राजघराने की महिला नेता के पोस्टर खूब चर्चा में:पार्क में बात करते वक्त दो नेताओं की बात लीक, हैदराबाद के नेता का इतना डर क्यों?

जयपुर9 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी

चुनाव में अभी दो साल का वक्त है, लेकिन सत्ताधारी पार्टी में टिकट की दावेदारी अभी से शुरू हो गई है। राजघराने से जुड़ीं एक महिला नेता जयपुर ग्रामीण की एक सीट से चुनाव लड़ना चाहती हैं। पिछली बार भी दावेदार थीं, लेकिन टिकट नहीं मिला। इस सीट पर विपक्षी पार्टी जीत रही है। इस बार महिला नेता ने अब से पोस्टर वॉर शुरू कर दिया है।

महिला नेता के प्रदेश मुख्यालय के बाहर बड़े बड़े पोस्टर लगे हैं, उन पोस्टर्स में भावी उम्मीदवार बताया गया है। अब पार्टी टिकट दे या न दे मैडम ने तो अपने को उम्मीदवार घोषित कर दिया है। जानकार कह रहे हैं कि आमतौर पर इतना पहले सियासी पत्ते खोलने से विरोधियों को मौका मिल जाता है। फिर टिकट में कई बाधाएं और आ जाती हैं। अब ये बात मैडम को कौन समझाए?

उपचुनाव की हार पर मंत्री और पूर्व मंत्री का चिमनी विमर्श

मौजूदा सरकार के संकट मोचक मंत्री और पूर्व सरकार के मुखिया के खास रहे एक पूर्व मंत्री राजधानी के सेंट्रल पार्क में अक्सर मिलते रहते हैं। उपचुनावों की हार के बाद दोनों मिले तो खूब बातें हुईं। दोनों ही खुश थे। वन लाइनर के लिए मशहूर संकट मोचक मंत्री ने चुटकी ली, आपकी पार्टी की तो तीसरे-चौथे नंबर पर चली गई। आपके पन्ना प्रमुख ही भाग गए क्या?

पूर्व मंत्री ने भी मजाकिया लहजे में कह दिया- आप बाकी कुछ भी की दीजिए, लेकिन यह नहीं कहोगे कि हमारी चिमनी चेप दी। ये डायलॉग डिलीवरी किसी ने सुन ली और जहां पहुंचानी थी वहां भी पहुंचा दी है। पार्क में बात करते वक्त नेताओं को आसपास तो देख ही लेना चाहिए।

सियासी छंटाई

सत्ता-संगठन में अति तालमेल के बावजूद साइड इफेक्ट आने शुरू हो गए हैं। प्रदेश के मुखिया ने पिछले दिनों ट्रासंफर में करप्शन पर खुले मंच से वोटिंग करवाकर खुद के बारे में बनी बनाई धारणा पर मुहर लगवा ली। उनके बारे में धारणा है कि वे सियासी छंटाई में माहिर हैं। बयान पर सफाई भी दी, लेकिन तीर कमान से निकलने के बाद कुछ नहीं होता। सत्ता-संगठन के बारे में जो धारणा बननी थी वह बन चुकी। सियासी पंडित पूरे घटनाक्रम के पीछे एक पुरानी घटना को रिकॉल कर रहे हैं, जिसका चक्रवृद्धि ब्याज सहित सियासी हिसाब अब किया है।

महिला अफसर के निशाने पर कौन मंत्री ?
विपक्षी पार्टी के एक नेता की सोशल मीडिया पोस्ट पर जयपुर में तैनात एक महिला अफसर की टिप्पणी ने ब्यूरोक्रेसी और राजनीति में हलचल मचा दी है। जयपुर में तैनात एक अफसर को भरतपुर के स्थानीय नेता पर खुलेआम गंभीर आरोप लगाने की क्या जरूरत पड़ी? पड़ताल में भरतपुर कनेक्शन ही कारण बताया गया।

टिप्पणी करने वाली महिला अफसर भरतपुर यूआईटी में रही हैं। जिस नेता को निशाने पर लिया उसके भी यूआईटी कनेक्शन हैं, उस समय का ही विवाद बताया जा रहा है। वह नेता एक मंत्री के समर्थक हैं तो निशाने पर मंत्री भी आ गए हैं। जब समर्थक पर गंभीर आरोप लगेंगे तो आंच मंत्री तक भी आएगी।

हैदराबाद के नेता का इतना डर क्यों?

