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ट्रेड लाइसेंस के विरोध में मंत्री-विधायक:जयपुर में व्यापारियों से बोले- लागू नहीं होने देंगे, 11 को बंद पर अड़े और कहा- आपके आश्वासन पर नहीं, ऑर्डर पर भरोसा

जयपुर5 महीने पहले
मंत्री खाचरियावास के निवास पर मंत्री व कांग्रेस विधायकों के साथ व्यापारियों की बैठक।

जयपुर में ट्रेड लाइसेंस लागू करने और भारी भरकम फीस वसूली के खिलाफ व्यापारियों ने 11 सितंबर को बाजार बंद का ऐलान किया है। कांग्रेस सरकार के मंत्री और विधायक बैकफुट पर आ गए हैं। गुरुवार देर रात तक दो दौर की अलग-अलग मंत्रियों के साथ हुई वार्ता के बाद भी व्यापारी अपनी बात पर अडिग हैं। उन्होंने फिलहाल बंद के ऐलान को वापस लेने का कोई इरादा नहीं किया है।

व्यापारियों के अडिग फैसले के बाद डैमेज कंट्रोल के लिए आए मंत्रियों ने अपनी ही सरकार के खिलाफ ये तक कह दिया कि वे इसे लागू नहीं होने देंगे, व्यापारी चिंता नहीं करें। सरकार के 6 मंत्री-विधायकों ने जयपुर ग्रेटर नगर निगम के ट्रेड लाइसेंस को लेकर जारी नोटिस पर नाराजगी जताई। उन्होंने ट्रेड लाइसेंस नीति को खत्म करवाने की बात कह दी।

व्यापारियों के साथ पहली बैठक परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास के निवास पर हुई। इसमें मंत्री-विधायकों ने व्यापारियों के सामने ट्रेड लाइसेंस और फीस वसूली पर असहमति जताई। व्यापारियों को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि इसे जयपुर में लागू नहीं होने दिया जाएगा।

सा नियम लागू नहीं होने देंगे, जिसमें व्यापारियों की सहमति न हो
परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, सरकारी मुख्य सचेतक और हवामहल से विधायक डॉ महेश जोशी, आदर्श नगर से विधायक रफीक खान और किशनपोल से विधायक अमीन कागजी और बगरू विधायक गंगादेवी ने व्यापारियों के साथ मीटिंग की। बातचीत में मंत्री समेत 6 विधायकों ने एक सुर में कहा कि हम ऐसा कोई नियम लागू नहीं होने देंगे, जिसमें व्यापारियों की सहमति नहीं हो।

यूडीएच मंत्री से बात करनी हो, चाहे मुख्यमंत्री से- हम करेंगे पूरी कोशिश
सरकारी मुख्य सचेतक डॉ महेश जोशी ने कहा कि जयपुर एक व्यापारिक क्षेत्र है। पूरे जयपुर में रोजगार देने का सबसे बड़ा जरिया दुकानें ही हैं, जिसमें फुटपाथ पर बैठने वाले से लेकर बड़े शोरूम का मालिक शामिल हैं। जिस तरह से ट्रेड लाइसेंस शुल्क लगाया गया है, हम इससे सहमत नहीं हैं। हम इसके बारे में चाहे यूडीएच मंत्री से मिलना पड़े, चाहे मुख्यमंत्री के सामने जाकर निवेदन करना पड़े। हम व्यापारियों की मांगों के समर्थन में इस बारे में अपनी तरफ से हर संभव कोशिश करेंगे। हमारा विश्वास है कि इस तरीके से हम ट्रेड लाइसेंस को लागू नहीं होने देंगे।

महेश जोशी ने कहा कि जयपुर में दुकानें ही रोजगार का सबसे बड़ा जरिया है। व्यापारियों के साथ ही हम भी ट्रेड लाइसेंस और फीस वसूली से सहमत नहीं हैं। अब चाहे यूडीएच मंत्री से इसके लिए बात करनी हो, चाहे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पास जाकर आग्रह करना हो, हम इसकी पूरी कोशिश करेंगे।

