पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • The Web Of Superstition... On One Side The Postmortem Of The Dead Body Being Done By The Officer, On The Other Hand Bhopa Kept Alive The Soul With Drums

आत्मा जिंदा करने का खेल चलता रहा, अधिकारी देखते रहे:बिजली गिरने से हुई मौत में शव का पोस्टमार्टम करवाने पहुंचे थे SDM, सामने ही भोपा एक बच्चे की आत्मा को जिंदा करने का पाखंड रच रहा था

भीलवाड़ा19 दिन पहले
जननी स्वास्थ्य केंद्र में ढोल नगाड़े के साथ पहुंचे थे लोग।

भीलवाड़ा के ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास ने लोगों के जहन में घर कर रखा है। इस अंधविश्वास की जड़ें इतनी मजबूत हो चुकी है की इसके खिलाफ कोई आवाज भी नहीं उठा पा रहा। ऐसा ही एक मामला बागोर स्वास्थ्य केंद्र पर बुधवार को नजर आया। जहां आकाशीय बिजली गिरने के कारण एक युवक की मौत के बाद प्रशासन इकट्ठा हो रखा था। इसी दौरान वहां एक बच्चे की मौत के मामले में एक भोपा अपने अंधविश्वास का मायाजाल फैलाते हुए ढोल नगाड़ों के साथ अस्पताल में ही आत्मा को जिंदा करने का खेल खेल रहा था।

अधिकारियों के सामने ही यह अंधविश्वास का खेल चल रहा था। लेकिन किसी ने उन्हें रोकने तक की कोशिश नहीं की। इस दौरान मांडल एसडीएम पूजा सक्सेना, बागोर थाना प्रभारी छोटूलाल व तहसीलदार सोहनलाल सहित कई अधिकारी मौजूद थे।

बिजली गिरने से हुई मौत के मामले में स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे थे अधिकारी
दरअसल, बुधवार को बागोर थाना क्षेत्र के भीलों का खेड़ा में आकाशीय बिजली गिरने से गोपी भील की मौत हो गई थी। इस हादसे की जानकारी मिलने के बाद मृतक के शव को बागोर स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था। मृतक का पोस्टमार्टम करवाने के दौरान एसडीएम सहित सभी अधिकारी स्वास्थ्य केंद्र पर ही मौजूद थे।

स्वास्थ्य केंद्र के सामने जननी स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा था अंधविश्वास का खेल

इसी दौरान स्वास्थ्य केंद्र के सामने ही जननी स्वास्थ्य केंद्र पर कुछ लोग ढोल नगाड़ों के साथ भोपे को लेकर आए। यहां कुछ दिन पहले एक बालक की मौत हुई थी। उस बालक के परिवार के साथ आए भोपे ने स्वास्थ्य केंद्र के आगे ही जोत जलाई और अलग अलग कर्मकांड की क्रिया करने लगा। इसके बाद आत्मा को जिंदा कर उसकी ज्योत ले जाने का पाखंड रचते हुए ढोल नगाड़े बजाते हुए अधिकारियों के सामने से ही वापस निकल गए।

पुरानी कुप्रथा है थान बिठाने की , घर ले जाते हैं ज्योत

ग्रामीण क्षेत्रों में मृत लोगों के थान बिठाने की एक पुरानी कुप्रथा है। जब भी किसी की मौत होती है और उसके बाद उसके परिवार में कोई संकट आता है या वह व्यक्ति परिजनों के सपनों में आता है तो परिजन उस मृतक का थान बिठाना उचित समझते हैं। जिससे कि मृतक की आत्मा उनके परिवार को परेशान नहीं करेगी। बुधवार को अस्पताल में भी भोपे द्वारा एक बालक की आत्मा को जीवित किया जा रहा था। उस बालक की कुछ दिन पहले ही यहीं पर मौत हुई थी। परिवार में उसकी मौत के बाद काफी परेशानियां होने के कारण परिजन ढोल नगाड़ों के साथ उसके आत्मा को ज्योत के रूप में अपने घर लेकर गए । जहां पर उसका ध्यान बनवाने की प्रक्रिया करेंगे।

हमारी प्राथमिकता उस वक्त मृतक की पत्नी को चिकित्सा व्यवस्था मुहैया करवानी थी

मांडल एसडीएम पूजा सक्सेना ने कहा कि मैं जब स्वास्थ्य केंद्र पहुंची थी। तब जननी केंद्र के पास भोपा ज्योत लगा कर बैठा हुआ था। बिजली गिरने के कारण मृतक का पोस्टमार्टम चल रहा था। साथ ही यह भी सूचना थी कि उसकी पत्नी को भी चोट आई है। उसके पत्नी गर्भवती है। इसके कारण मेरा पूरा ध्यान बिजली गिरने के मामले में मृतक की पत्नी को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवाने का था। इसलिए मैं उस वक्त उस भोपे के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाई।

खबरें और भी हैं...