कांग्रेस की रैली के बाद बड़ी नियुक्तियों की तैयारी:बोर्ड-निगम में अध्यक्ष और सदस्यों के साथ संसदीय सचिव बनेंगे; असंतुष्ट विधायकों की नियुक्तियां होंगी, वेतन-भत्ता नहीं

जयपुरएक वर्ष पहले

कांग्रेस की महंगाई के खिलाफ होने वाली 12 दिसंबर की रैली के बाद बड़ी तादाद में नेताओं को राजनीतिक नियुक्तियां देने की तैयारी है। कई असंतुष्ट विधायकों को आगे खाली पड़े बोर्ड निगम और आयोग में अध्यक्ष बनाकर संतुष्ट करने पर विचार चल रहा है। 15 के करीब संसदीय सचिव बनाए जाने की भी चर्चा है। यह सब काम कांग्रेस की रैली के कारण अटक गया है। 17 दिसंबर को गहलोत सरकार की तीसरी वर्षगांठ के आसपास संसदीय सचिवों की नियुक्ति से लेकर राजनीतिक नियुक्तियों का काम किया जा सकता है।

गहलोत मंत्रिमंडल के फेरबदल के बाद कई विधायक नाराज हैं, उन्हें अब संसदीय सचिव और राजनीतिक नियुक्तियों के जरिए संतुष्ट किया जाएगा। बसपा से कांग्रेस में आए 5 विधायक मंत्रिमंडल में जगह​ नहीं मिलने से नाराज हैं, उन्हें भी इन दोनों में जगह देकर संतुष्ट किया जा सकता है। बसपा मूल के तीन विधायकों को खाली पड़े बोर्ड में अध्यक्ष बनाया जा सकता है। गहलोत समर्थक निर्दलीय और कांग्रेस विधायकों को भी एडजस्ट किया जाएगा। पायलट समर्थक नेताओं और विधायकों को भी शेयरिंग पैटर्न के हिसाब से जगह मिलनी है।

विधायकों को न मंत्री का दर्जा मिलेगा, न वेतन-भत्ते
विधायकों को बोर्ड, निगम और आयोग में अध्यक्ष पद से लेकर संसदीय सचिव तक बनाए जाने पर न मंत्री का दर्जा मिलेगा, न उन्हें किसी तरह के वेतन भत्ते मिलेंगे। यह सब लाभ के पद के दायरे से बाहर करने के लिए किया जाएगा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पिछले दिनों साफ कह चुके हैं कि अगर मंत्री का दर्जा और वेतन भत्ते नहीं दिए जाएं तो कितने ही विधायकों को संसदीय सचिव और सलाहकार बनाओ कौन रोकने वाला है।

विधायक मंत्री के अलावा वेतन-भत्ते मिलने वाला दूसरा पद नहीं ले सकता
सुप्रीम कोर्ट के आदेश और कानूनी प्रावधानों के अनुसार विधायक मंत्री को छोड़कर किसी ऐसे पद पर नहीं रह सकता, जिसमें वेतन भत्ते मिलते हों और वह लाभ का पद हो। विधायकों को इस प्रावधान से बचाने के लिए ही अब सरकार ने तरीका निकाला है कि विधायकों को बिना मंत्री का दर्जा दिए और बिना वेतन भत्ते दिए राजनीतिक नियुक्ति दी जाए।

मुख्यमंत्री के 6 सलाहकार की नियुक्ति पर सवाल उठने के बाद नया तरीका
6 विधायकों को मुख्यमंत्री का सलाहकार बनाए जाने पर बीजेपी ने लाभ का पद होने का सवाल उठाते हुए राज्यपाल से शिकायत की। राज्यपाल ने सरकार से जवाब मांगा। सरकार ने किसी भी तरह के लाभ के पद पर नियुक्ति से साफ इनकार कर दिया। अभी तक मुख्यमंत्री के सलाहकार बनाए गए विधायकों को न मंत्री का दर्जा दिया और न वेतन भत्ते देने का आदेश किया। सीएम के सलाहकार बनाए गए विधायकों को सरकार की तरफ से कोई वेतन भत्ते नहीं मिलेंगे। आगे यही पैटर्न विधायकों करो दी जाने वाली दूसरी नियुक्तियों में अपनाया जाएगा।

तीन साल से खाली पड़े हैं बोर्ड, आयोग अध्यक्ष के पद
सरकार बने तीन साल पूरे हो गए, इस दौरान सरकारी और ऑटोनोमस बोर्ड, निगम और आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली चल रहे हैं। इन बोर्ड, निगम में सैकड़ों नेताओं को अध्यक्ष-सदस्यों के खाली पदों पर एडजस्ट किया जाएगा।

इन निगम,समितियों, प्राधिकरण में अध्यक्ष-सदस्यों के पद खाली
राजस्थान पर्यटन विकास निगम आरटीडीसी, राजस्थान राज्य बीज निगम, जन अभाव अभियोग निराकरण समिति, लघु उद्योग विकास निगम, बुनकर सहकारी संघ,मेला विकास प्राधिकरण, जयपुर, जोधपुर,अजमेर विकास प्राधिकरण में अध्यक्ष पद, 20 सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति में उपाध्यक्ष और सदस्य,सेंटर फॉर डैवलपमेंट ऑफ वॉलंटरी सेक्टर

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