यह OLA गाड़ी रिक्शा–भाड़ा में चलती है:नेटबंदी की ऐसी मार; भूखे मरने की नौबत, पढ़िए झकझोर देने वाली कहानियां

जयपुरएक महीने पहलेलेखक: किरण राजपुरोहित

सुबह 6:00 बजे। रोज की तरह मैं तेजी से चला जा रहा था। भाईजी, भाईजी… भाईजी! मेरे कानों में एक आवाज आई। मैं रुका और मुड़कर देखा तो पीछे से एक नारियल पानी का ठेला लगाने वाला पुकार रहा था। मैं लौटकर उसके पास गया और पूछा- क्या हुआ?

कहा- दो दिन से बिना बात किए जा रहे हो। मैं सन्न। बोला, ऐसी कोई बात नहीं। इंटरनेट बंद है…बस इतना कहते ही बोला, भाईजी! पांच दिन हो गए इंटरनेट बंद हुए। पहले से 10% व्यापार नहीं रहा। हर कोई पेटीएम, फोन पे और गूगल-पे या नेट से ही पैसा देता है। रोज 100 नारियल बिकते थे, पांच दिन में सिर्फ 15 नारियल बिके हैं। जेब में किसी के पास पैसा नहीं और मेरे नारियल बिकते नहीं...।

शिवशंकर लगातार बोल रहा था। मैं एकटक सुन रहा था। कुछ मिनटों में जो कहानी उसने सुनाई, वो अंदर तक हिला देने वाली थी। बोला, गांव से आया हूं। किराए पर रहता हूं। बच्चे हैं। छोटा भाई है। सबका खर्चा मैं ही उठा रहा हूं। दिन में 300-400 रुपए कमाता हूं तो गुजारा चलता है। पांच दिन में 100-125 रुपए भी नहीं कमा पाया। आटा- दाल कहां से लाऊं? नारियल पानी के साथ ही मेरी और शिवशंकर की बातचीत खत्म हो जाती है। आगे बढ़ने से पहले नेटबंदी के असर पर नीचे दिए गए पोल में हिस्सा लेकर आप अपनी राय व्यक्त कर सकते हैं।

नारियल पानी का ठेला लगाने वाले कई लोगों को नहीं पता कि इंटरनेट बंद क्यों किया गया। एक युवक बोला- पहले लोगों को डिजिटल की आदत लगा दी। अब नेटबंदी कर देते हैं।
नारियल पानी का ठेला लगाने वाले कई लोगों को नहीं पता कि इंटरनेट बंद क्यों किया गया। एक युवक बोला- पहले लोगों को डिजिटल की आदत लगा दी। अब नेटबंदी कर देते हैं।

हमें नहीं मतलब, फालतू की बातों से
सेंट्रल पार्क में नारियल पानी का ठेला लगाने वाले नरेंद्र ने भी ऐसी ही कहानी सुनाई। कहा, इंटरनेट बंद करना सरकार को छोटी बात लगती होगी। आम आदमी से पूछो कितना दर्द देती है?
नरेंद्र से पूछा, इंटरनेट बंद क्यों किया पता है? बोला, फालतू की बातें हैं, हमें क्या मतलब? बंद करवाना है तो Whatsapp और Facebook बंद करो।
लोगों को पहले तो डिजिटल की आदत लगाई और अब कहते हैं नेटबंदी! मैं आगे की तरफ बढ़ गया। थोड़ी ही दूर चला था कि कदम ठिठक गए..।

खाने के पचास रुपए उधार रखे

एक कार पर लिखा था, 'ये OLA कैब है.. रिक्शा की तरह भाड़े पर चलती है।' मुझे समझ नहीं आया। मैंने दरवाजा खटखटाया। तपाक से एक व्यक्ति बाहर निकला और मुझसे पूछा- कहां चलोगे? उसके चेहरे पर मुस्कान थी। मैंने कहा आगे तक। किराया बताया और वो चल दिया।

अचानक नेट बंद होने से ओला चलाने वाले लोगों पर संकट आ गया। क्योंकि कई लोगों ने किस्तों पर गाड़ी खरीद कर ओला में लगा रखी है।
अचानक नेट बंद होने से ओला चलाने वाले लोगों पर संकट आ गया। क्योंकि कई लोगों ने किस्तों पर गाड़ी खरीद कर ओला में लगा रखी है।

उसने मुझसे कहा, बाबूजी लगता है आप वॉक पर निकले हो। कार से क्यों जा रहे हो? मैंने कहा, आपका पोस्टर पढ़कर। कुछ इसके बारे में बताओ। कार ड्राइवर दिनेश की आंखों से टप-टप आंसू गिरने लगे। मैंने संभलकर कहा- भाई! गलत पूछ लिया तो माफ करना।

