गहलोत बोले- कल्पना नहीं की थी लोकतंत्र खत्म होते देखेंगे:कहा- जनता को भी अब सरकार के खिलाफ खड़ा होना होगा

जयपुर2 महीने पहले

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि हमने कभी कल्पना नहीं की थी कि ऐसा वक्त भी आएगा जब लोगों को डेमोक्रेसी समाप्त होते देखना पड़ेगा। जिस रूप में संविधान की धज्जियां उड़ रही है। उसकी कल्पना नहीं कर सकते। महंगाई, बेरोजगारी, जीएसटी जो कुछ देश में हो रहा है। उसमें सुनवाई करने वाला कोई नहीं है। डेमोक्रेसी खत्म हो रही है। अब समय आ गया है कि जनता को भी आगे आना पड़ेगा। गहलोत दिल्ली कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी के साथ मीडिया से बातचीत कर रहे थे।

गहलोत ने कहा- जब विधानसभा सत्र चल रहा होता है तो जिलों में कोई ऐसी बैठक नहीं कर सकते, जिसमें विधायक को भाग लेना हो। ऐसा पहली बार हुआ, जब संसद का सत्र चल रहा है। उसके बीच मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी को पूछताछ के लिए बुलाया जा रहा है। इसलिए मैंने कहा था कि देश में ईडी का आंतक है। ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई का दुरुपयोग हो रहा है। आज तक हमने सुना था कि सीबीआई पुलिस पर छापा डालती है। हमने पहली बार देखा कि रात में सीबीआई पर पुलिस छापा डाल रही थी। देश में जो कुछ हो रहा है। वह खतरनाक खेल हो रहा है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज सुबह ही जयपुर से दिल्ली गए। दिल्ली में गहलोत ने राहुल गांधी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज सुबह ही जयपुर से दिल्ली गए। दिल्ली में गहलोत ने राहुल गांधी के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया।

डेमोक्रेसी खत्म हो रही है

गहलोत ने कहा- डेमोक्रेसी खत्म हो रही है। अब जनता को भी आगे आना पड़ेगा। आंदोलन कांग्रेस कर रही है, दूसरी विपक्षी पार्टियां भी कर रही हैं। जहां जिसे सूट करे वह साथ दे। एनजीओ, सामाजिक कार्यकर्ताओं को भी सरकार के खिलाफ खड़ा होना होगा। लोगों को महसूस हो रहा है कि कितनी भारी मार है महंगाई की। बेरोजगारी से युवाओं में हाहाकार मचा हुआ है। जीएसटी के नए कारनामे हो रहे हैंं। नेशनल हेराल्ड अखबार पर हमला हो सकता है तो किसी पर भी हो सकता है।

हिटलर की तानाशाही के समय भी जर्मनी के लोग चुप रहे तो देश बर्बाद हो गया था : गहलोत

गहलोत ने कहा- जर्मनी में जब हिटलर की तानाशाही हुई थी, उसके बारे में विचारक मार्टिन निमोले ने जो कहा था वह याद दिलाना चाहता हूं। हिटलर की तानाशाही के वक्त जब विपक्षी पार्टियों, अल्पसंख्यकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों को निशाने पर लेने लगे तो वहां की जनता चुप रही। जनता सोचती रही कि ​राजनीतिक लड़ाई है। 1945 में जर्मनी जब हिटलर की तानाशाही से बर्बाद हो गया तो वहां की जनता को पछताना पड़ा। समय रहते लोकतंत्र के लिए आवाज उठाई जाती तो देश बर्बाद नहीं होता। इसी तरह अगर आज हम आज चुप रहेंगे तो हमें इतिहास माफ नहीं करेगा।