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  • The Largest Parking Project Has Become A 'garage', Now 100 Crore Will Be Shed On The Second Parking, Tender Will Be Received On September 25

ये स्मार्ट वर्किंग नहीं पैसे का दुरुपयोग है:सबसे बड़ा पार्किंग प्रोजेक्ट तो ‘गैराज’ बना, अब दूसरी पार्किंग पर 100 करोड़ बहाएंगे, 25 सितंबर को टेंडर रिसीव होंगे

जयपुर8 दिन पहले
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स्मार्ट सिटी की फंडिंग से शहर के सबसे बड़े रामनिवास बाग पार्किंग प्रोजेक्ट के उपयोग कराने के लिए संबंधित वर्किंग एजेंसी जेडीए ने पहल नहीं की है
  • बुकिंग के लिए जेडीए में नई इंजीनियरिंग टीम सजी, एनवायरमेंटल क्लीयरेंस अप्लाई
  • 25 को टेंडर रिसीव कर जल्द काम शुरू करने की तैयारी

स्मार्ट सिटी की फंडिंग से शहर के सबसे बड़े रामनिवास बाग पार्किंग प्रोजेक्ट के उपयोग कराने के लिए संबंधित वर्किंग एजेंसी जेडीए ने पहल नहीं की है। यह वही जेडीए और इंजीनियर हैं जो कि जैसे-तैसे काम लपकने और बुकिंग के लिए तैयार रहते हैं, लेकिन प्रोजेक्ट बनने के बाद उसके उद्देश्य या उपयोग को लेकर बैकफुट पर रहते आए हैं। कोई 300 करोड़ से तैयार साढ़े 5 हजार खाली पड़े फ्लैट इसका जीता-जागता उदाहरण है। 3 साल से इसमें जेडीए 17 कच्ची बस्तियां भी शिफ्ट नहीं कर पाया, हमारी कमाई का पैसा बर्बाद हो रहा है, सो अलग।

पार्किंग प्रोजेक्ट में ही पहले से तैयार 915 गाड़ियों की पार्किंग का उपयोग नहीं है। यह पार्किंग गैराज बनी हुई है। इससे सबक नहीं लेते हुए जेडीए 100 करोड़ से 1500 गाड़ियों का एक और विशाल गैराज तैयार करने जा रहा है। इसके लिए 25 सितंबर को टेंडर रिसीव हो रहे हैं। अक्टूबर में इस प्रक्रिया को फाइनल कर दीपावली तक जैसे-तैसे शुरू करने जतन पूरे हैं। आरोप है कि इसी में इंजीनियरिंग-प्रशासन के हित छुपे हैं। जो प्रोजेक्ट की उपयोगिता पर ध्यान या माहौल नहीं बना पा रहे।

इंजीनियरों की टीम बदली, एनवायरमेंट क्लीयरेंस अप्लाई
प्रोजेक्ट को शुरु करने के लिए प्राधिकरण में इंजीनियरिंग टीम बदली है। एक्सईएन वीएम जौहरी इस काम को लेने में सफल हो पाए हैं। पिछले सप्ताह प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए एनवायरमेंटल क्लीयरेंस के लिए अप्लाई कर गया है। उन्होंने कहा कि एएंडएफ स्मार्ट सिटी की है। हम जरूरी प्रक्रिया पूरी कर जल्द काम शुरू करेंगे।

इधर तीन आरओबी लगभग पूरे, देरी का दोषी तय होना बाकी
प्राधिकरण में 4-5 साल से रेंगते चले आ रहे दांतली, सितापुरा, बस्सी आरओबी के काम लगभग होने को हैं। इनमें जेडीए के लिए श्रेय लेने से ज्यादा काम की नाकामी का सेहरा है। वहीं देरी के लिए जेडीए कभी संबंधित इंजीनियरों की जिम्मेदारी तय नहीं कर पाया और इधर इंजीनियरों के हालात पेंडिंग प्रोजेक्ट में जनता से ज्यादा फर्म को पोषित करने के रहते आए हैं। बहरहाल इनको फाइनल कराकर देरी के लिए दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद है।

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