ओपन लाइव कैबिनेट में कोरोना पर मंथन:गहलोत बोले- 9 महीने के अंतराल के बाद तीसरी डोज का क्या मतलब,एक्सपर्ट बोले-5 माह बाद वैक्सीन 20% ही सुरक्षा देती है

जयपुरएक वर्ष पहले
मंत्रिपरिषद की बैठक जनता के लिए ओपन है, जिसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग लाइव देख रहे।

राजस्थान में कोरोना (डेल्टा वैरिएंट) और ओमिक्रॉन के बढ़ते मामलों को लेकर CM रेजिडेंस पर करीब पौने दो घंटे तक ओपन मंत्रिपरिषद की बैठक में मंथन में एक्सपर्ट्स ने एक सुर में पांबदियों का सुझाव दिया। बैठक में डॉक्टरों ने कहा कि प्रदेश में हर्ड इम्युनिटी वकिसित होने के संकेत मिले हैं। कोरोना वैक्सीन छह महीने तक ही सुरक्षा देती है, छह माह बाद बूस्टर डोज लगनी चाहिए। सीएम अशोक गहलोत ने भी 9 महीने बाद प्रीकॉशन डोज लगाने के केंद्र के प्रावधान पर सवाल उठाए।

सीरो सर्वे में 90% एडल्ट और 76% बच्चों में एंटीबॉडी विकसित
एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल सुधीर भंडारी ने कहा कि हाल ही में करवाए गए सीरो सर्वे में अच्छी बात यह है कि 90% लोगों में एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है। 76% बच्चों में भी एंटीबॉडी डवलप हो चुकी है। इसका मतलब है कि हम हर्ड इम्युनिटी की तरफ बढ रहे हैं। इम्युनिटी बढ़ने से खतरा कम हो गया है। वैक्सीनेशन हर वैरिएंट पर प्रभावी है।

एक्सपर्ट बोले- मार्च जैसे ही हालात आज
मेडिकल एक्सपर्ट वीरेंद्र सिंह ने कहा, आज के हालात वैसे ही हैं, जैसे मार्च में थे। पांच दिन में तीन गुणा पॉजिटिविटी रेट हो गया है। दो मॉडल हैं, जिनके तहत पाबंदियां लगती हैं। दिल्ली में .5% रेट पर लॉकडाउन का प्रावधान है, जबकि महाराष्ट्र में बेड ऑक्युपेसी का मॉडल है।

5 माह बाद वैक्सीन 20% ही सुरक्षा देती है
वीरेंद्र सिंह ने कहा- वैक्सीन लगे हुए व्यक्ति को कम खतरा है। वैक्सीन से एक महीने बाद 85 फीसदी तक सुरक्षित हैं। अगर 5 से 6 माह हो जाएं तो प्रोटेक्शन 20 फीसदी ही रह जाता है। वैक्सीन का बूस्टर डोज 5 से 6 महीने में ही लग जाना चाहिए। ओमिक्रॉन के लक्षण कुछ अलग हैं। ओमिक्रॉन में गले में दर्द, नाक से पानी आना जैसे लक्षण हैं। अंदर इतना ज्यादा इंफेक्शन नहीं है। ओमिक्रॉन के 1 फीसदी लोगों को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा है, जबकि डेल्टा में 2 फीसदी लोग भर्ती हो रहे हैं।

डेल्मिक्रॉन आया तो तबाही मचा सकता है
वीरेंद्र सिंह ने कहा- यूके में डेल्मिक्रॉन की वजह से डेथ हो रहे हैं। आज स्टेट में ओमिक्रॉन 12 फीसदी है तो सप्ताह भर में 75 फीसदी भी हो सकता है।

9 महीने के अंतराल के बाद तीसरी डोज का क्या मतलब
सीएम गहलोत ने कहा— तीसरी डोज नौ महीने का कैसे तय हुआ। मुझे लगता है केंद्र ने प्रीकॉशन डोज इसलिए नाम दिया है ताकि सब लोग वैक्सीन नहीं मांगें। केंद्र ने रास्ता निकाल दिया कि 60 साल से ऊपर, बीमार, इनको ही लगे। कितनी चालाकी से काम हो रहा है। जो दो डोज लगी है, वही वैक्सीन तीसरी लगाने का प्रावधान है। एक्सपर्ट कह रहे हैं कि मिक्स डोज भी लगे तो सही है। संख्या ज्याादा है, इसलिए घबराए हुए हैं। पीएम कह रहे हैं कि 15 से 18, जबकि भारत सरकार की पीसी में 12 से 18 कह रहे थे। लग रहा है कि केंद्र सरकार जुगाड़ कर रही है।

