ग्राउंड रिपोर्टभास्कर गुजरात में वहां पहुंचा, जहां कैद हैं राजस्थानी बेटियां:दलाल 'नागजी' के गुर्गे 24 घंटे देते हैं पहरा, दो बार रिपोर्टरों पर हमला

जयपुर4 महीने पहलेलेखक: समीर शर्मा और मनीष व्यास

गुजरात का खेरालु शहर के पास है मलकपुर गांव। शाम का वक्त था, जब भास्कर टीम वहां पहुंची। गांव के बाहर सुनसान इलाके में बंकरनुमा मकान। मकान में 4 फीट हाइट के बिना खिड़की और रोशनदान वाले तहखाने जैसे कमरे। कमरों में इतना अंधेरा कि न सूरज उगने का पता चलता है, न डूबने का।

इन तहखाने जैसे कमरों में ठूंस-ठूंस कर भरी हुई थीं कुछ लड़कियां। ये लड़कियां राजस्थान की हैं, जिन्हें बेचने के लिए यहां लाया गया। किसी को नौकरी दिलाने का झांसा देकर तो किसी को किडनैप करके।

कमरे ऐसे हैं कि लड़कियां सीधी खड़ी भी नहीं हो सकतीं। कमरों के बाहर लगे हैं मोटे-मोटे ताले। चौकसी के लिए दलाल नागजी के 15-20 गुर्गे 24 घंटे यहां पहरा देते हैं।

दिन में नए-नए मर्द वहां आते हैं, जिनके सामने इन लड़कियों की नुमाइश की जाती है। भास्कर टीम वहां इन्वेस्टिगेट करने के लिए पहुंची तो पॉलिटिशियन, पुलिस और दलालों का शर्मनाक गठजोड़ सामने आया। 2 बार हमारे रिपोर्टरों पर भी हमले हुए।

पढ़िए- पूरी रिपोर्ट….

पुलिस नागजी के बारे में कुछ बताने को तैयार नहीं

राजस्थानी बेटियों की तस्करी और नीलामी का खेल समझने के लिए हम जयपुर से 570 किलोमीटर दूर गुजरात के खेरालु शहर पहुंचे।

खेरालु के पुलिस स्टेशन का एक कॉन्स्टेबल एमबी प्रजापत हमारे टच में था। हम सबसे पहले उससे मिलने पहुंचे। पुलिस स्टेशन में हम डाबोड़ा गांव का सरपंच भी मिल गया।

उससे बातचीत के बाद हम खेरालु SHO ए. टी. पटेल के पास पहुंचे। राजस्थान की बेटियों के सबसे बड़े दलाल 'नागजी' के बारे में पूछताछ की तो SHO पटेल ने कोई भी जानकारी होने से मना कर दिया।

हमने उसे बताया कि नागजी को 3 दिन पहले ही राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये पता चलते ही वो परेशान हो गया। इधर-उधर फोन लगा कर पूछताछ भी की।

खेरालु SHO पटेल के हाव-भाव और 'नागजी' को लेकर उसकी चिंता को हमने मोबाइल के हिडन कैमरा में रिकॉर्ड कर लिया, क्योंकि हमें इनपुट मिला था कि दलाल को लोकल पुलिस का पूरा सपोर्ट था।

पुलिस ने कहा- नागजी का पीछा छोड़ राजस्थान लौट जाओ

थोड़ी देर बाद हम बाहर निकल गए। एक-दो किलोमीटर ही चले थे कि हमें दुबारा थाने आने को कहा गया।

जैसे ही हम वहां पहुंचे SHO ने हमारे साथी का मोबाइल ले लिया और धमकाने लगा। इस बीच उसने मोबाइल में रिकॉर्ड हुए वीडियोज भी देख लिए। उसने हमें झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी।

काफी देर समझाइश के बाद उसने हमारे साथी से गुजराती में लिखा एक पेपर साइन करवाया और 'नागजी' का पीछा छोड़ राजस्थान चले जाने की बात कही। इसके बाद हम वहां से निकल गए।

थोड़ी देर हाइवे पर घूमने के बाद हम दोबारा लौटे और इस बार सीधा 'नागजी' के गांव डाबोड़ा पहुंच गए।

भीड़ ने भास्कर टीम को घेर लिया

नागजी के गुर्गों को हमारे पहुंचने की सूचना पहले ही मिल गई थी। जैसे ही भास्कर टीम डाबोड़ा गांव पहुंची, गांव के बाहर ही कुछ लोगों ने हमें घेर लिया।

हम कुछ समझ पाते उससे पहले ही वहां हंगामा शुरू हो गया। जैसे-तैसे हम वहां से जान बचाकर निकले।

हाईवे पर पहुंच कर पूछताछ की तो पता चला डाबोड़ा इलाके का सबसे खतरनाक गांव है, वहां बिना लोकल हैल्प के जाना जोखिम भरा है।

