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राजस्थान में घायलों को मुफ्त इलाज:सरकारी अस्पतालों में न आईडी दिखानी होगी और न ही किसी से कोई पैसा लिया जाएगा; प्राइवेट हॉस्पिटल फिलहाल इस नियम के दायरे से बाहर

जयपुर2 महीने पहले
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प्रतीकात्मक फोटो। - Dainik Bhaskar
प्रतीकात्मक फोटो।

एक्सीडेंट में घायल होने वाले लोगों का अब राजस्थान के सभी सरकारी हॉस्पिटल में मुफ्त इलाज होगा। घायल व्यक्ति के परिजन या उसे वहां तक लाने वाले व्यक्ति से किसी प्रकार का कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा। सरकार की इस सुविधा के दायरे में राज्य के साथ-साथ दूसरे राज्य के व्यक्ति भी आएंगे। यह सुविधा राज्य के सभी सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट हॉस्पिटल में भी शुरू करनी थी। फिलहाल इसे केवल सरकारी हॉस्पिटल में ही शुरू किया गया है।

खर्च के कारण नहीं मिलती मदद

अक्सर राज्य के बाहर से आए व्यक्ति के एक्सीडेंट के मामले में घायल की पहचान नहीं होने और पुलिस की कार्रवाई नहीं होने तक हॉस्पिटल स्टाफ इलाज करने में आनाकानी करते हैं। इसके अलावा, कई बार लोग इसलिए भी घायलों की मदद को आगे नहीं आते, कि हॉस्पिटल वाले पहले ही पैसे मांगते हैं। समय से इलाज नहीं मिलने पर जान चली जाती है। इन सबको देखते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस साल बजट भाषण में घोषणा की थी। घोषणा के मुताबिक राज्य में सड़क दुर्घटना में घायल तमाम व्यक्तियों का बिना किसी पहचान और पात्रता पूछे चाहे वह किसी भी राज्य का हो उसका इलाज राज्य के प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटल में मुफ्त किया जाएगा।

प्राइवेट हॉस्पिटल का प्रस्ताव फाइनेंस में जाएगा

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सूत्रों के मुताबिक, प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों को कितना पैसा देना है और कैसे देना है, इसको लेकर नीति तैयार की जा रही है। इसके लिए अलग से बजट का प्रावधान किया जाएगा। इसलिए इस प्रस्ताव को बनाकर मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेजा जाएगा। वहां से मंजूरी आने के बाद ही प्राइवेट हॉस्पिटल में ये सुविधा शुरू की जाएगी।

चिरंजीवी योजना में होंगे कवर

सूत्रों की मानें तो राज्य के जो निवासी हैं, उनको चिरंजीवी योजना के तहत प्राइवेट हॉस्पिटल में इंश्योरेंस के दायरे में लाकर इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। हालांकि राज्य के बाहर वाले व्यक्तियों के लिए क्या प्रावधान करने हैं, इसको लेकर अभी विचार किया जा रहा है। संभावना है कि इन लोगों के लिए भी इंश्योरेंस की ही कोई नई पॉलिसी अपनाई जाएगी। ताकि बाहर से आने वाले व्यक्तियों को निजी अस्पतालों में इलाज मिल सके।

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