महिला मंत्री अपने ही रिश्तेदारों से परेशान:कांग्रेस MLA ने दी मिनिस्टर को विधानसभा में देख लेने की धमकी

जयपुर5 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
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शहरों का विकास संभालने वाले विभाग का एक आदेश कई अपनों के लिए परेशानी का कारण बनता दिख रहा है। इस रिमाइंडरनुमा आदेश में महिला जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदारों को बोर्ड बैठकों और कामकाज से पूरी तरह दूर रखने का फरमान है। अब एक महिला मंत्री सहित कई नेताओं के लिए यह आदेश परेशानी का कारण बन गया है। महिला मंत्री के परिजन भी शहरी निकायों से लेकर पंचायत समिति तक चुने हुए पदों पर हैं और उनके सहयोग के लिए पुरुष मेंबर जाते रहे हैं। अब सियासी हलकों में चर्चाएं हैं कि यह आदेश तो महिला मंत्री के लिए ही परेशानी का कारण बनेगा।

मंत्री और विधायक की भिड़ंत
पूर्वी राजस्थान के मंत्रियों की भरमार वाले जिले में सत्ताधारी पार्टी के दो नेताओं में घमासान मचा हुआ है। सड़कों वाले मंत्री के खिलाफ उनकी ही पार्टी के विधायक और बोर्ड अध्यक्ष ने मोर्चा खोल दिया है। विधायक मंत्री की शिकायतें करते-करते थक चुके हैं। मंत्रीजी के खिलाफ खुलकर ठेकेदारों को ऑब्लाइज करने के आरोप लगा रहे हैं। बड़े घर तक शिकायत करके देख ली लेकिन न अब कुछ हुआ और न आगे संभावना है। थक हारकर विधायक ने अब विधानसभा सत्र का इंतजार करना शुरू कर दिया है। विधायक ने अब विधानसभा में मंत्री के खिलाफ दस्तावेजों के साथ घोटाले के आरोप लगाने की चेतावनी दे दी है। अब जिस पार्टी में यह हाल हो वहां विपक्ष की क्या जरूरत?

अब हर महीने हैदराबाद के नेता का राजस्थान दौरा

चुनावी साल नजदीक आने के साथ अब सियासी सरगर्मियां बढ़ेगी। प्रदेश में सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं के बाद नए सियासी समीकरण बनते दिख रहे हैं। हैदराबाद के एक नेता भी अपनी पार्टी की जड़ें जमाना चाहते हैं। हैदराबाद वाले नेता अब हर महीने राजस्थान दौरे पर रहकर पार्टी से लोगों को जोड़ने की योजना बना रहे हैं। अंदरखाने चर्चा है कि दक्षिण की यह पार्टी फिलहाल किसी को प्रदेशाध्यक्ष नहीं बनाएगी, इसलिए ख्वाब देख रहे कई नेता निराश हो सकते हैंं।

प्रदेश के मुखिया के कई वंचित समर्थकों का फूटा दर्द
सत्ताधारी पार्टी में राजनीतिक नियुक्तियों से वंचित नेताओं का अलग दर्द है। सरकार के मुखिया के खेमे से जुड़े वंचित नेताओं का इन दिनों अनायास ही दर्द फूट पड़ता है। पिछले दिनों सत्तधारी पार्टी के मुख्यालय में ऐसे कई वंचित नेता राजनीतिक विमर्श कर रहे थे। थोड़ी देर की चर्चा के बाद ही नेताओं का दर्द फूटने लगा। एक नेता ने तो यहां तक कह दिया कि बाकी नेता तो बोल सकते हैं, वे तो अब न मांग सकते हैं और न कह सकते हैं। इससे अच्छा तो बागी तेवर वाले नेता ही फायदे में है जो कम से कम प्रेशर तो बना सकते हैं। अब बड़े नेताओं का समर्थक होने के अपने फायदे-नुकसान हैं।

विपक्षी पार्टी के नेताजी की बड़ी मुलाकातों से हलचल

प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी में प्रदेश से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज है। चुनावी साल से पहले कई बदलावों की आहट है। संगठन के मुखिया लगातार बड़े नेताओं से मुलाकातें कर रहे हैं। लुटियंस में हुई बड़ी मुलाकातों की खूब चर्चाएं हो रही हैं। इन मुलाकातों को अकारण नहीं बताया जा रहा। चुनावी साल से पहले जल्द नेताओं के रोल तय हो रहे हैं, ऐसे में विपक्षी पार्टी में आगे बहुत कुछ रणनीतिक फेरबदल देखने को मिलेंगे।

सचिवालय में ठेके के अफसरों पर तनातनी

खर्च बचाने के लिए सरकार में ठेके के कर्मचारी रखने का ट्रेंड शुरू हुआ। एक दूसरा ट्रेंड है रिटायरमेंट के बाद अफसर-कर्मचारियों को उसी विभाग के ऑफिस में ठेके पर रखना। सचिवालय में कई अहम विभागों में रिटायर्ड अफसर फिक्स वेतन पर काम कर रहे हैं। रिटायर्ड अफसरों को संविदा पर रखने के खिलाफ सचिवालय सेवा के अफसर-कर्मचारी खुलकर सामने आते रहे हैं। सरकार से जुड़े एक बहुत महत्त्वपूर्ण विभाग में तो ठेके के अफसर आदेशों पर साइन कर रहे हैं। इसे लेकर सचिवालय सेवा के अफसरों का ग्रुप खासा नाराज है। नाराजगी का कारण यह भी है कि एक तरफ बेरोजगारों की लंबी कतार है और दूसरी तरफ रिटायरमेंट के बाद भी अफसर कुर्सी नहीं छोड़ना चाहते।

इमेज बिल्डिंग के लिए सरकार बदलेगी रणनीति
चुनाव साल नजदीक आने के साथ ही सरकार को देश दुनिया में छवि सुधारने की चिंता सताने लगी है। इसके लिए बड़े लेवल पर ब्रेन स्टॉर्मिंग की गई है। कई प्रोफेशनल एजेंसियों से इमेज बिल्डिंग के लिए लंबा डिस्कशन हुआ है। कई बिन मांगे सलाह वाली एजेंसियां भी पहुंच रही है। अब तक प्रचार की रणनीति और इस पर खर्च होने वाले बजट का भी इंपेक्ट ऑडिट किया है, जिसमें कई आत्मघाती गलतियां भी सामने आई हैं। प्रचार के मोर्चे पर सामने आई खामियों को ठीक करने की शुरुआत हो चुकी है। इसके लाभार्थियों को जल्द फाइनेंशियल इंपैक्ट नजर आ सकता है।

इलेस्ट्रेशन : संजय डिमरी

वॉइस ओवर: प्रोड्यूसर राहुल बंसल

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