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  • This Is Not An Accident, Mass Murder; The Administration Has Completely Failed To Stop The Dilapidated Boats, So 11 Lives Were Drowned In Chambal

चंबल नदी में मौत की लहर:ये हादसा नहीं सामूहिक हत्या है; जर्जर नावों को रोकने में पूरी तरह नाकाम है प्रशासन, इसलिए चंबल में डूब गई 11 जिंदगियां

खाताैली (कोटा)3 दिन पहले
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हादसे केे बाद नदी किनारे एकत्र ग्रामीण। बचाव दल भी जुटा हुआ था काम में। (इनसेट) इस नाव से हुआ हादसा।
  • पैरलल इन्वेस्टिगेशन: रोज बेरोकटोक 14 नावों में 5 हजार लोग सफर करते हैं
  • शव मिलने तक बनी रही अपनों के जिंदा मिलने की उम्मीद, नदी किनारे गूंजती रही चीख-पुकार
  • लोगों को बचाया व शव भी निकाले ग्रामीणों ने, कोटा, सवाईमाधाेपुर व बूंदी से भी पहुंची टीमें

चंबल नदी में बुधवार सुबह हुए दर्दनाक नाव हादसे में 11 लोगों की मौत हो गई। दो लोगों की तलाश जारी थी। 20 की क्षमता वाली नाव में 32 लोग सवार थे। वजन ज्यादा होने के कारण यह हादसा हुआ। इसमें 19 लोगों को बचा लिया गया। यह हादसा कई परिवाराें काे जिंदगी भर के लिए न भरने वाला जख्म दे गया। अपने गांवाें से करीब 32 लोग सुबह हंसी-खुशी रवाना हुए थे, लेकिन सफर शुरू हाेते ही नाव डूबने से हादसा हाे गया।

हादसे की सूचना मिलते ही ग्रामीण माैके पर पहुंचने लगे। जिन लाेगाें के परिजन कमलेश्वर धाम जाने के लिए निकले थे, वे भी माैके पर पहुंच गए। जिन ग्रामीणाें काे अपने परिजन माैके पर नहीं मिले ताे चिंता बढ़ गई। नदी किनारे बैठे परिजन इस उम्मीद से रेस्क्यू ऑपरेशन देखते रहे कि काश उनके परिजन जिंदा वापस मिल जाएं। जैसे-जैसे समय बीतता गया, उम्मीद भी टूटती गई। नदी से जैसे-जैसे शव निकलते रहे, परिजनाें की चीख-पुकार बढ़ती चली गई।

अपनों को खोने का दुख।
अपनों को खोने का दुख।

सूचना मिलते ही दाैड़ पड़े ग्रामीण : नाव डूबने की सूचना मिलने के थाेड़ी देर में ही नदी किनारे काफी ग्रामीण एकत्रित हाे गए। ज्यादातर लोगों को बचाने व 10 शव निकालने का काम ग्रामीणों ने ही किया। कोटा, बूंदी व सवाईमाधोपुर से बचाव टीमें इसके बाद पहुंची। हादसे के दाैरान नदी के आसपास माैजूद कई युवक जान की परवाह किए बगैर मदद के लिए नदी में कूद पड़े। इन लाेगाें ने कई लाेगाें काे सुरक्षित निकाला।

चंबल से शव निकालते ग्रामीण।
चंबल से शव निकालते ग्रामीण।

ग्रामीणाें ने की नारेबाजी : स्थिति संभालने के लिए करीब 8-10 थानाें की पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। बार-बार ग्रामीणाें की भीड़ नदी किनारे लगने पर उन्हें हटाने के लिए पुलिस काे मशक्कत करनी पड़ी। दाे-तीन बार भीड़ काे खदेड़ने के लिए पुलिस ने सख्ती दिखाई। इस पर ग्रामीणाें ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी भी कर दी।

लापरवाही की चेन के कारण हादसा

वन विभाग : चंबल घड़ियाल सेंचुरी में अवैध नावाें का संचालन बंद करने की जिम्मेदारी है। सेंचुरी में करीब 15 जर्जर नावें राेज चलती हैं और लाेगाें काे इधर से उधर ले जाती हैं। ऐसा हाे नहीं सकता कि विभाग के अधिकारियाें काे इसकी जानकारी ना हाे, लेकिन अनदेखी और लापरवाही के कारण ये काम बदस्तूर जारी था।
पुलिस और पंचायत : ग्राम पंचायत और पुलिस काे भी इस अवैध नाव संचालन की पूरी खबर रहती है। फिर भी उनकी तरफ से काेई कार्रवाई नहीं करना चाैंकाने वाला है। स्थानीय लाेगाें ने बताया कि कई बार इस बारे में शिकायत की गई थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
नाव मालिक : जिस नाव से हादसा हुआ, उसकी हालत काफी खराब थी। लाेगाें का कहना है कि नाव कई जगह से टूटी हुई थी, लेकिन इसके बाद भी उसका मालिक उसे राेज चंबल में उतार देता था। लाेगाें ने उससे नाव ठीक कराने के लिए भी कहा, लेकिन उसने बात काे टाल दिया। नाव चलाने वालाें ने 20 की जगह 32 लाेगाें काे सवार किया और 14-15 बाइक भी बांध दी।

