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बांसुरी की धुन सुनकर पशु भी हो जाते मोहित.. VIDEO:टीवी पर बांसुरी सुनी तो अच्छी लगी, इसके बाद बजाना सीखा, अब जब भी मन करता है बजाता हूं, पढ़ाई की बोरियत भी दूर हो जाती है

तखतगढ़ (पाली)20 दिन पहले
तखतगढ़ में मवेशियों के बीच बैठ बासुंरी बजाता प्रदीप।

12वीं में साइंस ले रखी हैं। पढ़ाई खूब करनी पड़ती हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि पढ़ाई करते-करते बोर हो जाता हूं। एक दिन टीवी पर बांसुरी सुनी तो काफी अच्छी लगी। इसलिए प्लास्टिक की बांसुरी बनाकर बांसुरी वादन सीखा। अब जब भी पढ़ाई से बोर हो जाता हूं, तो कुछ समय के लिए घर की छत, तो कभी खेत में तो कभी गांव के चौपाल में गायों के बीच बैठकर बांसुरी बजाता हूं। इससे काफी सुकुन मिलता हैं। ऐसा लगता हैं जैसे में रिफ्रेस हो गया हूं। यह कहना है कि जिले के तखतगढ़ निवासी 16 साल के प्रदीप चांदौरा का, जो आज बांसुरी पर कई गानों की धुनें बजा लेते हैं।

बहन काजल के साथ हारमोनियम पर गायन का अभ्यास करते प्रदीप।
बहन काजल के साथ हारमोनियम पर गायन का अभ्यास करते प्रदीप।

तखतगढ़ के टास्कावावास में रहने वाले जोगाराम कुमावत के बेटे प्रदीप चांदौरा अपनी बड़ी बहन काजल को अपना आदर्श मानते हैं। वर्तमान में वे 12वीं में साइंस की पढ़ाई कर रहे हैं। प्रदीप ने बताया कि पड़ोसी रतनलाल से उन्होंने हारमोनियम बजाना सीखा और बहन के साथ मिलकर अभ्यास करते हैं।

दो साल लग गए बांसुरी सीखने में

प्रदीप ने बताया कि टीवी पर बांसुरी वादन देखा तो मन को काफी सुकून मिला। फिर किया था प्लास्टिक के पाइप की बांसुरी बनाई। और सिखना शुरू कर दिया। करीब दो वर्ष लग गए। बांसुरी सीखने में। पढ़ाई से समय मिलने पर कभी घर की छत पर तो कभी खेत में तो कभी मवेशियों के बीच बांसुरी बजाने लगा। धीरे-धीरे काफी कुछ सीख लिया। मवेशियों के बीच बांसुरी बजाता तो ऐसा लगता मानो वह भी उनकी बांसुरी सुन रहे हैं।

कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दी प्रस्तुति
प्रदीप ने बताया कि उनकी बड़ी बहन काजल उनकी आदर्श हैं। वे दोनों साथ मिलकर गाने का अभ्यास करते हैं। कई सामाजिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम में दोनों भाई बहन प्रस्तुति दे चुके हैं। जिसे लोगों ने काफी सराहा।

(रिपोर्ट - मांगीलाल मांगलिया, तखतगढ़)

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