राम मंदिर में 60 फीसदी पत्थर बंंसी​​​​​​​ पहाड़पुर का ​​​​​​​:भरतपुर, नागौर, जोधपुर और सिरोही से 1.75 लाख घन फीट पत्थर अयोध्या भेजा

जयपुर9 महीने पहले
राम मंदिर में लगा राजस्थान का पत्थर।

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए राजस्थान को बड़ा सौभाग्य मिला है।रामलला मंदिर निर्माण में करीब 60 फीसदी पत्थर भरतपुर के बंसी पहाड़पुर का लगेगा। सिंहद्वार,रंग मंडप,नृत्य मंडप,गर्भ गृह, शिखर और परिक्रमा के लिए खंभे, दीवार, छज्जे, मेहराब, झरोखे, छत के लिए भरतपुर से पत्थर भेजे गए हैं। जबकि चौखट बाजू और फर्श के लिए नागौर के मकराना का वर्ल्ड फेमस सफेद मार्बल लगाया जा रहा है। जोधपुर के छीतर पत्थर के 32 द्वार लगेंगे,जिनमें से हिन्दू द्वार खास है।जबकि सिरोही के पिण्डवाड़ा के कारीगरों बंसी पहाड़पुर के पत्थों को तराशकर अयोध्या भेज रहे हैं।यानी राजस्थान के 4 जिलों भरतपुर,नागौर,जोधपुर और सिरोही का योगदान राम मंदिर निर्माण में रहेगा।

सांकेतिक चित्र-राम मंदिर,आयोध्या
सांकेतिक चित्र-राम मंदिर,आयोध्या

बंसी पहाड़पुर के पिंक स्टोन की सबसे ज्यादा है डिमांड

राम मंदिर निर्माण में भरतपुर के बंसी पहाड़पुर पिंक सैंड स्टोन का 60 फीसदी पत्थर इस्तेमाल होगा। 1992 से लेकर अब तक 1.75 लाख घन फीट पत्थर यहां से अयोध्या भेजा गया है। मंदिर में करीब 5 लाख घन फीट पत्थर चाहिए,जिसमें से 3 लाख घन फीट पत्थर केवल बंसी पहाड़पुर का सैंड स्टोन है।इस पत्थर से 16 फीट ऊंचाई के 126 से ज्यादा खंभे बन चुके हैं। सिंहद्वार रंग मंडप, नृत्य मंडप, गर्भ गृह, शिखर और परिक्रमा मार्ग के खंभे,दीवारें,छज्जे,मेहराब,झरोखे,छत के लिए भरतपुर का पत्थर भेजा जाता रहा है। सरकारी ई-ऑक्शन के बाद तेजी से यहां माइनिंग कर पत्थर अयोध्या भेजा जा सकेगा।

बंसी पहाड़पुर की शिलाएं
बंसी पहाड़पुर की शिलाएं

भरतपुर के बंसी पहाड़पुर के पत्थर को क्यों चुना गया

बंसी पहाड़पुर के पत्थरों की लाइफ 5000 साल तक है। अयोध्या राम मंदिर निर्माण के लिए पायलिंग में राजस्थान के पत्थरों की बीम से मजबूती दी गई है।नींव पर बंशी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों से 3 फ्लोर का राममंदिर बनेगा। ये पत्थर सबसे ज्यादा भार सहने वाले, मजबूत, टिकाऊ और सुंदर दिखते हैं। इस पत्थर की लाइफ करीब 5000 साल तक मानी जाती है।कारीगरी,नक्काशी,पच्चीकारी,डिजाइनिंग के लिए ये बहुत सरल होते हैं।चटखते या दरकते नहीं हैं। इस पत्थर से देश की सदियों से खड़ी बुलंद इमारतें बनी हैं।लाल किला,बुलंद दरवाजा,संसद भवन,इंडिया गेट,भरतपुर का गंगा मंदिर,लक्ष्मण मंदिर,राजस्थान विधानसभा,राष्ट्रीय स्मारकों,अक्षरधाम,इस्कान मंदिरों में भी यह पत्थर इस्तेमाल हुआ है।बारिश होने पर इस पत्थर का रंग और निखरता है।

मकराना का सफेद संगमरमर चौखट-बाजू और मुख्य द्वार पर लगेगा
मकराना का सफेद संगमरमर चौखट-बाजू और मुख्य द्वार पर लगेगा

मुख्य द्वार और चौखट-बाजू में नागौर के मकराना का सफेद संगमरमर लगेगा

राम मंदिर के मुख्य द्वार का निर्माण मकराना के सफेद संगमरमर से होगा। 3 फ्लोर के मंदिर निर्माण में मार्बल की चौखट के खम्भों पर नक्काशी होगी।उनमें फूल का आकार उभरा होगा।मंदिर में 30 जगह मकराना के सफेद मार्बल की चौखटें लगेंगी।इसे रामलला गर्भगृह, गुडमण्डप के द्वार में भी लगाया जाएगा।चौखट के ऊपरी भाग के दोनों ओर पत्थर पर शंख उभरा होगा,जो भगवान विष्णु का रूप होगा।