शादियों में लोगों की संख्या कम करने का सुझाव
एसएमएस अस्पताल के डॉ.पीआर गुप्ता ने कहा, दाह संस्कार में 20 लोग की लिमिटेशन करनी चाहिए। शादियों में 200 लोगों की बाध्यता करें। बाद में इसे 40 करना चाहिए। गैदरिंग पर रोक लगनी चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री बोले- जयपुर में विस्फोटक हालात
स्वास्थ्य मंत्री परसादीलाल मीणा ने कहा कि जयपुर में तो कोरोना का विस्फोट हो रहा है। यहां पर मुख्यमंत्री कोई फैसला करें। वर्ना मामले और बढ़ेंगे। जयपुर सहित जिन ​8-9 जिलों में मामले ज्यादा हैं, वहां तो पाबंदियां लागू होनी चाहिए। सबसे पहले जयपुर में सख्ती करनी जरूरी है।

न्यू ईयर पर विशेषज्ञों की एडवाइस
सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि न्यू ईयर के लिए होटलों में बुकिंग हो चुकी है। वह कैंसिल नहीं होगी। पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने बैठक मेंं हेल्थ एक्पर्ट से पूछा था कि न्यू ईयर पर होटलों में कहीं जगह नहीं है। न्यू ईयर की भीड़ पर क्या एडवाइज करेंगे। क्रिसमस के बाद मामले बढ़े थे। इस पर डॉ वीरेंद्र सिंह ने कहा, आउटडोर में रिस्क कम है, जबकि एसी और इनडोर में खतरा ज्यादा है। न्यू ईयर पर लोग सावधानी बरतें।

डॉ अशोक अग्रवाल बोले- दूसरी डोज में एक महीने का वक्त नहीं दे
मेडिकल एक्सपर्ट अशोक अग्रवाल ने कहा- संभव हो तो हमें इसे बूस्टर डोज ही बोलना चाहिए। तीसरे महीने से एंटीबॉडी का गिरना शुरू हो जाता है। इसलिए नौ महीने बाद बूस्टर डोज बहुत लेट है। एक महीना सेकेंड डोज लगवाने का समय ज्यादा दे रहे हैं। एक करोड़ लोग बचे हैं। दूसरी डोज लगाने के लिए 31 जनवरी तक का समय नहीं देना चाहिए। उससे पहले ही दूसरी डोज लगवाने का प्रावधान कर देना चाहिए।

डॉ. रमन शर्मा बोले- बड़ी गैदरिंग से बचें
रमन शर्मा ने कहा, बड़ी गैदरिंग वाली पार्टी और आयोजन नहीं होने चाहिए। विदेशों में एक्सपर्ट ने क्रिसमस से पहले एडवाइज दी थी। प्रीकॉशनरी नाम इसलिए रखा है कि अभी दो से तीन वैक्सीन और आ रही हैं। इसलिए यह नाम दिया है। एक वैक्सीन का ट्रायल तो एसएमएस में ही हुआ है। नेजल वैक्सीन भी आई है।

वैक्सीन की डबल डोज की अनिवार्यता
ज्यादातर जगहों पर एंट्री के लिए वैक्सीन की डबल डोज की अनिवार्यता लागू होगी। इस पर पहले फैसला हो चुका है। नई गाइडलाइन में सरकारी दफ्तरों, बाजारों के लिए वैक्सीन की डबल डोज वालों को ही एंट्री का प्रावधान गाइडलाइन में शामिल किया है।

1 जनवरी से मास्क पर सख्ती
सार्वजनिक जगहों पर बिना मास्क निकलने वालों पर सख्ती की जाएगी। 1 जनवरी से बिना मास्क वालों से सख्ती से जुर्माना वसूलने का प्रावधान किया जाएगा।

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