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RAS परीक्षा में सक्सेस के 10 मंत्र:टॉपर्स बोले- झोपड़ी हो या महल, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, फर्क इससे पड़ता है कि सफल व्यक्ति क्या पढ़ता है और असफल होने वाला क्या

अलवर13 दिन पहलेलेखक: धर्मेंद्र यादव
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RAS बनने के लिए जुनून की जरूरत होती है। अगर आप में सफलता पाने का जुनून है तो न शादी राेड़ा बनती है, न बच्चे। RAS एग्जाम 2018 की टॉपर झुंझनू की मुक्ता राव की शादी को 14 साल हो चुके हैं। एक बच्चा भी है। यही नहीं नाैकरी करते हुए RAS के एग्जाम में अच्छी रैंक पर आने वालों की भरमार है। टॉप 50 में करीब 10 से अधिक सफल अभ्यर्थियों की शादी हो चुकी है। इनमें महिला अभ्यथिर्यों की संख्या अधिक है। जिन्होंने शादी के बाद में RAS के परिणाम में सफलता पाई है। इन सफल अभ्यर्थियों से बात कर भास्कर ने उनकी सफलता के वे मंत्र जाने-

टॉपर्स के सक्सेस मंत्र

  • अब बदलते वक्त में स्मार्ट स्ट्रैटेजी जरूरी है। स्मार्ट स्ट्रैटेजी के बिना चूक हो सकती है। यह स्मार्ट स्टडी से जुड़ी बात है। कोचिंग का अपना महत्व है।
  • रेग्युलर पढ़ाई और रिवीजन बहुत जरूरी है। बिना रिवीजन के RAS जैसे एग्जाम में टॉप करना मुश्किल है।
  • खुद की क्षमता का आकलन करके उसी के अनुसार पढ़ाई का तरीका अपना चाहिए। उतना अधिक समय भी देने की जरूरत है। कुछ अभ्यर्थी रोजाना 3 से 4 घंटे पढ़ते हैं। कुछ आठ से दस।
  • घर हो या ऑफिस। माहौल सकारात्मक बनाए रखने का बड़ा महत्व है। इसमें समय की बचत होती है। थोड़ा भी खराब माहौल मिलने पर मुश्किल हो जाती है।
  • पहले प्रयास में सफल होने की सोच रखना सही है, लेकिन टॉपिक के कांसेप्ट को ईमानदारी से समझने की जरूरत है। आधी-अधूरी समझ में परिणाम नहीं आ पाता।
  • कोचिंग सबके लिए जरूरी नहीं है। मौजूदा पैटर्न व कॉम्पिटिशन को कोचिंग के जरिए समझा जा सकता है। इसके बाद खुद की स्ट्रैटजी ही सफलता दिलाती है।
  • झोपडी हो या महल। उससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क पड़ता है तो इस बात से कि एक टॉपर क्या पढ़ता है और एक असफल होने वाला क्या।
  • अपनी क्षमता को समय के साथ नहीं बढ़ाया तो कॉम्पिटिशन में आगे आना कठिन है। समय बीतने के साथ कॉम्पिटिशन भी आगे बढ़ जाती है।
  • एकाग्रता बहुत जरूरी है। ध्यान नहीं भटकना चाहिए। एकाग्रता के लिए योग आदि भी कर सकते हैं।
  • खाने-पीने का ध्यान रखें। पढ़ाई के चक्कर में खाना छोड़ने वालों में कमजोरी आ जाती है।
RAS टॉपर मुक्ता राव पति विजयपाल के साथ।
RAS टॉपर मुक्ता राव पति विजयपाल के साथ।

