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राहुल गांधी के सामने शराब पीना किसने कबूला:बड़े ब्यूरोक्रेट का ब्रीफकेस लेने लपके तीन-तीन एमएलए, जब खुल गई अफसर की सबके सामने पोल

जयपुर9 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी

पिछले दिनों दिल्ली में कांग्रेस महासचिवों और प्रभारियों की बैठक में मोदी सरकार के खिलाफ आंदोलन, चुनावी राज्यों की रणनीति जैसी गंभीर मंथन के बीच शराब का जिक्र आ गया। कांग्रेस के मेंबरशिप अभियान पर बात हो रही थी।

एक महासचिव ने राहुल गांधी के सामने कांग्रेस का मेंबर बनने के लिए शराब नहीं पीने और खादी पहनने की शर्त बदलने की मांग उठाई। इस पर राहुल गांधी ने बैठक में पूछ लिया कि यहां मौजूद कितने नेता शराब पीते हैं? केवल दो प्रभारियों ने हाथ उठाए, इनमें से एक राजस्थान के हैं। हकीकत यह है कि पीने वाले बहुमत में थे, लेकिन दो ने ही सच बोलने की हिम्मत दिखाई।

बड़े ब्यूरोक्रेट का ब्रीफकेस लेने लपके तीन-तीन एमएलए

नेता-अभिनेता का फील्ड भले अलग हों, लेकिन नेता का अच्छा अभिनेता होना एक अनिवार्य खूबी सा हो गया है। नेताओं की इसी खूबी को देखने का मौका दिल्ली-जयपुर की फ्लाइट के दौरान एक प्रत्यक्षदर्शी को मिला। एक बड़े ब्यूराक्रेट के साथ तीन एमएलए भी यात्रा कर रहे थे। जब एयरपोर्ट पर उतरे तो बड़े ब्यूरोक्रेट के हाथ से ब्रीफकेस और दूसरा सामान लेकर सेवा भाव दिखाने की होड़ मच गई।

तीनों एमएलए चर्चित रहे हैं और इन दिनों एक चुनावी राज्य में ऑब्जर्वर बने हैं। ब्यूरोक्रेट भी संयोग से उसी राज्य के हैं। एयरपोर्ट पर तीनों ने बड़े ब्यूरोक्रेट के प्रति जिस तरह का सेवा भाव दिखाया उसके मायने खोजे जा रहे हैं। इस त्रिमूर्ति के चक्कर में पहले एक बड़े नेता भी आ चुके हैं।

आईएएस के रिटायरमेंट प्लान से युवा विधायक परेशान

एक संभाग में तैनात आईएएस से सत्ताधारी पार्टी के एक विधायक भारी परेशान हो रहे हैं। आईएएस ने किया कुछ नहीं है, लेकिन विधायक उनके प्लान से परेशान हैं। अगले साल मार्च में ये आईएएस रिटायर हो रहे हैं, विधायक के जाति वर्ग से हैं। रिटायरमेंट के बाद आईएएस परेशान होने वाले युवा विधायक की सीट से चुनाव लड़ने का प्लान बना रहे हैं।

यह खबर पहले से युवा विधायक को है और वे इसीलिए परेशान हैं। युवा विधायक यू टर्न की वजह से एक बड़े वोट बैंक का भरोसा खो चुके हैं, जो दोबारा लौटना नामुमकिन सा है। अब रिटायरमेंट के बाद आईएएस की प्लानिंग ने युवा विधायक की चिंता बढ़ा दी है।

चट डीपीसी पट प्रमोशन में घपले की बू
सरकारी विभागों में प्रमोशन का प्रोसेस और समय तय है। सरकारी कामों की स्पीड से हर कोई परिचित है, लेकिन यह स्पीड अगर अचानक बुलेट ट्रेन जैसी हो जाए तो सवाल उठना स्वाभाविक है। सचिवालय में हाल ही फोर्थ ग्रेड से क्लर्क में प्रमोशन के डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी की बैठक हुई। डीपीसी होते ही तत्काल प्रमोशन के ऑर्डर जारी हो गए। बुलेट ट्रेन की स्पीड से हुए प्रमेाशन में अब घपले की भारी शिकायतें मिल रही हैa।