एक पल में सब खत्म
एक पल में सब खत्म

...और नाव में बैठे लाेग भी जिम्मेदार

सबसे आखिर में उन लाेगाें काे भी हादसे का जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जाे क्षमता से ज्यादा नाव में सवार हुए। लाेगाें काे नाव की हालत देखते हुए उसमें बैठने से इनकार कर देना चाहिए था। ....यदि ये सब जिम्मेदारी निभाते ताे हादसा टाला जा सकता था। भविष्य में ऐसे हादसाें की पुनरावृत्ति ना हाे, इसलिए सभी काे सचेत रहना हाेगा।

2 सगे भाई व उनकी पत्नियां भी डूबी

बेबसी
बेबसी

खातौली क्षेत्र के बरनाहाली गांव निवासी दो सगे भाई व उनकी पत्नियाें की भी डूबने से माैत हाे गई। परिवार में एक साथ चार जनाें की माैत से काेहराम मच गया। बरनाहाली गांव के गिर्राज कुशवाह ने बताया कि उसके बड़े भाई कैलाशचंद व भाभी उर्मिला और छोटा भाई मंसाराम व उसकी पत्नी ओमाबाई घर से कमलेश्वर धाम के लिए आए थे। कुछ देर बाद ही नाव डूबने की सूचना आ गई। माैके पर पहुंचे ताे चाराें के डूबने की सूचना मिली। कैलाश के दो बच्चे हैं। वहीं छोटे भाई मंसाराम के काेई बच्चा नहीं है।

रिकाॅल : चंबल नदी में हो चुके हैं नाव डूबने के 2 हादसे

लगभग 35 वर्ष पहले चाणदाखुर्द व ढीपरी गांव के बीच हुए हादसे में 8 लोगों की मौत हुई थी। उस समय संचार के साधन विकसित नहीं थे। काफी देर बाद हादसे की जानकारी मिली थी। हालांकि ग्रामीणों ने ही लोगों को बचाया। वर्ष 2001 में बकरियां लेकर कुछ चरवाहे नाव से चाणदा की तरफ आ रहे थे। इस हादसे में अधिकांश बकरियां डूब गई या बह गई थी। साथ ही 2 चरवाहों की मौत हो गई थी।

नाव मालिक समेत 5 लोगों पर गैरइरादतन हत्या का मुकदमा, जिम्मेदार वन विभाग, पटवारी और एसएचओ पर केस क्यों नहीं?

नाव पलटने से 11 लोगों की मौत...ये हादसा नहीं, हत्या है। क्योंकि अगर जिम्मेदारों ने समय रहते जरूरी कदम उठाए होते तो ये नौबत न आती। मगर कार्रवाई के नाम पर नाव मालिक और 3 नाव चलाने वालों समेत 5 लोगों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। लापरवाही बरतने के आरोप में पटवारी और एसएचओ समेत 4 को एपीओ किया गया है। मगर बड़ा सवाल ये है कि इन पर गैर इरादतन हत्या का केस क्यों नहीं होना चाहिए? वहीं, नावों के अवैध संचालन को रोकने की जिम्मेदारी वन विभाग के अफसरों की थी। उन पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा क्यों नहीं चलाया जाना चाहिए।

इन्हें एपीओ किया...एसएचओ रामवतार शर्मा, पटवारी बनवारीलाल बैरवा, निंबाेला पंचायत के ग्राम सेवक जाेधराज गुर्जर और ट्रांसपाेर्ट इंस्पेक्टर राघव शर्मा काे एपीओ किया गया है। इन पर गैर इरादतन हत्या का केस...महेंद्र, हेमराज, रामकुंवार केवट, अमरलाल केवट और विनोद पर धारा 304 ए में केस दर्ज किया गया।

पैरलल इन्वेस्टिगेशन: रोज बेरोकटोक 14 नावों में 5 हजार लोग सफर करते हैं

चंबल घड़ियाल सेंचुरी में शाॅर्टकट के चक्कर में लाेग जान जाेखिम में डालकर जर्जर नावाें में सफर कर रहे हैं। इस सेंचुरी के इलाके में करीब 14 नावें राेज चलती हैं। रोज करीब पांच हजार से अधिक लाेग सफर करते हैं। सेंचुरी में टूरिस्ट बाेट के अलावा अन्य किसी भी नाव के संचालन को वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत अनुमति नहीं दी जा सकती है। मगर जिम्मेदाराें की अनदेखी के कारण लंबे समय से नावें बेराेकटाेक चल रही हैं।
किराया 20 से 40 रु. : घड़ियाल सेंचुरी में चलने वाली अवैध नावाें में 20 से 40 रु. तक किराया लिया जाता है। इनमें टू व्हीलर भी ले जाते हैं। इनका किराया 40 रु. तक लिया जाता है।

ऐसी नावों को मंजूरी नहीं : डीसीएफ
जिस नाव से हादसा हुआ है, वैसी नावाेें के संचालन के लिए विभाग से परमिशन नहीं हाेती है। बिना मंजूरी नांव चलाने पर कार्रवाई करते हैं ताे लाेग अपना हक-हुकूक बताते हैं।
फुरकान अली, डीसीएफ, सवाई माधोपुर

संवेदना...सीएम गहलोत व ओम बिरला ने दुख जताया

मुख्यमंत्री अशाेक गहलाेत ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि घटना बेहद दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण है। शिकार हुए लाेगाें के परिजनाें के प्रति मेरी गहरी संवेदना है। मृतक आश्रिताें काे सीएम रिलीफ फंड से 1-1 लाख रु. की मदद दी जाएगी। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला व स्पीकर सीपी जोशी ने भी दुख जताया।

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