हैदराबाद के एक चर्चित नेता पिछले दिनों जयपुर यात्रा पर आए थे। राजस्थान में जल्द पार्टी लॉन्च करने की घोषणा करके चले गए। हर पार्टी के नेता आते रहते हैं, लेकिन इंटेलिजेंस की इतनी सक्रियता नहीं होती। नेताजी से मिलने वाले हर विजिटर का सरकारी आईडी कार्ड होटल के रिसेप्शन पर जमा किया गया। बिना आईकार्ड जमा करवाए किसी को नहीं मिलने दिया।

यह सख्ती देख पड़ताल की गई तो पता लगा कि पुलिस और इंटेलिजेंस ने होटल मैनेजमेंट को इसके लिए पाबंद किया था। इतना ही नहीं विदेशी नागरिकों पर नजर रखने वाली इंटेलिजेंस विंग के अफसर तक नजर रखे हुए थे। इस विंग का देश के किसी नेता पर इतनी निगरानी रखने का क्या काम? सत्ताधारी पार्टी के नेता तो हैदराबाद के नेता से कोई खतरा ही नहीं बता रहे फिर इंटेलिजेंस का इतना पहरा क्यों?

मंत्री बनने की अंतहीन तलब
सत्ताधारी पार्टी में मंत्री बनने के लिए एक अनार सौ बीमार वाली हालत है। कई विधायक तो मन ही मन मंत्री पद की शपथ लेकर बैठे हैं। कई तो ऐसे हैं कि जयपुर ही नहीं छोड़ रहे, न जाने कब शपथ के लिए फोन आ जाए। पूर्वी राजस्थान के एक विधायक के क्षेत्र में तो प्रदेश के मुखिया का दौरा था, लेकिन केवल एक दिन पहले ही क्षेत्र में गए। पूर्वी राजस्थान के नेता कभी डिप्टी सीएम बनने का ख्वाब देख रहे थे, विपक्ष में रहते वक्त अलग खेमा था,अब अलग है।

हार की मिठाई

उपचुनाव की हार के बाद विपक्षी पार्टी में सियासी हलचल बढ़ी हुई है। ऊपरी तौर पर भले सब कुछ ठीक नजर आ रहा हो, लेकिन अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। हर खेमा इस हार को अपने हिसाब से पेश कर रहा है। अब उपचुनाव में हार के बाद पार्टी के नेताओं के बारे में नए नए खुलासे हो रहे हैं। उपचुनाव की हार के बाद विपक्षी पार्टी के एक नेताजी के घर मिठाइयां बांटी गई। मिठाई खाकर आने वालों ने ही बाहर यह बात बता दी। अब बाहर इस तरह की बातें आएंगी तो अंदर क्या हाल है, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

चूक या सियासी संकेत
प्रदेश के मुखिया ने जब से जिलों के दौरे शुरू किए हैं। कई समीकरण बन-बिगड़ रहे हैं। इन दौरों में विरोधी खेमे के विधायकों के क्षेत्रों में जाने के मायने तलाशे जा रहे हैं। विरोधी खेमे के एक विधायक ने कार्यक्रम के बारे में सोशल मीडिया पर जानकारी अपडेट की तो युवा नेता का ही फोटो गायब था। इसे देख हलचल मची। विधायक ने इसके बाद दूसरा पोस्टर डालकर अपडेट की। जिसमें युवा नेता का फोटो था। समर्थक विधायक अपने ही नेता का फोटो लगाना कैसे भूल सकता है, अब पड़ताल हो रही है कि यह चूक थी या भविष्य का कोई संकेत।

इलेस्ट्रेशन : संजय ढिमरी
वॉइस ओवर: RJ भावेश

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