भाईदूज और दूज शनिवार आज:भाई-बहन के प्रेम और सौभाग्य का दिन,मुहूर्तों और शुभ-मांगलिक कामों के लिए हुआ खास

जयपुर23 दिन पहले
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भाई-दूज और दूज-शनिवार आज - Dainik Bhaskar
भाई-दूज और दूज-शनिवार आज

5 दिन का दिवाली के त्योहार आज भाई दूज के साथ पूरा हो जाएगा। भाई दूज का पावन पर्व भाई-बहन के प्रेम और सौभाग्य दिन है। इसके साथ ही यह दिन अब की बार इसलिए भी खास है क्योंकि यह दूज के शनिवार को आया है। ज्योतिष में शनिवार को द्वितीया तिथि शुभ और मांगलिक कार्यों, मुहूर्तों के लिए बहुत विशेष मानी जाती है। इसलिए इस दिन बड़ा सावा भी है। लगन,शादी-ब्याह,रोका-सगाई,मकानों-फ्लैटों के मुहूर्त, नींव के मुहूर्त, कारखाने-इंडस्ट्री और मशीनरी के मूहूर्त-पूजा के लिए ये दिन बहुत खास है। क्योंकि मान्यता है कि शनिवार को द्वितीया तिथि हो, तो इस दिन काम बहुत पक्के और लम्बे चलने वाले होते हैं। सफलता और सौभाग्य,समृद्धि देने वाले होते हैं।

भाई दूज पर तिलक का सबसे शुभ मुहूर्त 2 घंटे 11 मिनट

ज्योतिषाचार्य पंडित पुरूषोत्तम गौड़ ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि चौघड़िया के हिसाब से कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 5 नवम्बर को रात 11 बजकर 14 मिनट से शुरू होकर 6 नवम्बर को शाम 7 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। भाईदूज का सबसे अच्छा मुहूर्त 6 नवम्बर को दोपहर 1.10 मिनट से 3.21 बजे तक ही है। यानी 2 घंटे 11 मिनट तक ही सबसे अच्छा मुहूर्त है। इस दौरान स्थिर लगन है ,तो तिलक करने के लिए शुभ होता है।

मुहूर्त कलश
मुहूर्त कलश

मुहूर्त,नींव,शादी-ब्याह,मांगलिक कार्यों के लिए दूज का शनिवार शुभ

दूज का शनिवार होने के कारण भाईदूज का दिन शुभ और मांगलिक कामों के लिए भी बहुत अच्छा है। खास तौर पर नींव के मुहूर्त, रोका-सगाई के मुहूर्त, शादी ब्याह, मशीनरी और नए कार्यों की शुरूआत के लिए पूजा के मुहूर्त इस दिन सबसे अच्छे रहते हैं। शनिवार के दिन किया गया काम ज्योतिष के हिसाब से पक्का माना जाता है।

हिन्दू धर्म में भाई दूज का बड़ा महत्व

पंडित पुरूषोत्त्म गौड़ ने बताया कि हिंदू धर्म में भाई दूज का विशेष महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाई दूज भी रक्षा बंधन की तरह ही भाई-बहन के एक-दूसरे के लिए स्नेह को दर्शाता है। भाई की लम्बी उम्र की कामना को लेकर बहन तिलक लगाती है और भाई को सुख समृद्धि और दीर्घायु का आशीष देती हैं। बदले में भाई गिफ्ट देते हैं, बहनों को सम्मान देते हैं और रक्षा का वचन देते हैं। भगवान से बहनें प्रार्थना करती हैं कि हर संकट से उनके भाई को भगवान बचाए। भाईदूज पर भाई को पान खिलाने की रस्म भी होती है।

भाईदूज की धार्मिक मान्यता

भाई बहन के प्रेम के इस दिन भाई बहनों के घर जाते हैं। बहनें उनके लिए घरों में पकवान बनाती हैं। भाई के तिलक लगाती हैं उन्हें नारियल देकर माथे पर तिलक लगाती हैं। सुख,सौभाग्य,समृद्धि और लम्बी उम्र की कामना करती हैं। भाई भी बहन की हमेशा रक्षा करने, हमेशा सुख-दुख में उसका साथ देने, अपने सभी कर्तव्य निभाने का वचन देता है। हिन्दू धर्म में भाई दूज के दिन यम और उनकी बहन यमुना की पूजा की परंपरा है।

पौराणिक कथा

एक पौराणिक कथा के अनुसार भाई दूज के दिन ही भगवान श्री कृष्ण नरकासुर नाम के राक्षस का वध कर द्वारिका लौटे थे। इस अवसर पर भगवान कृष्ण की बहन सुभद्रा ने फल,फूल, मिठाईयों और अनेकों दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। उन्हें तिलक लगाकर दीर्घायु और हमेशा विजय की कामना की थी।

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