दिनेश ने जवाब दिया- नहीं। पांच दिन में ये दूसरा भाड़ा है। घर में खाने को पैसे नहीं है। एक तारीख को गाड़ी की 14 हजार की किस्त भरनी थी। आज 3 जुलाई हो गई। किस्तों में गाड़ी खरीद कर OLA में लगा रखी है। घर में बीमारी आ गई थी तो कुछ पैसे खर्च हो गए। सोचा आगे एक-दो दिन में कवर कर दूंगा, 29 जून अचानक नेट बंद हो गया। अब चार-पांच दिन हो गए। बजट बिगड़ गया है। खाने के भी पैसे नहीं बचे। 50 रुपए भी उधार रखकर खाना खाया है। इनके साथी किशन ने भी ऐसा ही पोस्टर लगा रखा था।

हर दिन ओला चलाकर 1000 रुपए कमाने वाले दिनेश का परिवार इसी से चलता है। नेटबंदी ने इनके काम पर भी ब्रेक लगा दिया।
हर दिन ओला चलाकर 1000 रुपए कमाने वाले दिनेश का परिवार इसी से चलता है। नेटबंदी ने इनके काम पर भी ब्रेक लगा दिया।

कांग्रेस और बीजेपी लड़ाई में व्यस्त
दिनेश अपनी स्थिति बताते हुए कहता है कि कांग्रेस और बीजेपी अपनी लड़ाई में व्यस्त है। खाने के पैसे नहीं है। हर दिन 1000 रुपए कमाता हूं तब घर चलता है, लेकिन नेटबंदी ने कहीं का नहीं छोड़ा। दिनेश, किशन, शिवशंकर ही इस कहानी के पात्र नहीं हैं। ऐसे हजारों लोग थे जिनकी जिंदगी को नेटबंदी ने रोक दिया। कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहे स्टूडेंट, आम जनता दवा से लेकर बिजली-पानी तक का बिल भरने के लिए इंटरनेट पर डिपेंड थे।

राजस्थान में 10 साल में 86 से ज्यादा बार इंटरनेट बंद किया जा चुका है, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि 3 दिन के लिए पूरा राज्य ऑफलाइन हो गया।
राजस्थान में 10 साल में 86 से ज्यादा बार इंटरनेट बंद किया जा चुका है, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि 3 दिन के लिए पूरा राज्य ऑफलाइन हो गया।

सिर्फ डेटा लॉस नहीं, जीवन को हिला दिया
"इस नेटबंदी ने सिर्फ डेटा का लॉस नहीं किया, बल्कि जीवन चक्र को हिला दिया। देश में कश्मीर के बाद सबसे ज्यादा नेटबंदी राजस्थान में हुई है, लेकिन प्रदेश में ये इंटरनेट बंदी अब तक की सबसे बड़ी बंदी है। इसने लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए हैं।" उदयपुर में कन्हैयालाल की हत्या ने आम आदमी को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन बड़ा दर्द डिजिटल आपातकाल की वजह से भी मिला।

देश में कश्मीर के बाद सबसे ज्यादा नेटबंदी राजस्थान में हुई है। कन्हैयालाल हत्याकांड के बाद प्रदेश में इंटरनेट बंदी का सबसे लंबा दौर रहा। इसने लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए।
देश में कश्मीर के बाद सबसे ज्यादा नेटबंदी राजस्थान में हुई है। कन्हैयालाल हत्याकांड के बाद प्रदेश में इंटरनेट बंदी का सबसे लंबा दौर रहा। इसने लोगों के मौलिक अधिकार छीन लिए।

राजस्थान ने देखी दशक की सबसे बड़ी नेटबंदी
राजस्थान में इंटरनेटबंदी नई बात नहीं है या यूं कहें अब तो सरकारों ने इसे किसी भी समस्या का इलाज मान लिया है। एग्जाम कराना हो, धार्मिक यात्रा निकालनी हो या अफवाहें फैलने का डर। सरकार तुरंत इंटरनेट बंद कर देती है। 10 साल में 86 से ज्यादा बार इंटरनेट बंद किया जा चुका है, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ कि 3 दिन के लिए पूरा राजस्थान ऑफलाइन हो गया। इससे पहले नेटबंदी हुई, लेकिन जिले विशेष में। प्रतियोगी परीक्षाओं में पूरे प्रदेश में इंटरनेट बंद होता है, लेकिन एक दिन के लिए। आज से पहले कभी पूरे प्रदेश में इतने दिनों के लिए कभी नेट बंद नहीं किया गया।

75 लाख का नुकसान दिनेश जैसे कैब ड्राइवर्स को
राजस्थान में दिनेश जैसे 5 हजार कैब ड्राइवर हैं। एक की औसत कमाई 500 रुपए होती है। इस हिसाब से आकलन किया जाए तो 3 दिन इंटरनेट बंद के कारण इन कैब ड्राइवर्स को 75 लाख का नुकसान झेलना पड़ा।