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मंत्री पुत्र की सियासी लॉन्चिंग की तैयारी:सरकार के फ्लैगशिप अभियान में संकटमोचक मंत्री का जिला ही फिसड्डी, अश्लील सीडी से खौफ में नेता

जयपुर7 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी
  • हर शनिवार पढ़िए और सुनिए ब्यूरोक्रेसी और राजनीति से जुड़े अनसुने किस्से

एनसीआर के एक जिले के होटल में नेताओं की आपत्तिजनक सीडी की सियासत के गलियारों में अंदरखाने जबर्दस्त चर्चा है। विपक्षी पार्टी से लेकर मौजूदा पार्टी के कई राजदारों के पदचिह्न इस होटल में पड़ते रहे हैं। सीडी का असर उस जिले की सियासत पर भी दिख रहा है। अंदरखाने कई तरह के विवाद भी उन सीडी की वजह से ही हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस होटल के चर्चे पिछले राज में भी खूब हुए थे। अब सीडी के शिकार नेताओं ने चुप्पी साध रखी हैं, लेकिन देर सवेर सीडी में कैद विजुअल बाहर आने पर सियासी भूचाल तय माना जा रहा है। जहां सीडी बनी, वहां कई राजदारों के चरण पड़ चुके हैं।

संकट मोचक मंत्री का जिला ही फ्लैगशिप अभियान में पिछड़ा

शहरों में पट्टे बांटने के अभियान को मौजूदा सरकार ने फ्लैगशिप अभियान बना रखा है। मामले में दिलचस्प पहलू यह है कि सरकार के संकट मोचक माने जाने वाले मंत्री का जिला फ्लैगशिप अभियान के हर पैरामीटर में पिछड़ा हुआ है। मंत्री जी के गृह नगर की दोनों नगर निगमों की पट्टे बांटने में सबसे खराब हालत है। अब दीये तले अंधेरा वाली कहावत ऐसे ही मामलों के लिए तो बनी है।

सीएम का दावेदार तय नहीं, कार्यकर्ता परेशान किसके नजदीक जाएं

विपक्षी पार्टी में सीएम के दावेदारों को लेकर घमासान मिटने का नाम नहीं ले रहा है। दर्जन भर नेता दावेदार हो चुके हैं। जितने दावेदार हैं उतने ही समीकरण हैं। फिलहाल ये सब दावेदार स्वयंभू ही हैं। हाईकमान की तरफ से साफ कर दिया गया है कि चुनाव सामूहिक लीडरशिप में कमल के ही चेहरे पर लड़ा जाएगा। इस फाॅर्मूले ने कई दावेदारों के सामने परेशानी खड़ी कर दी है। फिलहाल 2023 दूर है और तब तक बहुत कुछ घटना बाकी है। सियासत का क्या पता, कौन ऐनवक्त पर चेहरा घोषित हो जाए। इसमें कई कार्यकर्ता और दावेदार परेशान है कि नजदीक जाएं तो किसके जाएं। ऐसे माहौल में समझदार नेता और कार्यकर्ता सबसे हिलमिल चालिए नदी नाव संजोग वाला सिद्धांत अपनाए हुए हैं।

मास्क नहीं लगाया तो मुखिया ने सलाहकार को दिया सार्वजनिक उलाहना

प्रदेश के मुखिया के एक तेजतर्रार सलाहकार हमेशा सेंटर ऑफ अट्रेक्शन बने रहते हैं, लेकिन पिछले दिनों उसी के चक्कर में चूक गए। मशहूर हिल स्टेशन पर शरद उत्सव का प्रदेश के मुखिया वर्चुअल उद्घाटन कर रहे थे। उद्घाटन से ठीक पहले ढाई घंटे तक कोरोना पर ओपन कैबिनेट हुई थी, जिसमें हर तरह के प्रोटोकॉल के पालन और बचाव की नसीहत दी गई। कार्यक्रम में प्रदेश के मुखिया ने वर्चुअल ही देखा कि कुछ देर पहले उन्होंने जो सीख दी, उसकी उनके ही खास लोग धज्जियां उड़ा रहे हैं। प्रदेश के मुखिया ने लाइव कार्यक्रम में नाम लेकर सलाहकार को टोक दिया कि वे ही मास्क नहीं लगाएंगे तो दूसरों को क्या सीख देंगे? प्रदेश के मुखिया का उलाहना सुनकर वहां बिना मास्क बैठे सलाहकार सहित सबने मास्क लगा लिया, लेकिन इससे कई तरह के मैसेज भी एक साथ मिल गए।