मंत्री खाचरियावास बोले- हमें फांसी थोड़े ही चढ़ा दोगे, आपकी मांग मान तो ली है
कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने व्यापारियों के डेलीगेशन से कहा कि अब हमने आपकी मांग को मान लिया है। हम कह रहे हैं कि अब ट्रेड लाइसेंस देने का नियम लागू नहीं कर रहे हैं, बात खत्म। अब जो हो गया उसमें क्या कर सकते हैं। आप क्या हमें फांसी पर थोड़े ही चढ़ा दोगे। ऐसा भी नहीं है कि हम तो डरे हुए ही बैठे हैं और हम 11 तारीख को घर से बाहर ही नहीं निकलेंगे। अब इतना भी मत करो। आप हमारे घर के लोग हो। पार्टी बाजी तो होती रहती है। बीजेपी वाले कहते हैं और चुनौती देते हैं। तो मैं कहता हूँ कि आ जाना, मैं आ रहा हूं। ये ऐसे ही होता रहता है। आप व्यापारी हो और हम सरकार हैं। हमारी सब की जिम्मेदारी बनती है कि कांग्रेस-बीजेपी से ऊपर उठकर सोचें। मंत्री खाचरियावास ने सभी व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि व्यापारी, ठेले वाले, खोमचे वाले, थड़ी लगाने वाले, फुटपाथ पर सब्जी बेचने और छोटा-मोटा काम कर अपना और परिवार का गुजारा चलाने वाले किसी भी व्यक्ति को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। गहलोत सरकार का हर नुमाइंदा कोरोना संकट के वक्त में लोगों की समस्याएं और बिगड़ती आर्थिक स्थिति को समझता है। ट्रेड लाइसेंस को जयपुर में लागू नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री और यूडीएच मंत्री से सभी विधायक बात करके ट्रेड लाइसेंस की नीति को खत्म करवाएंगे।

फिर देर रात यूडीएच मंत्री ने बुलाया, व्यापारियों की दो टूक
देर रात यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने व्यापारियों की बात सुनी और ट्रेड लाइसेंस को लेकर मुख्यमंत्री से चर्चा करने का आश्वासन दिया है। मंत्री ने व्यापारियों से कहा कि वे अब तो अपना बंद वापस ले लें, लेकिन व्यापारियों ने मंत्री को स्पष्ट तौर पर कह दिया कि आपके आश्वासन पर नहीं, लाइसेंस के फैसले को वापस लेने के ऑर्डर पर बंद वापस लिया जाएगा। सीएम अशोक गहलोत कह दें कि वे यह फैसला वापस करा रहे हैं तो बंद को टालने पर विचार किया जा सकता है।

जयपुर व्यापार महासंघ ने किया है 11 सितम्बर को बाजार बंद का ऐलान
दरअसल, जयपुर व्यापार महासंघ ने 11 सितंबर को पूरी तरह शहर के बाजार बंद रकने का ऐलान किया है। नगर निगम जयपुर हैरिटेज और नगर निगम जयपुर ग्रेटर की ओर से ट्रेड लाइसेंस के तौर पर फीस वसूली के खिलाफ व्यापारी लामबन्द हैं। व्यापारियों का कहना है कि ट्रेड लाइसेंस के विरोध में हम चार्ज नहीं देंगे। जयपुर बंद करके व्यापारी अपनी बात को सरकार तक पहुंचाएंगे। इस दौरान राजस्थान विधानसभा सत्र भी जारी रहेगा। ऐसे में यह मुद्दा राजस्थान विधानसभा में भी बीजेपी सहित निर्दलीय विधायक जोर-शोर से उठा सकते हैं।

150 व्यापार संगठनों का बंद को है समर्थन
व्यापार महासंघ की ओर से जयपुर के चैंबर ऑफ कॉमर्स भवन में दो दिन पहले महासभा की बैठक हुई। इसमें उद्योग व्यपार महासंघ संघर्ष समित बनाई गई, जिसे 150 संगठनों का समर्थन हासिल है। ये सभी संगठन नगर निगम हेरिटेज और ग्रेटर की ओर से ट्रेड लाइसेंस के तौर पर शुल्क वसूली के खिलाफ लामबंद हुए। इस फीस वसूली के विरोध की रणनीति तैयार की गई। व्यापारियों ने 11 सितम्बर को जयपुर बन्द की घोषणा की है।