ऐसे में हमने हमारे एक लोकल सोर्स गोपाल ठाकोर(बदला हुआ नाम) को बुलाया। काफी न नुकुर के बाद वो हमें डाबोड़ा ले जाने को तैयार हुआ, लेकिन शर्त थी कि उसके कहे बगैर हम कुछ नहीं करेंगे।

गोपाल के साथ हम डाबोड़ा गांव पहुंचे। इसके बाद गोपाल ने कार गांव के बाहर ही रुकवा दी। हमें कार में ही बैठे रहने का कहकर अकेले ही पैदल-पैदल अंदर गया। कुछ लोगों से बात करने के बाद लौटा और हमें चलने को कहा। बोला- हिडन कैमरे से वीडियो बनाओ तो सावधानी से बनाना। तुम्हारी एक गलती से मेरी जिंदगी भी खतरे में पड़ सकती है।

नागजी की गिरफ्तारी के बावजूद लड़कियां आजाद नहीं

हम कार से नीचे उतरे और लोगों की भीड़ के बीच से चुपचाप एक घर के सामने पहुंचे। पता चला- यही लड़कियों को ग्राहकों के सामने पेश किया जाता है। मकान के बाहर ताला लगा था, लेकिन अंदर से लड़कियों की आवाजें साफ सुनाई दे रही थीं। लोकल पुलिस का कितना सपोर्ट है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नागजी राजस्थान पुलिस की गिरफ्त में है, इसके बावजूद गुजरात पुलिस ने यहां कोई कार्रवाई नहीं की।

हम जैसे ही मकान की तरफ बढ़े कुछ लड़कों ने हमें रोक दिया गया और वापस लौटने के लिए कहा। गोपाल ने भी इशारे से समझाया तो हम वहां से वापस बाहर निकल गए।

राजस्थान पुलिस समझ गुर्गों ने भास्कर टीम पर फेंके पत्थर

इसके बाद हम वहां से 14 किलोमीटर दूर मलकपुर गांव पहुंचे। इस गांव की रहने वाली रमिला देवी नागजी की सबसे भरोसेमंद पार्टनर है। उसे भी राजस्थान पुलिस ने करीब एक महीने पहले गिरफ्तार कर लिया था। हम सीधे ही उस कैदखाने के पास पहुंचे, जहां तस्करी कर लाई लड़कियों को बंधक बनाकर रखा जाता है, टॉर्चर किया जाता है।

जब हम उस कैदखाने के करीब पहुंचे तो वहां बैठे लोगों ने हमें राजस्थान पुलिस समझ लिया। पत्थरबाजी करते हुए वहां से भाग गए। एक बार पीछे होने के बाद हम दोबारा वहां गए। हमने देखा वहां सुनसान इलाके में बंकरनुमा ईंटों का कच्चा मकान बनाया हुआ था। इसके अंदर 4 फीट हाइट के बिना खिड़की और रोशनदान वाले तहखाने जैसे कमरे थे।

बाहर कच्ची दारु बनाने के लिए हांडी चढ़ाई हुई थी और नीचे चूल्हा जल रहा था।

आस-पड़ोस के लोगों से बात की तो उन्होंने ऑफ कैमरा बताया कि रमिला से सभी लोग डरते है। उसे बड़े लोगों का सपोर्ट है। वो ही लड़कियों को लाती थी। जब उनका मन भर जाता तो इन लड़कियों को आगे बेच देती। कई-कई बार तो वो एक लड़की को 4-5 बार तक बेच देती। उसे रोकने की हिम्मत किसी में नहीं थी।

पूर्व उपप्रधान लवाजी वलाजी ठाकोर बोले- असल खिलाड़ी एक बड़ा नेता

मलकपुर गांव के ही रहने वाले बुजुर्ग जनप्रतिनिधि और खेरालु के पूर्व उपप्रधान लवाजी वलाजी ठाकोर ने बताया, रमिला को एक बड़े नेता का सपोर्ट था। ऐसे में वो किसी की बात नहीं सुनती। सही मायने में इस पूरे कारोबार का असल खिलाड़ी वो नेता ही है। रमिला और नागजी तो प्यादे हैं।

हमने उस नेता का नाम बताने को कहा तो उन्होंने मना कर दिया और बोले, रमिला से पूछ लीजिये या इलाके में पता कर लीजिये। कोई भी बता देगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि उस नेता की शह और रुपयों के लालच के चलते खेरालु पुलिस भी इस गंदे कारोबार को यहां सपोर्ट करती है।

अब राजस्थान पुलिस ने एक्शन किया है पर वो भी असल खिलाड़ी को पकड़ने के बजाय प्यादों को पकड़कर वाहवाही लूट रही है।