बेटा पूछता था- मम्मी, आज कितनी देर पढ़ाई की?
परीक्षा में प्रदेश में टॉपर रही मुक्ता राव कहती हैं कि शादी के बाद चुनौतियां बढ़ जाती हैं। लेकिन प्रेरित करने वालों की संख्या भी ज्यादा होती है। परिवार में माहौल अच्छा मिलता है तो मुकाम मिलने के अवसर बढ़ जाते हैं। वे कहती हैं कि जब बेटा यह पूछता था कि मम्मी आज कितनी देर पढ़ाई की? यह सुनने के बाद नई ऊर्जा का संचार होता था। कंपनी में जाॅब के दौरान परिवार के लोगों ने RAS की तैयारी करने को कहा। इतना बड़ा विश्वास जताया तो अच्छा करने का संकल्प मन में लिया। उसी का परिणाम है कि बच्चे के स्कूल जाने के बाद भी जितना समय मिलता उसे पढ़ाई में लगाती थी।

देवेंद्र कुमार चौहान। ब्लाइंड हैं। इस कैटेगिरी में उन्हें छठी रैंक मिली है।
देवेंद्र कुमार चौहान। ब्लाइंड हैं। इस कैटेगिरी में उन्हें छठी रैंक मिली है।

आंखों का अंधेरा भी नहीं रोक पाया सफलता की रोशनी
देवेंद्र चौहान की ब्लाइंड कैटेगिरी में राजस्थान में छठी रैंक है। वे भी शादीशुदा हैं। अलवर के इनकम टैक्स कार्यालय में कार्यरत संजय यादव की भी शादी हो चुकी है। RAS में 258वीं रैंक हासिल की है। इस तरह अकेले अलवर जिले में 10 से अधिक अभ्यर्थी ऐसे हैं। जिनका शादी के बाद में RAS में चयन हुआ है। काफी अभ्यर्थियों के 8 से 10 साल के बच्चे हैं। कुछ की शादी RAS एग्जाम 2018 के बाद भी हुई है। नागौर के देवीलाल ने RAS में 30वीं रैंक हासिल की है। वे भी शादीशुदा हैं, लेकिन RAS की परीक्षा में यह रोड़ा नहीं बनी।

सरिता यादव की 6 साल की बेटी है।
सरिता यादव की 6 साल की बेटी है।

बेटी भी और नौकरी भी
सरिता यादव की छह साल की बेटी है। बेटी के दादा-दादी का इतना साथ मिला कि पढ़ाई करने का समय निकलता गया। नौकरी भी करते रहे। शनिवार व रविवार को अवकाश के दिन पूरा समय पढ़ाई में दिया। पति ने प्रेरित किया। जब परिवार के लोग आगे बढ़ने की कहने लग जाएं, तब लगता है कि सबके विश्वास का सवाल है। कुछ कर दिखाना होगा। यही मैंने किया। अब परिणाम आने के बाद की खुशियां चारों तरफ हैं।

यतींद्र पोरवाल फेल होने के बाद आगे बढ़े
42वीं रैंक हासिल करने वाले चित्तौड़गढ़ के यतींद्र पोरवाल कहते हैं कि हार के बाद हार मिले तो भी निराश नहीं होना चाहिए। इससे उबरने के लिए फिर खुद को खड़ा कर लें। मेरे साथ यही हुआ। पहले आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में नाकाम हो गया। फिर UPSC में दो बार असफल रहा। परिणाम के बाद फिर नए सिरे से खड़ा होकर जुट गया।

9वीं रैंक वाले विकास प्रजापत इंस्पेक्टर
नवीं रैंक वाले विकास प्रजापत उद्योग भवन में निरीक्षक हैं। उन्होंने नौकरी के साथ पढ़ाई कर यह मुकाम पाया है। वे कहते हैं कि मौजूदा दौर में स्मार्ट स्ट्रेटजी जरूरी है। यह सब महत्व रखता है कि आप समय किस चीज में खपा रहे हैं। हर समय कीमती होता है। हर एक विषय से नई चीज सीखने को मिलती है। धीरे-धीरे समझ बढ़ती जाती है, जो इंटरव्यू में भी काम आती है।

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