क्यों चुना गया मकराना मार्बल

मकराना का सफेद संगमरमर दुनियाभर में अपनी क्वालिटी और ऐतिहासिक पहचान के लिए जाना जाता है।आगरा का ताजमहल,इंग्लैंड का विक्टोरिया महल और आबू धाबी की दुनिया की सबसे बड़ी जायद मस्जिद इसी पत्थर से बने हैं।भव्य राम मंदिर के फर्श और पिलर कंगूरे भी संगमरमर से सजाए जाने हैं।मकराना के करीब 1 लाख घन फीट पत्थर का उपयोग राम मंदिर में होगा। सफेद संगमरमर मजबूती,बेहतरीन चमक,बेदाग रंग और सीलन नहीं पकड़ने के लिए जाना जाता है।मकराना के पत्थर में कैल्शियम कार्बोनेट 90 फीसदी तक माना जाता है और आयरन कम होता है।लिहाजा इसकी उम्र ज्यादा होती है।टाइलिंग,खंभे,खिड़की-दरवाजों की चौखटें,बाजू,डोलियां,बैरियर्स,आराम कुर्सियां, शिलाटि्टकाएं, मूर्तियां बनाने समेत कई कामों में इनका सानी नहीं है।मकराना के मार्बल में पानी का सीपेज नहीं होता है।

जोधपुर के छीतर पत्थर से बना अयोध्या राममंदिर पंचकोसी परिक्रमा का हिन्दू धाम पिलर
जोधपुर के छीतर पत्थर से बना अयोध्या राममंदिर पंचकोसी परिक्रमा का हिन्दू धाम पिलर

राम मंदिर के पास जोधपुर के छीतर पत्थर का हिन्दू स्वागत द्वार

जोधपुर के छीतर पत्थर के द्वार भी अयोध्या के राम मंदिर में शोभा बढ़ाएंगे। मंदिर के पास कुल 64 स्वागत द्वारों में से 32 जोधपुर के छीतर पत्थर से तैयार होंगे पहला हिन्दू द्वार भेजा जा चुका है।इस द्वार पर राम,सीता, लक्ष्मण और हनुमान की आकृतियां कारीगरों ने उकेरी हैं।अयोध्या में पंचकोसी परिक्रमा नया घाट पर बन रहे द्वार में 350 घन फुट जोधपुरी सूरसागर का पत्थर लगेगा।अरुणा माइंस एंड अरुणा स्टोन से काफी पत्थर अयोध्या भेजा गया है।खदान से पत्थर निकालने के बाद बनाड़ के श्री यादे फैक्ट्री में इस विशाल द्वार का निर्माण किया गया।

राम मंदिर के लिए क्यों चुना गया जोधपुर का छीतर पत्थर

जोधपुर का छीतर का भाटा यहां इमारतों,मकानों की शान के साथ ही यहां की पहचान भी है।उम्मेद भवन पैलेस इस पत्थर की जीती जागती मिसाल है।बालू मिट्टी होने के कारण यह जल्दी काला नहीं पड़ता और चमक बनी रहती है।यह पानी लगने से खराब नहीं होता है।कारीगरी और गढ़ाई के लिए आसान है।यह दिखने में सुन्दर लगता है।

सिरोही के पिण्डवाड़ा में तराशे जाते हैं बंसी पहाड़पुर के पत्थर
सिरोही के पिण्डवाड़ा में तराशे जाते हैं बंसी पहाड़पुर के पत्थर

सिरोही के पिंडवाड़ा में पत्थरों को तराशने,संवारने और नक्काशी का काम

राजस्थान की कारीगरी भी भव्य राममंदिर में दिखाई देगी।मंदिर के पिलर,दीवारों, शिखर, गुंबद सिरोही के पिंडवाड़ा के कारीगरों के तराशे पत्थराें से तैयार हाे रहे हैं।बंसी पहाड़पुर पत्थर की शिलाएं यहीं से तराशकर भेजी जाती हैं। यहां मंदिर के मंडोवर, छत का भी काम हुआ है।पिछले दिनों 9 शिलाएं कारीगरी कर अयोध्या भेजी गईं हैं।रीको एरिया में सोमपुरा मार्बल के परेश भाई सोमपुरा की टीम ने केंद्र में धरनीशिला और आसपास 8 अन्य शिलाएं-नंदा,भद्रा,जया पूर्णा,अजीता,अपराजिता,मंगला और विजया दिशाओं के अनुरूप लगाने के लिए अयोध्या भेजी हैं।

पिण्डवाड़ा का क्या है मंदिर निर्माण में महत्व

पिण्ड़वाड़ा से पत्थरों को तराशकर ट्रकों में भरकर अयोध्या के कारसेवकपुरम 1995 से ही भेजा जाता रहा है।यहां से 1996 से 2002 के दौरान 75 हजार घन फीट पत्थर तराश कर अयोध्या भेजा गया था।1995 के बाद से लगी 3 कार्यशालाओं का उद्घाटन वीएचपी नेता अशोक सिंघल,चंपत राय और राम बाबू ने किया था।अब राम मंदिर के मॉडल में बदलाव होने यहां पर करीब 3 लाख घन फीट पत्थर को तराशने में कारीगर जुटे हैं।यहां 2023 तक कार्यशाला में पत्थर तराशने का काम चलेगा।4 से 5 हजार कारीगर यहां पत्थर तराशने में जुटे हैं।शिल्पकारों को भी इस बात की खुशी है,कि उन्हें राममंदिर निर्माण का सौभाग्य मिला है।