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क्या पायलट फिर सियासी जहाज उड़ा पाएंगे:पायलट की बात सुनने के लिए बनने वाली तीन सदस्यीय समिति का अब तक पता नहीं, केंद्रीय राजनीति में वापस लौट सकते हैं सचिन

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: आदि देव भारद्वाज
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सचिन पायलट। प्रदेश अध्यक्ष और डिप्टी सीएम की कुर्सी गई, अब आगे क्या?
  • पायलट के पार्टी में भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति, दोबारा ओहदा पाने को लेकर अभी संशय

राजस्थान में पायलट कैंप के हथियार डाल देने से सरकार से फौरी तौर पर संकट टल गया है। लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि अब पायलट की पार्टी में क्या भूमिका रहेगी? अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते राहुल गांधी सचिन पायलट को कैसे स्थापित करेंगे। डिप्टी सीएम और प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाए जाने के बाद अब ले दे कर पायलट साधारण विधायक हैं। साथ ही उनकी पूरी ब्रिगेड को जिन्हें पायलट ने नियुक्त किया था उन्हें भी हटाया जा चुका है।

पायलट ने जिला स्तर पर जो कांग्रेस कमेटियां बनाई थी, उन्हें भी भंग किया जा चुका है। वहीं गहलोत के समर्थक बार बार कह रहे हैं कि अब पायलट और उनके समर्थकों को सरकार और संगठन में कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। समर्थकों की यह मांग इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि सीएम गहलोत ने कहा है कि वे अपने समर्थक विधायकों के अभिभावक बन कर रहेंगे।

तीन सदस्यीय कमेटी का अभी तक कोई अता-पता नहीं

आलाकमान ने पायलट खेमे की बात सुनकर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन करने का दिलासा दे दिया लेकिन अभी तक तीन सदस्यीय समिति का ही कुछ अता-पता नहीं है। वहीं पायलट के समर्थकर विधायक मीडिया में अशोक गहलोत को अपना नेता बताने के साथ उनको पद से हटाए जाने की अपनी बात से मुकर रहे हैं। इससे संकेत साफ मिलते हैं कि पायलट की स्थिति पार्टी में कमजोर है। सीएम अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच अविश्वास का माहौल बना हुआ है।

सीएम अभी भी हमलावर, पायलट डिंफेंसिव खेल रहे

मुख्यमंत्री ने माफ करो आगे बढ़ो की बात कह दी हो लेकिन उनका हमलावर रुख अभी बरकरार है। वे लगातार एक ही बयान दे रहे हैं कि यह सब भाजपा का किया धरा था। यानी वे पायलट की स्थिति मजबूत नहीं होने देना चाहते। वहीं पायलट और उनके विधायक इससे इनकार कर रहे हैं। इससे लगता नहीं कि गहलोत पायलट को पार्टी में कोई ओहदा देने के पक्षधर हैं। उल्टा वे पायलट को कमजोर ही करना चाहेंगे।

गहलोत के तेवर तीखे तो क्या पायलट दिल्ली लौटेंगे

इसमें एक संभावना यह भी देखी जा रही है कि क्या पायलट दिल्ली लौटेंगे। दिल्ली बुलाकर उन्हें पार्टी में कोई पद दिया जा सकता है। इससे वे राजस्थान की राजनीति से अलग हो जाएंगे। इसकी चर्चा काफी लंबे समय से चल रही है। पायलट भी यह कह चुके हैं कि पार्टी जो भी काम देगी वे करेंगे। पायलट ने राहुल से मुलाकात के बाद कहा भी था कि पार्टी ने उन्हें दिल्ली में रखा तो वे यहीं रहे। पार्टी ने उन्हों राजस्थान में जिम्मेदारी सौंपी तो जयपुर मे रहे। ऐसे में माना जा रहा है कि अभी मामला शांत करने को पायलट को पार्टी दिल्ली वापस बुला सकती है।

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