पंचायत चुनाव की काउंटिंग का काउंटडाउन शुरू:किसकी खुलेगी किस्मत और किसे जनता ने नकारा कल साफ हो जाएगी तस्वीर; 5826 उम्मीदवारों के लिए अहम दिन

जयपुरएक वर्ष पहले
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बाड़ेबंदी में मौजूद कांग्रेस के प्रत्याशी। - Dainik Bhaskar
बाड़ेबंदी में मौजूद कांग्रेस के प्रत्याशी।

राजस्थान के 6 जिलों की जिला परिषद में किस पार्टी का बोर्ड बनेगा और किस पंचायत समिति में किस पार्टी की जीत होगी इसका पता 4 सितम्बर को दोपहर 3 बजे तक पता चला जाएगा। तीन फेज में हुई पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों के लिए वोटिंग की काउंटिंग शनिवार को जयपुर समेत सभी जिला मुख्यालय पर होगी। सुबह 9 बजे से काउंटिंग शुरू होने के बाद संभावना है कि दोपहर 3 बजे तक पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी। इन चुनाव में जिला परिषद सदस्य और पंचायत समिति सदस्यों के लिए कुल मिलाकर 5826 उम्मीदवार मैदान में है।

जयपुर, जोधपुर, भरतपुर, दौसा, सिरोही और सवाई माधोपुर जिले में कुल 199 जिला परिषद की सीटों पर 653 उम्मीदवार चुनाव लड़े हैं। इसी तरह इन जिलों में स्थित 78 पंचायत समितियों की 1538 सीटों पर 5173 उम्मीदवार मैदान में डटे रहे। इन सभी उम्मीदवार में से किसके सिर पर जीत का सहरा बंधेगा यह तो कल ही पता चल पाएगा।

बंद रहेगा जेएलएन मार्ग पर ट्रैफिक
जयपुर में वोटों की काउंटिंग की बात करें तो यह जेएलएन मार्ग स्थित राजस्थान कॉलेज और कॉमर्स कॉलेज में होगी। सबसे पहले पंचायत समिति सदस्यों का रिजल्ट आएगा और उसके बाद जिला परिषद सदस्यों का। जयपुर में वोटों की काउंटिंग को देखते हुए पुलिस प्रशासन की तरफ से जेएलएन मार्ग पर कल ट्रैफिक में बदलाव किया जाएगा। ओटीएस चौराहे से गांधी सर्किल तक ट्रैफिक को बंद रखा जा सकता है।

तीन फेज में हुए चुनाव, 64.40 फीसदी हुई थी वोटिंग
ये चुनाव तीन फेज में करवाए गए थे। पहले फेज की वोटिंग 26 अगस्त को, दूसरे फेज की 29 अगस्त और तीसरे फेज की 1 सितम्बर को वोटिंग हुई। इन तीनों फेज में कुल मिलाकर 64.40 फीसदी वोटर ने वोट डाले। इससे पहले साल 2015 में जब इन 6 जिलों में चुनाव हुए थे, तब इन सभी जिलों में कुल मिलाकर 59.29 फीसदी वोटिंग हुई थी। इस तरह पिछली बार की तुलना में इस बार 5.11 फीसदी वोटिंग ज्यादा हुई है।

6 में से 4 जिलों में था भाजपा का कब्जा
साल 2015 में इन सभी जिलों में आखिरी बार जिला परिषद सदस्य के लिए चुनाव हुए थे। तब दौसा और सवाई माधोपुर को छोड़कर शेष 4 जिलों में भाजपा का बोर्ड बना था। उस समय भाजपा सत्ता में वापस आई थी। भरतपुर, जयपुर, जोधपुर और सिरोही में भाजपा ने स्पष्ट बहुमत हासिल करते हुए अपना जिला प्रमुख बनाया था, जबकि दौसा और सवाई माधोपुर में कांग्रेस का जिला प्रमुख बना था।

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