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जयपुर नगर निगम में खेला:वायरल ऑडियाे पर कंपनी की सफाई सवालों में; मामले में संघ से जुड़े बड़े नेता के दिखने और दो केन्द्रीय नेताओं के नाम आने के बाद हलचल बढ़ी

जयपुरएक महीने पहले
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नगर निगम जयपुर ग्रेटर की मेयर को हटाने के मामले में मचे सियासी बवाल राजस्थान की राजनीति में उथल-पुथल कर दी है। शुक्रवार को वायरल हुए वीडियो और ओडियाे के बाद राज्य की राजनीति के साथ-साथ इसके संबंध अब केन्द्र से भी जुड़ते नजर आ रहे है। क्योंकि जो ऑडियो वायरल हो रहे हैं उसमें दो केन्द्रीय मंत्री के नाम भी आ रहे है, वहीं वीडियो में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े एक बड़े कार्यकर्ता का फोटो आने के बाद बवाल मच गया है। इधर वीडियो-ऑडियो के बाजार में आने के बाद BVG कंपनी ने जो सफाई दी है उससे भी कई सवाल खड़े हाे रहे हैं।

कंपनी ने इन वीडियो-ऑडियो पर सफाई देते हुए कहा है कि वीडियो में जो चर्चा चर्चा चल रही थी वह केवल कॉरपोरेट सोशल रेस्पॉन्सेबिलिटी (CSR) के तहत प्रताप गौरव केन्द्र को दिए जाने वाले सहयोग के बारे में है और उसी दौरान हुई बातचीत को गलत संदर्भ में जोड़ा जा रहा है। सवाल ये उठता है कि तरह के मामले कंपनी की बोर्ड बैठक में तय होते है। कंपनी का बोर्ड ही तय करता है कि CSR फंड का पैसा कहां और कैसे खर्च किया जाए? यदि CSR फंड की बात थी भी तो राजाराम गुर्जर और लिम्बाराम किस हैसियत से बात कर रहे थे?

क्या वो दोनों निगम, कम्पनी या जिस संस्था के लिए फंड मांगा जाना बता रहे हैं उनमें कोई पदाधिकारी हैं? यदि कंपनी की बात को सही मान भी लिया जाए तो यह भुगतान के बदले ब्लैकमेलिंग हुई। कंपनी के खंडन में ही मुलाकात और बात होना साबित है। ऐसे में अब राजनीति गलियारों में ये कयास लगाए जा रहे है मामले में जब दो केन्द्रीय मंत्रियों और आरएसएस के एक बड़े पदाधिकारी का नाम सामने आ रहा है तो ऐसे में मामला को मैनेज करने के लिए ही कंपनी ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया है।

कंपनी की ओर से जारी स्पष्टीकरण का पत्र।
कंपनी की ओर से जारी स्पष्टीकरण का पत्र।

पूरा खेल बिलों के पेमेंट से जुड़ा, नगर निगम से पेन ड्राइव के जरिए वायरल किए ऑडियो-वीडियो
ये पूरा घटनाक्रम कंपनी के बिलों के पेमेंट से जुड़ा है। कंपनी अपने बकाया 276 करोड़ रुपए के भुगतान के लिए हर संभव प्रयास कर रही थी, लेकिन डील नहीं बैठी तो ये सब घटनाक्रम चला। सूत्रों के मुताबिक कंपनी ने ही उच्च स्तर पर वीडियो बनवाए और उसे बाजार में जारी करवाया, मामला जब बढ़ा और केन्द्रीय मंत्रियों का नाम सामने आया तब स्पष्टीकरण जारी कर दिया।

बताया ये जा रहा है कि कंपनी ने नगर निगम से ही पेन ड्राइव या अन्य संसाधन के जरिए इन ऑडियो और वीडियो को वायरल करवाया है। सौम्या गुर्जर के पति राजाराम ने देर रात सांगानेर थाने में जो प्राथमिकी दर्ज करवाई है, उसमें बीवीजी कंपनी के प्रतिनिधि संदीप चौधरी व अन्य के खिलाफ आरोप लगाए है। इसमें खुद उन्होंने कहा कि ये ऑडियो-वीडियो नगर निगम के उपायुक्त राजस्व के कमरे के बाहर किसी स्थान पर रखकर मीडिया में उपलब्ध करवाए गए है।

आज कोर्ट में होनी है सुनवाई, सौम्या पर इस्तीफे का दबाव
मेयर के निलंबन के मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इस सुनवाई से एक दिन पहले इस तरह से ऑडियो-वीडियो वायरल होने के मामले से हड़कंप मच गया है। क्योंकि सौम्या गुर्जर ने मेयर रहते हुए नगर निगम आयुक्त यज्ञमित्र सिंह के खिलाफ कंपनी से मिले होने और भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए थे। अब वहीं सौम्या गुर्जर इस वीडियो-ऑडियो के आने के बाद फंसती नजर आ रही हैं, क्योंकि इस ऑडियो-वीडियो में उनके ही पति राजाराम गुर्जर कंपनी से भुगतान की एवज में 10% कमीशन के एवज में भुगतान पर डील करते नजर आ रहे है।

इस ऑडियाे-वीडियो के वायरल होने के बाद अब सौम्या गुर्जर पर इस्तीफे का दबाव बढ़ गया है। सूत्रों की माने तो भाजपा संगठन और जयपुर के कुछ विधायक इस मामले में सौम्या के इस्तीफे की मांग रहे हैं। ऐसे में कयास ये लगाए जा रहे है कि सौम्या अपना इस्तीफा भी दे सकती है।

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