राजस्थान में फिर बढ़ा बिजली संकट:अघोषित कटौती शुरू; 5 पावर प्लांट बंद, 7 दिन का ही कोयला बचा

जयपुरएक महीने पहले

मानसून सीजन में राजस्थान में एक बार फिर बिजली का संकट खड़ा हो सकता है। छत्तीसगढ़ से कोयले की सप्लाई बाधित होने लग गई है। पावर प्लांट्स के पास केवल 7 दिन का ही कोयला स्टॉक बचा है। कोयले की कमी के कारण 5 पावर प्लांट की 5 यूनिट बंद पड़ी है। जिसके कारण कस्बों-ग्रामीण इलाकों में 2-3 घंटे की अघोषित बिजली कटौती शुरू कर दी गई है।

दरअसल, जहां पहले 27 रैक कोयला की रोजाना सप्लाई हो रही थी, अब 18 रैक ही मिल पा रही है। कोयले की कमी के कारण सूरतगढ़ की 250-250 मेगावट की दो यूनिट, सूरतगढ़ की सुपर क्रिटिकल 660 मेगावट की यूनिट, छबड़ा की 250 मेगावाट यूनिट और कोटा थर्मल की 210 मेगावट की एक यूनिट में प्रोडक्शन बंद पड़ा है।

कोयला संकट जारी रहा तो 4340 मेगावाट के प्लांट और ठप हो जाएंगे। इसका मतलब है राजस्थान में केवल इतनी ही बिजली पैदा हो सकेगी जिसकी सप्लाई एक या दो शहरों में ही हो सके। ऐसे में फिर दिन में 5 से 10 घंटे की कटौती करनी पड़ सकती है। इससे कुछ ही दिनों में राजस्थान में ‘ब्लैक आउट’ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।

अघोषित बिजली कटौती शुरू
राजस्थान में अन प्लांड शटडाउन, मेंटीनेस, फाल्ट और रोस्टर के आधार पर फीडर से फिर बिजली कटौती की जा रही है। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में 2-3 घंटे बिजली गुल हो रही है। शहरी इलाकों में भी अलग-अलग क्षेत्रवार बिजली गुल हो रही है।

कोयले की कमी से बढ़ने लगी परेशानी
राजस्थान में गाइडलाइंस के मुताबिक 26 दिन का कोयला स्टॉक रखना होता है। औसत 7 दिन का ही कोयला आधे से ज्यादा प्लांट में बचा है। बाकी प्लांट में भी 10-12 दिन से ज्यादा कोयला स्टॉक नहीं है। जिस कारण फुल कैपिसिटी में सभी प्लांट नहीं चल पा रहे हैं। कई बंद पड़ी यूनिट्स को इसीलिए जल्द शुरू भी नहीं किया जा रहा है।

राजस्थान में फिलहाल छत्तीसगढ़ की कोयला माइंस से 11 रैक की बजाय 7-8 रैक ही मिल पा रही हैं। बाकी कोयला सप्लाई कोल इंडिया और उसकी सब्सिडरी कंपनियों से मिल रही है। राजस्थान को कुल 17-18 रैक ही औसत मिल रहे हैं। जबकि जरूरत 27 रैक की है। एक रैक में 4000 टन कोयला होता है।

सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट। कोयले की कमी के कारण सूरतगढ़ की 250-250 मेगावट की दो यूनिट, सूरतगढ़ की सुपर क्रिटिकल 660 मेगावट की यूनिट, छबड़ा की 250 मेगावाट यूनिट और कोटा थर्मल की 210 मेगावट की एक यूनिट में प्रोडक्शन बंद पड़ा है।
सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट। कोयले की कमी के कारण सूरतगढ़ की 250-250 मेगावट की दो यूनिट, सूरतगढ़ की सुपर क्रिटिकल 660 मेगावट की यूनिट, छबड़ा की 250 मेगावाट यूनिट और कोटा थर्मल की 210 मेगावट की एक यूनिट में प्रोडक्शन बंद पड़ा है।

