभी तो सरकार बची है।

बगावत को याद किया
सीएम निवास पर शुक्रवार को हुई मंत्रिपरिषद की अनौपचारिक बैठक में संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रभारी अजय माकन की मौजूदगी में गहलोत ने नाम लेकर पायलट खेमे के मंत्रियों-विधायकों की बगावत को याद किया। सीएम ने अपने भाषण में मंत्रियों को अपने दरवाजे खुले रखने और जनता की सुनवाई करने की नसीहत दी। गहलोत ने कहा कि कई मंत्री अब भी दरवाजे बंद रखते हैं। यह ठीक नहीं है। सबको दरवाजे खुले रखने होंगे और फील्ड में जनता को सुनना होगा। गहलोत ने सचिन पायलट कैंप की बगावत का जिक्र छेड़ दिया। मंत्रियों को सुनवाई करने की नसीहत देने के दौरान ही गहलोत ने पायलट कैंप के मंत्रियों-विधायकों पर तंज कसा।

मुरारी बोले- मुख्यमंत्रीजी, अब तो यह बोलना बंद कीजिए
गहलोत जब पायलट कैंप के विधायकों और मंत्रियों पर तंज कस रहे थे,उस वक्त कई मंत्री हंसते दिखे। पायलट कैंप के बाकी मंत्री तो नहीं बोले लेकिन मुरारीलाल मीणा ने बैठे-बैठे ही सीएम से कहा- मुख्यमंत्रीजी अब तो 19-19 बोलना बंद कर दीजिए। अब तो सब बदल चुका है। हालांकि गहलोत ने मुरारी मीणा की बात पर ध्यान नहीं दिया।

30 नवंबर को गहलोत ने नाम लिए बिना तंज कसा था
यह पहला मौका नहीं है, जब सीएम अशोक गहलोत ने पायलट कैंप के विधायकों पर तंज कसा है। 30 नवंबर को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में रैली की तैयारी बैठक में गहलोत ने नाम लिए बिना पायलट कैंप के विधायकों पर तंज कसा था। गहलोत ने 30 नवंबर को बैठक में कहा था- 19 लोग छोड़कर चले गए थे तो उस वक्त सरकार संकट में आ गई थी। हमारे निर्दलीय साथियों, बसपा से कांग्रेस में आने वाले सा​​थियों ने अगर साथ नहीं दिया होता तो सरकार नहीं बचती। इन साथियों का सरकार बचाने में दिए योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। सरकार बचाने वाले कई लोगों को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली है, लेकिन उन्हें आगे शिकायत नहीं रहेगी।'

वेणुगोपाल- माकन के सामने बगावत को याद कर तंज कसने के सियासी मायने
गहलोत ने मंत्रिपरिषद की अनौपचारिक बैठक में जिस अंदाज में खुलकर सचिन पायलट कैंप की बगावत को याद करके तंज कसा है, उसके सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। गहलोत ने कांग्रेस की राष्ट्रीय स्तर की रैली का जिम्मा लेकर हाईकमान के सामने अपनी पोजीशन मजबूत करने की कोशिश की है। इस मौके को गहलोत ने अपनी बात कहने के लिए भुनाया। दोनों नेताओं के सामने बगावत की बात दोहराने के पीछे यह मैसेज देने का प्रयास भी है कि वे अब भी मजबूत हैं और उन्हें एक करके नहीं आंका जाए।

गहलोत-पायलट खेमों के बीच कोल्ड वार जारी रहने के संकेत

सीएम गहलोत के तेवरों से यह साफ हो गया है कि दोनों खेमों के बीच कोल्ड वोर आगे भी जारी रहेगा। हाईकमान के दबाव में सियासी मजबूरी के कारण गहलोत-पायलट एकता का भले दावा करें, लेकिन हकीकत में ज्यादा कुछ नहीं बदला है। दोनों तरफ टीस बरकरार है। सचिन पायलट भी इशारों में निशाना साध चुके हैं। गहलोत ने उनके समर्थक मंत्रियों पर तंज कसकर उसका जवाब दे दिया। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, गहलोत ने भले ही फॉरगेट एंड फॉरगिव पॉलिसी के तहत अब आगे बढ़ने की बात कही हो, लेकिन ग्राउंड पर यह इतना आसान नहीं बताया जा रहा है।

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