फोर्थ ग्रेड कर्मचारियों का यूनियन तक इसके खिलाफ है। कई ऐसे लोग प्रमोशन पा गए, जिनकी मार्कशीट फर्जी हैं, इन्होंने सचिवालय, क्लास रूम और एग्जाम रूम में साथ-साथ प्रजेंट दिखा रखी है। अब एक आदमी एक समय दो-दो जगह मौजूद कैसे रह सकता है। बताया जाता है कि यह सब सरकार के बड़े ऑफिस से फोन आने के बाद हुआ। अब यह मामला हाईकोर्ट जाना तय है।

सीएम फेस की लड़ाई अब खुले में आई
विपक्षी पार्टी में लंबे समय से सीएम फेस की लड़ाई किसी से छिपी नहीं है। सीएम फेस के दावेदार कई नेताओं के बीच जोर आजमाइश जारी है। पिछले दिनों पूर्व सीएम ने मौजूदा सीएम के गृह क्षेत्र में आकर सियासी तेवर दिखाए। पॉलिटिकल जेस्चर दिए तो बीजेपी में हलचल हुई।

संगठन के मुखिया ने भी उसी इलाके का प्रोग्राम बना लिया, प्रोग्राम में गए तो सीएम बनाने के नारे भी लग गए। इससे कुछ ही दिन पहले संगठन के मुखिया अपने जन्मदिन पर भी मैसेज दे चुके हैं। नतीजा जो हो, हाईकमान फैसला चाहे जो करें, लेकिन संगठन के मुखिया अब खुलकर सीएम फेस की लड़ाई में कूद पड़े हैं।

एसीएस मैडम की क्लास में जूनियर को पड़ी फटकार

शहर वाले अफसरों को प्रदेश के मुखिया की फटकार का असर अब गांव वाले अफसरों पर भी दिख रहा है। प्रशासन गांवों के संग अभियान की रिव्यू बैठक में एसीएस ने तैयारियों में कमी पर कई की जमकर क्लास ली। राजस्थान के मैनचेस्टर कहे जाने वाले जिले में अभियान में पट्टे कम बंट रहे थे। एसीएस ने वहां के अफसर से कारण पूछा तो कलेक्टर पर बैठक नहीं लेने का कारण बता दिया।

एसीएस ने कलेक्टर को वीसी से जोड़ लिया और अफसर का आमना सामना करवा दिया। कलेक्टर ने वीसी में साफ कह दिया कि ये बैठक के लिए कभी आए ही नहीं। उस अफसर को यह नहीं पता था कि एसीएस कलेक्टर से आमना-सामना ही करवा देगी। उन्होंने तो पीछा छुड़वाने के लिए बहाना बनाया था, लेकिन यह बूमरैंग हो गया। एसीएस की नाराजगी सहने के साथ भरी वीसी में फजीहत हो गई।

सत्ता के प्रसाद की उम्मीद में सियासी चुप्पी

सत्ताधारी पार्टी में इन दिनों बड़े से बड़े बयानवीर नेता चुप हैं। सत्ता को पानी पी-पीकर कोसने वाले सनातन विरोधियों से लेकर विधायक तक बोलने को तैयार नहीं हैं। हर किसी को लगता है कि सरकार की तीसरी वर्षगांठ से पहले कुछ न कुछ तो सत्ता का प्रसाद मिलेगा ही।

सत्ता के प्रसाद की उम्मीद में नेताओं ने मौन व्रत सा ले लिया है, पता नहीं किस बात का क्या मतलब निकले, इसलिए सबने चुप्पी को ही सबसे बड़ा हथियार बना रखा है। यह भी तय है कि यह चुप्पी एक उम्मीद कायम रहने तक ही है। जिस दिन मंत्रिमंडल फेरबदल और सियासी नियुक्तियों की बंद मुट्ठी खुल जाएगी उसके बाद बयानवीरों की क्रांति बाहर आना भी तय है।

इलेस्ट्रेशन : संजय ढिमरी,जयपुर

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