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राजस्थान में यहां साथ रहते हैं लेपर्ड और इंसान:20 गांवों में रहती है लेपर्ड की 50 से ज्यादा फैमिली, इंसानों के साथ है अनोखा रिश्ता, आज तक नहीं किया हमला

जयपुर3 महीने पहलेलेखक: जयदीप पुरोहित

यह है राजस्थान का एकमात्र जवाई पैंथर कंजर्वेशन एरिया। यह पूरा एरिया दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी और बड़ी अरावली रेंज से घिरा है। घना जंगल और पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा जवाई डैम भी यहीं पर है। इन सभी के बीच जो इनमें सबसे खास है वो यहां के लेपर्ड (तेंदूआ) हैं। दावा किया जाता है कि यहां के लेपर्ड दुनिया में सबसे अनूठे और अनोखे हैं, क्योंकि यह इंसानों के बीच रहते हैं। आज तक इन्होंने कभी इंसानी आबादी को नुकसान नहीं पहुंचाया। इस कारण इंसान भी इनके संरक्षण में लगे हुए हैं।

पाली जिले के सुमेरपुर के पास के एरिया को कुछ सालों पहले जवाई लेपर्ड कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया था, क्योंकि यहां लेपर्ड की संख्या सबसे ज्यादा थी। यहां के पैरवा, सैणा, जीवदा, बिसलपुर, दूदनी, कोठार, लालपुरा, सिवेरा और लुंदाड़ा समेत करीब 20 गांव ऐसे हैं, जहां पैंथर की 50 फैमिली हैं। ज्यादातर पैंथरों का ठिकाना इंसानी आबादी के निकट है। कई बार तो ऐसे फोटो भी सामने आए हैं जब इंसान से कुछ दूरी पर पैंथर बैठा है।

मंदिर की सीढ़ियों पर आराम से घूमते रहते हैं पैंथर।
मंदिर की सीढ़ियों पर आराम से घूमते रहते हैं पैंथर।

पुजारी के साथ पैंथर का फोटो, इस रिश्ते का सबसे बेहतर उदाहरण

कुछ साल पहले पैरवा गांव से एक फोटो सामने आया था, जहां एक मंदिर के बाहर पुजारी बैठे हैं और उनके सामने ही लेपर्ड था। दूसरा फोटो भी इन्हीं का था, जिसमें पैंथर सीढ़ियों पर बैठे हैं और कुछ ही दूरी पर पुजारी कुर्सी लगाए आराम कर रहे हैं। सफारी के दौरान कई वीडियो भी ऐसे सामने आए हैं, जिनमें टूरिस्ट के सामने पैंथर फैमिली घूम रही है।

कुछ सालों में यह देश का नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन पाइंट बना है।
कुछ सालों में यह देश का नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन पाइंट बना है।

एक्सपर्ट बोले- जब खाना मिल रहा है तो क्यों करेगा हमला

आमतौर पर धारणा यह है कि इंसानों के निकट रहने वाले जानवर इंसानों पर हमला करते हैं, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है। लेपर्ड भूखे होने पर यहां के निवासियों के जानवर उठा ले जाते हैं, लेकिन आज तक किसी इंसान पर उन्होंने हमला नहीं किया है।

यहां के वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट डॉ. दिलीप अरोड़ा बताते हैं कि कई सालों से इंसान और पैंथर एक-दूसरे के नजदीक रह रहे हैं और एडजस्ट हो चुके हैं। लेपर्ड भी जानते हैं कि यहां से उन्हें खाना मिल रहा है, इसलिए वह इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाते।

5 साल में बना नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन, सेलिब्रिटी की पसंद

अब तक जवाई की पहचान यहां के सबसे बड़े डैम से थी। पैंथर के कारण कुछ सालों में यह देश का नया टूरिस्ट डेस्टिनेशन प्वाइंट बना है। लेपर्ड सफारी के लिए यह सबसे बेहतर जगहों में से एक है। यहां सचिन तेंदुलकर से लेकर कई बड़े सेलिब्रिटी आ चुके हैं। इतना ही नहीं यहां कई एड फिल्म भी शूट हो चुके हैं। यहां हर साल टूरिस्ट की संख्या भी बढ़ती जा रही है।

जवाई लेपर्ड एरिया एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जहां आज तक लेपर्ड ने इंसानों पर हमला नहीं किया है।
जवाई लेपर्ड एरिया एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जहां आज तक लेपर्ड ने इंसानों पर हमला नहीं किया है।

डांट कर भगा देते हैं लोग
यहां के पैंथर इंसानों के साथ इतने घुल-मिल गए हैं कि कई बार आमना-सामना हो चुका है। यहां रहने वाले लोग बताते हैं कि शाम को यह पहाड़ियों पर बैठे दिख जाते हैं। कभी किसी से सामना भी होता है तो वह जोर से आवाज लगाकर या डांट डपटकर उसे भगा देते हैं।

राजस्थान में दूसरी जगह आदमखोर पैंथर
ऐसा नहीं है कि राजस्थान में कहीं ओर लेपर्ड नहीं हैं। उदयपुर, कुंभलगढ़ और अन्य ऐसे एरिया हैं जहां लेपर्ड और पैंथर दोनों हैं, लेकिन वहां इन्सानों पर हमले आम बात है। हाल ही में उदयपुर जिले में एक आदमखोर पैंथर को पकड़ा था, जो चार इंसानों को मार चुका था। इससे पहले वह घर से एक महिला को उठाकर जंगल में ले गया। अजमेर में भी आदमखोर पैंथर है, लेकिन जवाई लेपर्ड एरिया एक मात्र ऐसा क्षेत्र है जहां आज दिन तक लेपर्ड ने इंसानों पर हमला नहीं किया।

कंटेंट सपोर्ट: दिलीप अरोड़ा

फोटो व वीडियो: सीपी सिंह राठौड़-अक्षय सिंह राणावत

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