MLA को पुलिस की कार्रवाई के बाद पता चला

खेरालू विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी MLA अजमल ठाकोर भी मलकपुर के रहने वाले हैं। भास्कर टीम उनसे बात करने उनके घर पहुंची।

MLA अजमल ठाकोर ने बताया कि उन्हें भी पुलिस कार्रवाई के बाद पता चला कि नागजी और रमिला यहां गलत काम कर रहे थे। पुलिस को उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने को कहा है।

अब पढ़िए- कैसे पकड़ा गया सबसे बड़ा दलाल, जिसका पुलिस के पास फोटो तक नहीं था

भास्कर की रिपोर्ट के बाद हरकत में आई राजस्थान पुलिस

भास्कर ने करीब एक पहले पहले इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट महाराष्ट्र-गुजरात में बिक रहीं राजस्थान की बेटियां में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया था। रिपोर्ट पब्लिश होने के बाद राजस्थान पुलिस हरकत में आई। उस पर लगातार ऐसे अपराधी 'नागजी' को पकड़ने का दबाव था, जिसकी कोई फोटो भी उनके पास नहीं थी।

गुजरात की लोकल खेरालु थाना पुलिस के साथ दी गई हर दबिश में वो घर से गायब मिलता था। लोकल सरपंच ने भी उसकी कोई फोटो होने से मना कर दिया था। ऐसे में लास्ट में सिरोही जिले की पिंडवाड़ा पुलिस ने अपनी रणनीति बदली।

सिविल ड्रेस में नागजी के घर पर रखी नजर

पिंडवाड़ा सीओ जेठूसिंह करणौत ने बताया कि एक पुलिस टीम ने लगातार गुजरात के खेरालु इलाके में नजर रखी। गुजरात की लोकल पुलिस को इसकी कोई जानकारी नहीं दी।

पुलिस टीम सिविल ड्रेस में नागजी के घर के आस-पास और उसके परिजनों पर नजर रख रही थी। नागजी का अपने गांव में काफी खौफ है। उसके पिता का नाम तेजाजी ठाकोर है और डाबोड़ा के जिस एरिया में वो रहता है उस एरिया का नाम तेजपुर है।

लोगों ने बताया कि तेजपुर नाम उसके पिता की वजह से ही पड़ा था।

लोकल पुलिस को भी पता नहीं चलने दिया

पुलिस ने उस इलाके में मुखबिर तैयार किए। उन्हीं की मदद से उसे आइडेंटिफाई किया गया। 1 सितंबर को जैसे ही पुलिस को नागजी के आने की जानकारी मिली, पुलिस ने उसे तुरंत गिरफ्तार कर लिया।

लोकल पुलिस के साथ-साथ किसी को भनक भी नहीं लगने दी। इसके बाद हाईवे को छोड़कर वहां से पिंडवाड़ा की तरफ आने वाले शार्ट रास्तों से उसे ले आए। फिलहाल वो न्यायिक हिरासत में सिरोही जेल में बंद है। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश करने पर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

राजस्थानी लड़कियों की तस्करी का मास्टरमाइंड नागजी ठाकोर।
राजस्थानी लड़कियों की तस्करी का मास्टरमाइंड नागजी ठाकोर।

नागजी का 4 जिलों में नेटवर्क, किसी ने नहीं देखा चेहरा

गिरोह के मास्टरमाइंड नागजी ठाकोर को इलाके में लोग 'छोरियों के सेठ' नाम से जानते हैं। गुजरात से सटे 4 जिलों सिरोही, उदयपुर, बांसवाड़ा और डूंगरपुर की बच्चियां 'नागजी' की गैंग का सॉफ्ट टारगेट रही हैं।

इन जिलों के गांवों की लड़कियों को किडनैप कर या नौकरी का लालच देकर लोकल दलाल अपने जाल में फंसा लेते हैं। इसके बाद उन्हें डाबोड़ा में नागजी को सौंप दिया जाता है।

इस केस में जिन लड़कियों की शिकायत पुलिस तक पहुंची थी, उन्होंने नागजी को कभी डाइरेक्टली देखा या जाना नहीं था। क्योंकि वो पर्दे के पीछे से पूरे गिरोह को चला रहा था।

इधर, एसपी बोले- लड़कियां बेचने जैसी बात सामने नहीं आई

खेरालु गुजरात के मेहसाणा जिले में आता है। मामले में पुलिस का पक्ष जानने के लिए हमने मेहसाणा एसपी अचल त्यागी से बात की। उन्होंने कहा- हां, हमारे यहां खेरालु थाना क्षेत्र में ऐसी कार्रवाई हुई है। इस पूरे मामले की हमारे यहां कोई शिकायत नहीं थी। यहां कभी कोई लड़कियां खरीदने-बेचने जैसी बात सामने नहीं आई।