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संक्रमण काल में संक्रांति/राजस्थान:पतंगबाजी के बीच कोटा में एक बच्चे और उदयपुर में युवक की मौत; जयपुर में 18, सीकर में 13 लोग और दौसा में एक जख्मी

जयपुर4 महीने पहले
उदयपुर खेरवाड़ा में चाइनीज मांझे से कटकर युवक की मौत हो गई।
  • जयपुर समेत प्रदेश के विभिन्न अंचलों में अलग-अलग तरह का नजारा दिखा
  • कई शहरों में परिंदे भी घायल, कई की मौत
  • उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर में छतों पर दिखे पतंगबाज

राजस्थान में मकर संक्रांति का पर्व उत्साह के साथ मनाया गया। करीब 10 महीने बाद यह पहला पर्व है जिस पर कोरोना का असर नहीं दिखा। लेकिन, उत्साह और उल्लास के इस पर्व के बीच कुछ हादसे की खबरें भी आईं। कोटा में पतंग लूटते समय एक बालक की मौत हो गई है। पतंग लूटते समय वह बालक ट्रेन के इंजन से टकरा गया। वहीं, उदयपुर खेरवाड़ा में चाइनीज मांझे से कटकर युवक की मौत हो गई। युवक बाइक से जा रहा था। तभी चाइनीज मांझा उसके गले में फंस गया। जब तक वह कुछ समझ पाता, तब तक युवक का गर्दन कट गई। ज्यादा खून बहने से युवक की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक युवक का नाम लक्ष्य है।

झुंझुनूं में पतंगबाजी के दौरान 70 साल की बुजुर्ग का चाइनीज मांझे से पैर कट गया। जिन्हें पांच टांके लगाए गए हैं। इधर, दौसा के लालसोट में भी एक व्यक्ति चाइनीज मांझे से घायल हो गया। उधर, जयपुर में दो गुटों के बीच पत्थरबाजी हुई। साथ ही करौली के नादौती में मकर संक्रांति मेले को रोके जाने पर ग्रामीणों और पुलिस के बीच जमकर पथराव हुआ।

सीकर में मांझे से 13 लोग गंभीर घायल हुए। यह सभी सरकारी अस्पताल पहुंचे हैं। वहीं, जयपुर में अब तक 18 लोगों के चेहरे मांझे से कटने की खबर है। कई और शहरों से मांझे से लोगों के घायल होने की सूचनाएं भी हैं। राजधानी जयपुर, सीकर, कोटा समेत कई शहरों में परिंदे भी मांझे में उलझकर जमीन पर गिरे मिले।

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दान का अनूठा तरीका:महिलाएं हर अमावस्या को कलेक्शन करती हैं, फिर मौका पड़ने पर जरुरतमंद की मदद करती हैं

पुष्कर में शाही स्नान किया गया।
पुष्कर में शाही स्नान किया गया।

अजमेर से सुनील जैन की रिपोर्ट
अजमेर की धार्मिक नगरी पुष्कर का माहौल पूरी तरह बदला हुआ दिखा। यहां पुष्कर सरोवर तड़के से ही आबाद हो गया था। मंदिरों में श्रद्धालुओं की नियमित संख्या कई गुना दिखाई दिए। पुष्कर सरोवर में स्नान-ध्यान और मंदिरों में प्रभु की आराधना का सिलसिला लगातार चलता रहा।

पतंगबाजी- जयपुर के बाद सबसे अधिक पतंगबाजी यहीं नजर आई। छतों पर बच्चे-बड़े और महिलाएं मौजूद रहे। गाने बजते रहे और डांस भी चलता रहा। प

राजनेताओं की संक्रांति, किसी ने पतंग उड़ाई तो किसी ने लिया सन्यासियों से आशीर्वाद

कोचिंग सिटी कोटा में भी की जा रही पतंगबाजी।
कोचिंग सिटी कोटा में भी की जा रही पतंगबाजी।

कोटा से मुकेश सोनी की रिपोर्ट

पतंगबाजी के उल्लास के बीच एक परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। यहां एक 14 वर्षीय किशोर की पतंग लूटते समय मौत हो गई। वह पतंग लूटते आकाश की ओर देखता रहा। आंखों से पतंग को निशाना बनाकर उसके पीछे-पीछे वह आगे दौड़ता रहा और रेलवे लाइन पर पहुंच गया। यहां पटरी पर दौड़ते इंजन से वह जा टकराया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक कोटा के महात्मा गांधी कॉलोनी का रहने वाला है। जो दिल्ली मुंबई रेल लाइन से गुजर रही ट्रेन से टकरा गया। पटरी के पास ही 300 फीट पर ही मकान बने हैं, जिनमें से एक मकान से यह बालक पतंग लूटने निकला था।

झुंझुनूं LIVE:मांझे से हाथ न कट जाए, इसलिए बच्चों को दिला रहे गुब्बारे, खुद उड़ा रहे पतंग

अलवर में मकर संक्रान्ति पर क्रिकेट खेलते लोग।
अलवर में मकर संक्रान्ति पर क्रिकेट खेलते लोग।

अलवर से धर्मेंद्र यादव की रिपोर्ट
राजस्थान के सिंह द्वार में पतंग केवल वे लोग उड़ा रहे हैं, जो अन्य शहर से यहां आकर रहने लगे हैं। कारण, यहां रक्षाबंधन के दिन पतंगबाजी होती है। मकर संक्रांति पर बैट-बॉल, सितोलिया यानी बॉल् से खेले जाने वाले खेलों पर जोर रहता है। यही कारण है कि कोरोना में आमतौर पर सूने मैदान, अहाते सब आबाद हैं। बच्चे-युवा सभी बॉल लिए यहां जमा हुए और अपने-अपने तरीके के खेलों में मशगूल रहे। अलवर के राजर्षि महाविद्यालय में राजपरिवार के समय से तरणताल है, जो दशकों से भरा नहीं है। यह भी पूरी तरह खेल का मैदान बना हुआ है।

झुंझुनू में अभिभावक अपने बच्चों को चाइनीज मांझा से हाथ ना कट जाए इसलिए गैस के गुब्बारे दिलवा रहे थे।
झुंझुनू में अभिभावक अपने बच्चों को चाइनीज मांझा से हाथ ना कट जाए इसलिए गैस के गुब्बारे दिलवा रहे थे।
झुंझुनूं मे भी छतों पर चढ़े लोग।
झुंझुनूं मे भी छतों पर चढ़े लोग।
चाइनीज मांझे से कटने के कारण महिला के पैर में पांच टांके आए।
चाइनीज मांझे से कटने के कारण महिला के पैर में पांच टांके आए।

झुंझुनूं से उत्तम जोशी की रिपोर्ट

झुंझुनूं में पतंगबाजी के दौरान 70 साल की बुजुर्ग का चाइनीज मांझे से पैर कट गया। जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया। महिला का नाम मोहिनी बताया जा रहा है। जिनका बेटा उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचा। वहीं, चाइनीज मांझा से घायल पक्षियों के निशुल्क इलाज के लिए मंडावा मोड़ पर चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया है। इस दौरान चाइनीज मांझे से घायल पक्षियों का इलाज किया गया है। अब तक कुल 10 से ज्यादा घायल पक्षियों का इलाज किया जा चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता डॉ अनिल खिचड़ ,सौरव कुमार, मुकेश दाधीच ,अंकित कुमार और गौरव कुमार के सहयोग से यह कार्य किया गया।

बीकानेर में मंदिर के दर्शन करने पहुंचे लोग।
बीकानेर में मंदिर के दर्शन करने पहुंचे लोग।

बीकानेर से अनुराग हर्ष की रिपोर्ट

शहर के घर-घर में दान-पुण्य की परंपरा को ही हिस्सा बना रहा। यहां मकर संक्रांति पर बुधवार से ही शहर में जगह जगह दान पुण्य का सिलसिला नज़र आया। बुधवार को अमावस्या पर दान हुआ तो इससे कई गुना ज्यादा दान पुण्य मकर संक्रांति पर गुरुवार को नज़र आया। सर्वाधिक दानी लोग लक्ष्मीनाथ मंदिर पर नज़र आये। जहां कतारबद्ध बैठे लोगों को अन्न, गर्म कपड़े, तिल, जौ, तेल, घरेलू सामान तक दिए गए। यहीं पर एक गौशाला में बड़ी भीड़ नज़र आई। गायों को चारा देने वाले बीकानेर में बड़ी संख्या में है। जो ईदगाह बारी केपास, मेडिकल कॉलेज के पास, तुलसी सर्किल के पास भी नज़र आये।

सीकर से दिनेश गौतम की रिपोर्ट

शेखावाटी में भी पतंगबाजी चरम पर पहुंच गई है। इस बीच चाइनीज मांझे पर बैन के बावजूद इस्तेमाल से बडृी संख्या में लोग घायल हो गए हैं। मांझे से घायल होकर अब तक 13 लोग अस्पताल पहुंच चुके हैं। जबकि पशु चिकित्सालय में भी घायल परिंदों को ले जाया जा रहा है।

जोधपुर से सुनील चौधरी की रिपोर्ट
सूर्य नगरी में पतंगबाजी की परंपरा नहीं के बराबर है। राजस्थान की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं को मानने वाले इस शहर में तड़के उठना, स्नान-ध्यान करना और मंदिरों तक जाना, कुछ ऐसा ही सिलसिला मकर संक्रांति को देखने को मिला। यह सिलसिला इस खास पर्व के लिए आम इसलिए बन गया है, क्योंकि मंदिरो की रौनक बढ़ गई है। दान-पुण्य की परंपरा का निर्वहरण किया जा रहा है। हर हाथ से समर्पण का भाव खुल कर दिखाई दिए।

उदयपुर से स्मित पालीवाल

राजधानी जैसा आलम यहां अभी नहीं बन पाया, लेकिन कुछ स्थानों पर पतंगबाजी की गई। फतह सागर की पाल पर कुछ लोग एक साथ कई-कई पतंग उड़ाते दिखे। यह बेहद आकर्षण का केंद्र बना रहा।

दौसा के लालसोट से कमलेश आशिका की रिपोर्ट

यहां ज्योतिबा फुले सर्किल पर एक बाइक सवार युवक मांझे की चपेट में आ गया। इससे उसकी गर्दन पर कट लग गया। अस्पताल से उसे जयपुर रैफर कर दिया गया है।

यह ध्यान रखें

यदि आप गैस के गुब्बारे बच्चों को दिला रहे हैं तो थोड़ा सावधानी अवश्य बरतें। एक-एक गैस के गुब्बारे से खेलें। इकट्‌ठा करके यानी समूह में लेकर गुब्बारे न रखें, उनमें आग लगने का खतरा बना रहता है। बीते वर्ष जयपुर में एक ऐसा हादसा हो चुका है।

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