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चट्टानों पर उभरी गणेश की अनूठी प्रतिमा:पहाड़ियों के बीच दुर्गम रास्तों से पहुंचते हैं लोग, 45 फीट ऊंचाई पर है प्रतिमा, पांच खंडों में है कान, शीश्, ललाट और सूंड

झालावाड़11 दिन पहले

कालीसिंध नदी के किनारे झालावाड़ से करीब दस किमी दूर मुकंदरा पर्वत की एक ऊंची चट्‌टान पर प्राकृतिक गणेश प्रतिमा सदियों से बनी है। बलिंडा घाट की एक चट्टान पर उभरी करीब 30 फीट ऊंची प्रतिमा के दर्शन के लिए दाे पहाड़ियां के बीच बने दुर्गम रास्ते को पार करना पड़ता है। यहां रास्ता बिल्कुल भी आसान नहीं है। जानकार लाेग ही यहां तक पहुंच पाते हैं। दैनिक भास्कर की टीम दाे दुर्गम पहाड़ियों काे पैदल पार कर कालीसिंध नदी किनारे बलिंडा घाट स्थित आस्था के इस केन्द्र तक पहुंची।

बलिंडा घाट के गणेश की 5 खंडों में बनी प्रतिमा। कान, शीष, ललाट और दो उभारों में सूंड।
बलिंडा घाट के गणेश की 5 खंडों में बनी प्रतिमा। कान, शीष, ललाट और दो उभारों में सूंड।

45 फीट ऊंचे पहाड़ पर गणेश भगवान की करीब 30 फीट ऊंची प्रतिमा बनी हुई है। प्राकृतिक तरीके से बनी इस प्रतिमा को आस-पास के लोग प्रकट गणेश के रूप में मानते हैं। प्राचीन समय से ही इस जगह की आस्था है। लोग इसे बलिंडा घाट के गणेश जी के नाम से पहचानते हैं। उनका कहना है कि इस मूर्ति का निर्माण नहीं किया गया, यह स्वयं प्रकट हुई है। खास बात यह है कि मालवा और हाड़ौती के लाेग शादी का पहला न्योता विनायक काे देने यहीं आते हैं। पांच खंडों में बनी हुई इस प्रतिमा के कान, शीष, ललाट और सूंड है।

मुकंदरा की पहाड़ियों से गुजरती काली सिंध नदी।
मुकंदरा की पहाड़ियों से गुजरती काली सिंध नदी।

आस्था के आगे दुर्गम रास्ता भी हार मानता है यहां
जलदुर्ग गागरोन के ठीक पीछे मुकंदरा पर्वतमाला की दो श्रृंखलाओं के बीच में कालीसिंध नदी है। बलिंडा घाट यहां से करीब 2 किमी की दूरी पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। चट्टानों पर उतार चढ़ाव के साथ ही कच्चे रास्तों से यहां पहुंचना पड़ता है, लेकिन लोगों की आस्था के आगे यह दुर्गम रास्ता भी हार मान जाता है। हर साल यहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

लोग अपने शुभ कार्यों की शुरूआत से पहले भी यहां पूजा अर्चना करने जाते हैं। चट्टानों पर प्राकृतिक रूप से ही गणेश की प्रतिमा भगवान का स्वरूप ही मानते हैं। सालों से लोग यहां आ रहे हैं, लेकिन कभी कोई दुर्घटना भी नहीं हुई है। मुकंदरा की पहाड़ियों और नदी के पास होने के कारण यहां प्राकृतिक सुंदरता भी दिखाई देती है।

गागरोन फोर्ट से बलिंडा घाट तक पहुंचने का रास्ता (Google Map)
गागरोन फोर्ट से बलिंडा घाट तक पहुंचने का रास्ता (Google Map)

यहां तक कैसे पहुंचें
बलिंडा घाट के गणेश जी झालावाड़ जिला मुख्यालय से करीब 5 किमी दूर जलदुर्ग के नाम से विख्यात गागरोन किले से आगे स्थित है। किले से 2 किलोमीटर बाद नौलाव गांव पड़ता है। यहां तक किसी भी व्हीकल से पहुंचा जा सकता है। इसके आगे का करीब 2 किमी रास्ता पैदल ही तय करना पड़ता है। कालीसिंध नदी के एक घुमाव पर यहां मुकंदरा पिकनिक स्पॉट पड़ता है, उस रास्ते से भी बलिंडा घाट तक पहुंचा जा सकता है। यह क्षेत्र विधानसभा के हिसाब से तो खानपुर में आता है, लेकिन जिला मुख्यालय से नजदीक पड़ता है।

(इनपुट- मनीष शर्मा)

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