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आकाशीय बिजली से सावधान!:राजस्थान में 24 घंटे में 23 लोगों की मौत, 3 दिन में 31 जिलों में गिर सकती है बिजली; जानिए कैसे बचें बिजली से

जयपुर/बीकानेर5 महीने पहलेलेखक: अनुराग हर्ष
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राजस्थान में मानसून सक्रिय हो गया है, जहां एक तरफ लोगों ने राहत महसूस की। वहीं, दूसरी तरफ ये कुछ परिवार पर कहर बनकर गिरा। प्रदेश में 24 घंटे के अंदर बिजली गिरने से 23 लोगों की मौत हो गई। खतरा फिलहाल टला नहीं है। मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में राज्य में बिजली गिरने का सिलसिला जारी रह सकता है। विभाग ने इसके संबंध में अलर्ट जारी कर चेतावनी भी दी है। राज्य के कई जिलों में ये अलर्ट जारी किया गया है, जिससे लोगों की जान पर खतरा बना हुआ है।

मौसम विभाग के अनुसार राज्य में अगले 3 दिन यानी 15 जुलाई तक कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। विभाग के मुताबिक तीन दिन में कुल 31 जिलों में भारी बारिश के साथ बिजली गिर सकती है। जिसमें जयपुर, अजमेर, कोटा, बीकानेर जैसे बड़े जिले भी शामिल हैं।

13 जुलाई को यहां गिर सकती है बिजली
पूर्वी राजस्थान- अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बारां, भरतपुर, भीलवाड़ा. बूंदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, जयपुर, झुंझुनूं, सीकर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, उदयपुर, राजसमंद, सिरोही, टोंक में बिजली गिरने के साथ तेज बारिश की संभावना। वहीं, पश्चिमी राजस्थान में बाड़मेर, बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगह, नागौर, पाली, जालौर और जोधपुर में सामान्य बिजली गिरने का अलर्ट है।

14 जुलाई को यहां चेतावनी
अजमेर, अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा. बूंदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, डूंगरपुर, जयपुर, झुंझुनूं, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, उदयपुर, सिरोही, टोंक में बिजली गिर सकती है। वहीं, पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर, जैसलमेर, चूरू, नागौर, जालोर में भी चेतावनी।

15 जुलाई को यहां रहे सावधान
अलवर, भरतपुर, भीलवाड़ा. बूंदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, जयपुर, झुंझुनूं, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, उदयपुर, सिरोही, टोंक बिजली गिर सकती है। साथ ही पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर, चूरू, पाली, जालोर में हल्की बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी है।

जयपुर के आमेर में हुए हादसे के बाद की तस्वीर, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी।
जयपुर के आमेर में हुए हादसे के बाद की तस्वीर, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई थी।

राजस्थान के इतिहास में पहली बार एक दिन में बिजली गिरने से 23 की मौत
प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी आकाशीय बिजली दुखांतिका में रविवार को एक ही दिन में 23 लोगों की मौत हो गई। इनमें आमेर महल के सामने वॉच टावर पर बिजली गिरने से दम तोड़ने वाले 11 लोग भी शामिल हैं। प्रदेश में कुल 27 लोग घायल हुए। रविवार को जयपुर के आमेर में 11, कोटा में 4 और धौलपुर में 3 बच्चों की आकाशीय बिजली गिरने से मौत हो गई थी। इसके अलावा अलग-अलग जिलों में भी बिजली गिरने से 5 लोगों की मौत हो गई।

राजस्थान में इससे पहले बिजली गिरने से एक साथ कई लोगों की मौत का मामला सामने आया था। करीब एक साल पहले राजसमंद में बिजली गिरने से एक साथ तीन दोस्तों की मौत हुई थी। वहीं, करीब दो महीने पहले भरतपुर में एक पति-पत्नी की बिजली गिरने से मौत हुई थी।

तेज बारिश के बीच खुले स्थानों पर जाने से बचे लोग।
तेज बारिश के बीच खुले स्थानों पर जाने से बचे लोग।

राजस्थान में हर साल बिजली गिरने से करीब 100 मौतें होती हैं, इस मामले में देश में 10वें नंबर पर
राजस्थान में 2016 से 2021 तक करीब 393 लोग वज्रपात की चपेट में आए। पिछले साल बिजली की चपेट में आने से कुल 42 लोगों की मौत हो गई। वहीं, देश में हर साल आने वाली प्राकृतिक आपदाओं में सबसे ज्यादा मौतें बिजली गिरने से ही होती हैं। देश में आकाशीय बिजली गिरने की सबसे ज्यादा घटनाएं बिहार, यूपी और मप्र में होती हैं। 2020 में इन तीन राज्यों में कुल 53% मौतें हुईं। इस मामले में हम 10वें स्थान पर रहे।

इसलिए आकाशीय बिजली धरती पर गिरती है

दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। यदि यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढि़या कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ।

आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी

  • आकाशीय बिजली का तापमान सूर्य के ऊपरी सतह से भी ज्यादा होता है। इसकी क्षमता तीन सौ किलोवॉट अर्थात 12.5 करोड़ वॉट से ज्यादा चार्ज की होती है। यह बिजली मिली सैकेंड से भी कम समय के लिए ठहरती है।
  • यह मनुष्य के सिर, गले और कंधों को सबसे ज्यादा प्रभावित करती है।
  • दोपहर के वक्त इसके गिरने की आशंका ज्यादा होती है।

आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ

  • आकाशीय बिजली के एक चीज पर दो बार नहीं गिरती।
  • रबर, टायर या फोम इससे बचाव कर सकते हैं।-अगर कोई नाव चला रहा हो तो बाहर आ जाना चाहिए।
  • लम्बी चीजें आकाशीय बिजली से बचाव करती हैं।

बचाव के उपाय

  • अगर आप बादलों के गरजने के समय घर के अंदर हैं तो घर के अंदर ही रहें।
  • बिजली पैदा करने वाली चीजों से दूरी बनाकर रखें, जैसे रेडिएटर, फोन, धातु के पाइप, स्टोव इत्यादि।
  • पेड़ के नीचे या खुले मैदान में जाने से बचें।
  • अगर आप खुले मैदान में हैं तो जल्दी से किसी बिल्डिंग में जाकर खड़े हो जाएं।
बिजली गिरने की घटनाओं में पिछले सालों में बढ़ोतरी हुई है।
बिजली गिरने की घटनाओं में पिछले सालों में बढ़ोतरी हुई है।

दुनिया में बढ़ रही हैं ऐसी घटनाएं

बिजली गिरने के मामले में अभी कुछ समय पहले ही दो नए रिकॉर्ड बने। पहला तो ब्राजील में दिखा जब आकाशीय बिजली ने 709 किलोमीटर की दूरी तय की, जो इतिहास में अब तक की सबसे ज्यादा है। जबकि अर्जेंटीना में बिजली की चमक 16.73 सेकंड तक दिखाई दी थी। यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है। यह जानकारी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) द्वारा साझा की गई है।

ब्राजील में सबसे ज्यादा बिजली गिरती है

  • ब्राजील में आकाशीय बिजली की यह घटना 31 अक्टूबर, 2018 को देश के दक्षिणी भाग में सामने आई थी। गौरतलब है कि ब्राजील में औसतन हर वर्ष बिजली गिरने की 7.78 करोड़ घटनाएं सामने आती हैं, जोकि दुनिया में सबसे ज्यादा हैं। डब्ल्यूएमओ के अनुसार बिजली गिरने की यह जो घटना 2018 में सामने आई थी, वो अमेरिका में बोस्टन से वाशिंगटन तक की दूरी के बराबर थी। इससे पहले एक आकाशीय बिजली की सबसे लम्बी दूरी तक चमक का पिछला रिकॉर्ड अमेरिकी राज्य ओक्लाहोमा का है। जहां 20 जून 2017 को रिकॉर्ड की गई बिजली की चमक 321 किलोमीटर लम्बी थी।
  • 4 मार्च, 2019 को अर्जेंटीना के उत्तरी भाग में बिजली की जो चमक देखी गई थी। उसकी चमक लगातार 16.73 सेकंड तक देखी गई थी। यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड है।
  • इससे पहले 30 अगस्त, 2012 को फ्रांस के एक 'प्रोवेंस एल्प्स-कोटे डी' अजुर में बिजली की एक चमक लगातार 7.74 सेकंड तक देखी गई थी।
  • बिजली की चमक की इन घटनाओं को जिन्होंने रिकॉर्ड बुक में अपनी जगह बनाई है वैज्ञानिक रूप से उन्हें 'मेगाफ्लैश' के नाम से जाना जाता है।
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