गुटखा-स्टील को सर्वे-छापों से राहत के पीछे का रहस्य

सरकार के लिए धन इकट्ठा करने वाले महकमे पर बड़ी जिम्मेदारी रहती है। इस महकमे की एंटी इवेजन यूनिट रेवेन्यू लीकेज रोकने व पकड़ने के लिए सर्वे-छापों का सहारा लेती है। टैक्स चोरी करने वाले इसी से तो डरते हैं। टैक्स वाले महकमे में स्टील और गुटखा कारोबार पर हाल के दिनों में स्टेट के महकमे ने कोई कार्रवाई नहीं की है। जानकार बता रहे हैं कि ऊपर से इन दो सेक्टर्स पर अभी सर्वे-छापों से बचने को कहा गया है। दोनों सैक्टर्स से बड़ी टैक्स चोरी की शिकायतें हैं, लेकिन अघोषित रोक के कारण सब माफ है। अब इस पिक एंड च्यूज थ्योरी और मेहरबानी को लेकर महकमे में कई तरह की चर्चाएं हैं। बात सत्ता के बड़े घर तक भी पहुंची है। इसका असर भी आने वाले दिनों में दिख सकता है।

सत्ताधारी पार्टी में फिर लौटा एक व्यक्ति-अनेक पद फार्मूला

सत्ताधारी पार्टी में कब कौनसा फाॅर्मूला चल जाए कोई नहीं कह सकता। पहले एक व्यक्ति एक पद फाॅर्मूले पर तीन मंत्री हटे,लेकिन जल्द ही पार्टी ने यू-टर्न ले लिया। हाल ही 13 जिलाध्यक्ष बनाए, उनमें से 10 को बीस सूत्री कार्यक्रम की जिला कमेटी के उपाध्यक्ष पद पर राजनीतिक नियुक्ति दे दी। अब जिलाध्यक्ष को नियुक्ति दी तो संगठन के पदों पर बैठे बाकी लोग भी दावेदारी करेंगे। अब फिर से एक व्यक्ति अनेक पद वाला फाॅर्मूला ही चलना तय हो गया है। पिछले दिनों संगठन की विचारधारा पर हुए ट्रेनिंग कैंप में मुख्य भूमिका में रहे एक प्रदेश उपाध्यक्ष भी मंत्री हैं, वे संगठन का पद नहीं छोड़ेंगे। इसलिए ही कहा जाता है कि सियासत में कोई तय फाॅर्मूला और मापदंड नहीं होते, जो चल जाए वही मापदंड है।

स्वास्थ्य विभाग में नए साल पर टॉप टू बॉटम बदलाव तय

स्वास्थ्य महकमे के मंत्री बदलने के बाद अब अफसरों के स्तर पर बदलाव शुरू होने की सुगबुगाहट है। मंत्री बदलने के साथ टॉप टू बॉटम बदलाव तय ही माने जाते हैं। इन बदलावों का प्रोसेस शुरू हो चुका है। जिन्हें हटाना है, उनके नाम प्रदेश के मुखिया तक नाम पहुंचा दिए हैं। कोरोना बढ़ने के कारण कुछ दिन बदलाव रुक सकते हैं, लेकिन हालात ठीक होते ही बड़े बदलाव तय माने जा रहे हैं। बदलावों के पीछे पुराने विवादास्पद फैसले भी आधार बनेंगे। पुराने विवादास्पद फैसलों का ब्यौरा भी तैयार हो चुका है। स्वास्थ्य महकमे में एक ही सरकार में सरकार बदलने जैसा एहसास पुराने राज में भी हो चुका है, इसलिए वही कहानी दोहराई जाने की तैयारी है। आखिर परिवर्तन हुआ है तो उसका असर भी तो दिखेगा।

मंत्री पुत्र की सियासी लॉन्चिंग

सत्ताधारी पार्टी में कई नेता जनरेशन शिफ्ट की तैयारी में है। जनरेशन शिफ्ट का नाम आते ही युवा नेता और कार्यकर्ता खुश हो जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि इसमें किसी आम युवा को मौका मिलेगा। मंत्री हो या बड़े नेता जनरेशन शिफ्ट में परिवार पहले है, इसलिए बेटे से योग्य राजनीतिक उत्तराधिकारी कौन होगा। सरकार के एक मंत्री भी इन दिनों बेटे की लॉन्चिंग को सफल बनाने में लगे हैं।

वॉइस ओवर: प्रोड्यूसर राहुल बंसल

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