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इनका आएएस में चयन, बोले सफलता का कोई शार्टकट नहीं:किसी ने सोशल मीडिया से बनाई दूरी तो कोई घर छोड़ राजधानी की तैयारी, तो किसी ने परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए जारी रखी तैयारी, नतीजा आरएएस में चयन

सुमेरपुर (पाली)11 दिन पहले
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भारूंदा  गांव पहुंचने पर दोनों भाई-बहन का परिवार ने कुछ यूं स्वागत किया। - Dainik Bhaskar
भारूंदा गांव पहुंचने पर दोनों भाई-बहन का परिवार ने कुछ यूं स्वागत किया।

राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन 2018 का अजमेर की ओर से मंगलवार को परिणाम घोषित किया गया। जिसमें पाली जिले के सुमेरपुर उपखंड क्षेत्र के भारूंदा गांव के दो सगे भाई-बहन सहित बिसलपुर के मेलनर्स व सारंगवास के युवक का चयन हुआ। किसी ने घर में रहकर पढ़ाई की तो किसी ने जयपुर जाकर कोचिंग की। तो किसी ने सरकारी नौकरी करते हुए भी रात के अंधेरे में पढ़ाई जारी रखी। नतीनन आरएएस की परीक्षा में सफल हुए। सभी का कहना हैं कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। नियमित रूप से लगन के साथ लक्ष्य निर्धारित कर मेहनत करनी होती हैं। तब जाकर सफलता कदम चूमती हैं। सभी ने अपनी सफलता का श्रेय परिजनों को दिया।

पांच साल तक भाई-बहन घर से दूर जयपुर में रहकर कोचिंग की, पढ़ाई को ज्यादा समय दे सके इसलिए खाने का भी टिफिन मंगवाते, आखिर दोनों भाई-बहन का हुआ चयन

सुमेरपुर के निकट आबाद छोटे से गांव भारूंदा की करिश्मासिंह राणावत व उनके भाई कर्मवीरिसंह राणावत परिवार से दूर रहते हुए पिछले पांच साल से जयपुर में किराए के कमरे में रहकर आरएएस बनने की तैयारी कर रहे थे। दोनों भाई बहन नियमित रूप से सात-आठ घंटे पढ़ाई करते। पढ़ाई को ज्यादा से ज्यादा समय दे सके इसलिए भोजन का भी टिफिन मंगवाते। अति आवश्यक कार्य होने पर ही गांव आए। दोनों भाई-बहन एक-दूसरे का रिविजन करवाने में सहयोग करते थे। आखिर वह दिन भी आया जब दोनों भाई-बहन का एक साथ आरएएस में चयन हुआ और परिवार को दोहरी खुशी मिली। गांव पहुंचने पर उनका ढोल-नगाड़ों के साथ स्वागत किया गया तथा फूलों की मालाओं से लाद दिया गया। शारीरिक शिक्षक पिता महेन्द्रसिंह राणावत का कहना हैं कि मेरे लिए तो अभी तक के जीवन का यह सबसे अनमोल पल हैं जब मेरे दोनों बेटे-बेटी का चयन आरएएस में हो गया। उन्होंने बताया कि बेटी करिश्मासिंह राणावत ने 189 रेंक व बेटे कर्मवीरसिंह राणावत ने 292 रेंक प्राप्त की।

विश्वजीत के आरएएस में चयन होने मुंह मीठा करवा बधाई देते परिजन।
विश्वजीत के आरएएस में चयन होने मुंह मीठा करवा बधाई देते परिजन।

विश्वजीत सोशल मीडिया से दूर रहे, बिना कोचिंग घर पर नियमित सात-आठ घंटे पढ़ाई की, परिजनों के मार्गदर्शन में मिली सफलता

महाराजा उम्मेदसिंह कृषि उपज मंडी सुमेरपुर के सचिव पूरणसिंह जैतावत के पुत्र विश्वजीत सिंह जैतावत ने आरएएस में 281वीं रैंक प्राप्त की। सोजत रोड तहसील के सारंगवास गांव के मूलनिवासी जेतावत ने सैकेण्डरी की शिक्षा जोधपुर से प्राप्त की। उसके बाद 12वीं कोटा से की। मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी जयपुर से बीटेक की। विश्वजीत ने बताया कि घर पर ही पिछले पांच साल से आरएएस बनने की तैयारी में नियमित रूप से 7-8 घंटे तक पढ़ाई करते थे। सोशल मीडिया से बिलकुल ही दूर रहे। सामाजिक कार्यकमों में भी अतिआवश्यक होने पर गए। तब जाकर परिजनों के आशीर्वाद से पहले ही प्रयास में सफलता हाथ लगी। विश्वजीत के आरएएस में चयन होने पर गांव में खुशी का माहौल हैं। परिजनों व ग्रामीणों ने मुंह मीठा करवा उन्हें बधाई दी। विश्वजीत के बड़े भाई महिपालसिंह जैतावत सुमेरपुर राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक मैनेजर हैं। काका नरपतसिंह जैतावत एएसपी बाड़मेर हैं। पूरे परिवार में शुरू से ही उच्च शिक्षा का माहौल रहा। जिससे विश्वजीत भी प्रभावित रहे और उन्होंने भी शुरू से ही बड़ा अधिकारी बनने का लक्ष्य निर्धारित किया और आखिरकार सफलता हासिल कर परिजनों का नाम रोशन किया।

बिसलपुर निवासी ललित मेवाड़ा जिनका आरएएस में चयन हुआ।
बिसलपुर निवासी ललित मेवाड़ा जिनका आरएएस में चयन हुआ।

दो बेटियों के पिता ने परिवार व नौकरी की जिम्मेदारी निभाते हुए आरएएस बनने के लिए जुटे रहे तो मिली सफलता

बिसलपुर निवासी ललित मेवाड़ा लुणावा में मेलनर्स सैकेड ग्रेड पर कार्यरत हैं। वर्ष 2003 में संविदा पर नौकरी में लगे। वर्ष 2008 में सरकारी सेवा में नियमित हुए। वर्ष 1998 में शादी हो गई। 18 साल की बेटी सुरभि व 15 साल की बेटी खुशबु के साथ पिछले दो-तीन वर्षों से प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी करवा रहे थे और अपनी भी तैयारी कर रहे थे। इसमें अपने विभाग के सीनियर अफसरों का मार्गदर्शन दिया। बिना कोचिंग के परिवार व नौकरी की जिम्मेदारी निभाने के बाद जो समय मिलता उसका सद़्पयोग करते हुए तैयारी जारी रखी आखिर वह दिन भी आ गया। जिब बिसलपुर निवासी ललित मेवाड़ा पुत्र हजारीमल मेवाड़ा का आरएएस में चयन हुआ। उन्होंने 390 रैंक प्राप्त की।

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