राजस्थान में कोल बेस्ड पावर प्लांट यूनिट्स की कुल कैपेसिटी 7580 मेगावाट है। इनमें से 3240 मेगावाट के प्लांट कोल इंडिया से कोयला सप्लाई लेते हैं। जबकि 4340 मेगावाट प्लांट राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को छत्तीसगढ़ में अलॉट कोयला माइंस से कोयले की सप्लाई ट्रेनों की रैक से मिलती है। छत्तीसगढ़ सरकार ने RVUNL के 3 माइंस प्रोजेक्ट- परसा कोल ब्लॉक, परसा ईस्ट, कांते बासन और कांते एक्सटेंशन में जून महीने से रोक लगा दी है।

जबकि पहले से चल रही माइंस को मंजूरी है। अब मानसून में बारिश के कारण कोयला निकालने और सप्लाई का काम धीरे हो गया है। मौजूदा माइंस में कोयला भी बहुत कम बचा है। प्रस्तावित तीनों माइंस प्रोजेक्ट को केन्द्र सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार से बड़ी मुश्किलों से राजस्थान सरकार ने मंजूरी दिलाई थी।

कोल माइंस एरिया। छत्तीसगढ़ के सरगुजा के हसदेव फॉरेस्ट (वन) में माइंस से कोयला निकालने के लिए पेड़ों की कटाई की जा रही है। पेड़ काटने का स्थानीय आदिवासी और NGO विरोध कर रहे हैं।
कोल माइंस एरिया। छत्तीसगढ़ के सरगुजा के हसदेव फॉरेस्ट (वन) में माइंस से कोयला निकालने के लिए पेड़ों की कटाई की जा रही है। पेड़ काटने का स्थानीय आदिवासी और NGO विरोध कर रहे हैं।

इसलिए लगी रोक
छत्तीसगढ़ के सरगुजा के हसदेव फॉरेस्ट (वन) में माइंस से कोयला निकालने के लिए पेड़ों की कटाई की जा रही है। पेड़ काटने से स्थानीय आदिवासी और NGO आक्रोशित हुए हैं। परसा और कांते बासन एक्सटेंशन कोल ब्लॉक घना जंगल होने के साथ गेज और चरनोई नदी का जलग्रहण क्षेत्र भी है। स्थानीय विरोध के बीच राजनीति भी हो रही है।

छत्तीसगढ़ CM भूपेश बघेल भी कह चुके हैं कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहमति के बिना एक भी पेड़ की शाखा नहीं काटी जाएगी। वहीं, अधिकारियों की मानें तो कुछ NGO गांव में भ्रम की स्थिति पैदा कर सुनियोजित तरीके से विरोध कर रहे हैं। जिसकी वजह से काम अटका हुआ है।

परसा कोल माइंस प्रोजेक्ट का विरोध करते स्थानीय लोग,NGO और आदिवासी।
परसा कोल माइंस प्रोजेक्ट का विरोध करते स्थानीय लोग,NGO और आदिवासी।

अब भागदौड़ कर रही राजस्थान सरकार
राजस्थान डिस्कॉम के प्रमुख सचिव भास्कर ए सावंत और उत्पादन निगम के CMD राजेश कुमार शर्मा सहित सीनियर अफसरों ने छत्तीसगढ़ सरकार और प्रशासन तक भागदौड़ शुरू कर दी है। वहां अफसरों से मुलाकात कर माइंस एरिया में जल्द काम शुरू करवाने और लॉ एंड ऑर्डर मेंटेन रखने की अपील की है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी और मुख्य सचिव उषा शर्मा छत्तीसगढ़ सरकार से लगातार बातचीत कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ CM भूपेश बघेल और राजस्थान CM अशोक गहलोत की पिछली मुलाकात।
छत्तीसगढ़ CM भूपेश बघेल और राजस्थान CM अशोक गहलोत की पिछली मुलाकात।

26 दिन का स्टॉक होना जरूरी
नियमानुसार पावर प्लांट्स चलाने के लिए 26 दिन का कोल स्टॉक होना जरूरी है। लेकिन मौजूदा स्थिति में ऐसी है कि आधे से ज्यादा प्लांट्स में कोयला 7 दिन का ही शेष बचा है। अधिकारियों की मानें तो मानसून में खानों के अंदर बारिश का पानी भर जाता है, ऐसे में खनन करना मुश्किल हो जाता है। इस स्थिति से निपटने के लिए अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं।