राजस्थान के अस्पतालों में उपलब्ध बेड्स का रियलिटी चेक:एक-एक बेड के लिए मारामारी; बाहर घंटों बैठ कर रहे भर्ती होने का इंतजार, पोर्टल पर बेड खाली, वास्तव में जगह नहीं

राजस्थान टीम7 महीने पहले
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जयपुर का आरयूएचएस अस्पताल में मरीजों को बेड नहीं मिला पा रहा है। जमीन में लेटकर उनका इलाज हो रहा है। - Dainik Bhaskar
जयपुर का आरयूएचएस अस्पताल में मरीजों को बेड नहीं मिला पा रहा है। जमीन में लेटकर उनका इलाज हो रहा है।

कोरोना से पूरे राजस्थान में हालात बेकाबू हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन, आईसीयू और वेंटिलेटर को लेकर मारामारी मची है। लोग अपनों को लेकर इधर-उधर अस्पतालों में धक्के खा रहे हैं। घंटों ओपीडी ब्लॉक और अस्पतालों की लॉबी में बैठकर इंतजार कर रहे हैं कि कब बेड खाली हो और उनका नंबर आए।

प्रदेश के अलग-अलग जिलों से भास्कर के रिपोर्टरों ने जब अस्पतालों में फोन पर और मौके पर जाकर जायजा लिया तो हालात डरावने नजर आए। पाली में बेड के इंतजार में महिला की अस्पताल के बाहर मौत हो गई। वृद्धा का पति जिले के सबसे बड़े बांगड़ अस्पताल में चिकित्साकर्मियों को अपनी बीमार पत्नी तारादेवी को भर्ती करने की गुहार लगाता रहा। लेकिन वहां किसी ने मरीज को देखना तो दूर ढ़ंग से बात तक नहीं की।

पाली के बांगड़ अस्पताल में जगह नहीं मिलने के बाद एक वृद्ध महिला ने ऑटो में तोड़ा दम।
पाली के बांगड़ अस्पताल में जगह नहीं मिलने के बाद एक वृद्ध महिला ने ऑटो में तोड़ा दम।

सुबह से अस्पताल के बाहर बैठे ओपीडी में किसी ने देखा तक नहीं
टोंक जिले के लावा से आए नारायण सिंह ने बताया कि वह अपनी बेटी संतोष कंवर को सांस में तकलीफ की शिकायत के बाद RUHS दिखाने आए। यहां पहुंचने पर स्टाफ ने ओपीडी में पहले तो देखने से मना कर दिया और कहा कि बेड फुल हो गए हैं। जगह नहीं है। करीब 3 घंटे तक RUHS के बाहर बैठे रहे और वहां काफी जद्दोजहद की, लेकिन किसी ने ओपीडी में भी नहीं देखा। बाद में जैसे- तैसे करके अस्पताल में दोबारा स्टाफ और डॉक्टरों से बात की तो उन्होंने देखा और कोरोना सहित अन्य जांचें करवाई, लेकिन उसके बावजूद भी अस्पताल में भर्ती नहीं किया।

राजधानी में 3 जगह चक्कर काटने के बाद चौथी जगह मिला ऑक्सीजन बेड
जयपुर के श्री गोविंद नगर बेनाड़ रोड निवासी रवि सैनी (30) कोरोना से संक्रमित हुए। रवि के पिता निर्मल सैनी ने बताया कि सिटी स्कैन में 50% फेंफड़े संक्रमित बता रहे हैं। इस कारण सांस लेने में तकलीफ आ रही है। सांस में तकलीफ लेने की शिकायत के बाद परिजन RUHS लेकर पहुंचे, लेकिन यहां स्टाफ ने देखे बिना ही दूसरे अस्पताल जाने की बात कही। परिजन जयपुरिया अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन यहां भी उन्हें स्टाफ ने बेड नहीं होने की बात कहकर किसी दूसरे अस्पताल में जाने के लिए बोल दिया।