इसलिए बंद और विरोध
निगम की सीमा में सभी तरह की कमर्शियल एक्टिविटी करने वाले व्यापारियों को यह ट्रेड लाइसेंस लेना जरूरी कर दिया है। नगर निगम इसके तहत 5 तरह की फीस वसूल करेगा। गजट नोटिफिकेशन लागू होने के साथ ही निगम ने फीस भी तय कर दी है।

ट्रेड लाइसेंस लेने के लिए 5 कैटेगरी और उनकी फीस

1. कोचिंग इंस्टीट्यूट, लाइब्रेरी रजिस्ट्रेशन और परमिशन फीस- स्टूडेंट्स की संख्या के आधार पर रजिस्ट्रेशन चार्ज 1 साल के 10 हजार रुपए से लेकर 2 लाख 50 हजार रुपए तक है। 5 साल के लिए 20 हजार रुपए से लेकर 3 लाख रुपए तक फीस लगेगी।

2. होस्टल, पेइंग गेस्ट का रजिस्ट्रेशन और परमिशन फीस – 5 बेड्स से लेकर अधिक बेड्स तक के लिए 5 हजार रुपए से लेकर 20 हजार रुपए तक वार्षिक फीस तय है।

3. निजी अस्पताल, नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर, क्लिनिक और पैथ लैब का रजिस्ट्रेशन और परमिशन फीस- 300 वर्गमीटर एरिया से लेकर उससे ज्यादा एरिया के लिए 10 हजार से 20 हजार रुपए रजिस्ट्रेशन फीस है। इसके अलावा हर साल डायग्नोस्टिक सेंटर से 10 हजार और हॉस्पिटल, क्लिनिक से 1 लाख से 5 लाख रुपए तक फीस ली जाएगी।

4. तम्बाकू प्रोडक्ट्स की बिक्री पर अस्थाई दुकानों, फुटपाथ पर थड़ी, ठेला, फुटकर दुकानें, थोक विक्रेताओं से हर साल 1 हजार से 25 हजार रुपए तक परमिशन चार्ज। इसके अलावा 100 रुपए से 1000 रुपए तक रजिस्ट्रेशन फीस लगेगी।

5. होल सेल, खुदरा और अन्य सामान बेचने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन- पशु-पक्षी आहार के 15 हजार, पालतू जानवरों, बिल्डिंग मेटेरियल की दुकानों से 1 से 5 लाख रुपए, गारमेंट्स, होजरी और कपड़ा बिजनेस पर 25 हजार, जूते-चप्पल की दुकान के लिए 12 हजार रुपए, टेंट दुकान के 50 हजार, शराब की दुकान के 1 लाख रुपए, अण्डे की दुकान के 12 हजार, सब्जी की दुकान के 12 हजार और किराणा-जनरल मर्चेंज स्टोर, केमिस्ट-दवाइयों की दुकान के लिए 25 हजार रुपए फीस लगेगी।

भारी ट्रेड फीस के विरोध में व्यापारी हुए एकजुट
भारी भरकम फीस के विरोध में इन तमाम व्यापारी संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एंड इंडस्ट्री- फोर्टी के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल, कार्यकारी अध्यक्ष अरुण अग्रवाल, टेंट डीलर्स किराया व्यवसाय समिति के चेयरमैन रवि जिंदल, व्यापार मण्डल के अध्यक्ष ललित सिंह सांचोरा, राजस्थान व्यापार महासंघ के अध्यक्ष सुभाष गोयल, महामंत्री सुरेन्द बज, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश सैनी और कार्यकारी अध्यक्ष हरीश केडिया, व्यापार प्रकोष्ठ के संयोजक रवि नैयर समेत कई पदाधिकारी इस बैठक में मौजूद रहे।

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