अस्पताल संचालक बोला, ले जाओ यहां से हमारे पास नहीं है व्यवस्था
इधर, एमआई रोड के पास एक निजी अस्पताल में भर्ती 52 साल की महिला प्रभाती देवी की स्थिति बिगड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। मरीज रविवार को अस्पताल में भर्ती हुई थी। लेकिन यहां अस्पताल में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलने से स्थिति सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई। दो दिन इलाज के बाद सोमवार देर शाम डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। मरीज का दूसरी जगह शिफ्ट करवाने का दबाव बनाने लगे।

दिखावटी साबित हो रहा है सरकार का पोर्टल
सरकार ने आमजन की सुविधा के लिए एक पोर्टल चालू किया गया है। इसमें अस्पतालों की बेड्स की रियलटाइम स्थिति दर्शाने की बात कही, लेकिन वह भी केवल दिखावटी साबित हो रहा है। जयपुर के सरकारी अस्पताल जयपुरिया में ही करीब ऑक्सीजन सपोर्ट वाले 175 में से 34 बेड खाली बता रहे हैं, लेकिन जब मौके पर मरीज भर्ती होने पहुंचे तो बेड खाली न होने का हवाला देकर वापस लौटा दिया। पूरे जयपुर की स्थिति देखें तो यहां 86 अस्पतालों में 1409 बेड्स हैं, लेकिन इनमें से बमुश्किल 25 बेड्स भी खाली नहीं है।

  • नागौर की बात करें तो यहां पोर्टल पर जिले में कुल 353 बेडस की व्यवस्था बताई है। रिएलिटी चेक की तो पता चला कि पूरे जिले में एक भी वेंटिलेटर और आईसीयू बेड खाली नहीं है। PMO शंकरलाल जाट ने बताया कि जेएलएन अस्पताल में सभी बेड्स फुल हैं। उन्होंने बताया कि केवल सामान्य बेड जरूर कुछ खाली हैं, लेकिन इस समय डिमांड आईसीयू, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर बेड्स की है।
  • अलवर में जिला अस्पताल में 200 से अधिक मरीज भर्ती हैं। लेकिन यहां भी वेंटिलेटर व आइसीयू के बेड नहीं है। केवल सामान्य बेड खाली पड़े हैं। पोर्टल पर 682 में से 385 बेड, आईसीयू के 133 में से 37 खाली और वेंटिलेटर के 67 में से 9 बेड्स खाली बताए।
  • चित्तौड़गढ़ में कहीं भी बेड खाली नहीं है। न ऑक्सीजन है, न वेंटिलेटर और न ही आईसीयू। वहीं, इसके विपरित पोर्टल पर ऑक्सीजन के 6 बेड्स खाली दर्शा रखे हैं।
  • बाड़मेर में वेबपोर्टल पर दिए नंबर पर जब कॉल करके पूछा तो वहां केवल ऑक्सीजन बेड ही खाली होना बताया, जबकि आईसीयू और वेंटिलेटर को फुल बताया। पोर्टल पर स्थिति कुछ और ही बता रही थी। आईसीयू के 25 में से 12 और वेंटिलेटर के 22 में से 6 बेड्स खाली बता रहे थे।
  • सीकर में स्थिति संतोषजनक नजर आई। दोनों अस्पतालों में बात की तो दोनों जगहों पर वेंटिलेटर उपलब्ध होने के लिए कहा।
  • कोटा में भी स्थिति भयावह हो रही है। यहां मेडिकल कॉलेज से जुड़े तमाम अस्पताल फुल हो चुके हैं। दोपहर तक सरकारी अस्पताल में एक भी ऑक्सीजन बेड खाली नहीं था।
  • अजमेर में जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय प्रशासन भले ही ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति का दावा कर रहा है, लेकिन यहां मरीजों को भर्ती करने के लिए न तो ऑक्सीजन बेड खाली है और न वेंटिलेटर और न आईसीयू। अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनिल जैन से बात की तो उनका यही कहना रहा कि मरीज के आने पर व्यवस्था कर दी जाएगी, कोई परेशानी नहीं होगी।
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