भास्कर एक्सक्लूसिवबेटे की मौत ने धनखड़ को तोड़ दिया था:बचपन में कपड़ों की गेंद से खेलते, राजनीति में नहीं आना चाहते थे

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: मनीष व्यास

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 6 अगस्त को वोटिंग होगी। इसी दिन नतीजे घोषित होंगे। NDA उम्मीदवार जगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति बनना लगभग तय माना जा रहा है। ऐसे में दैनिक भास्कर धनखड़ के गांव पहुंचा और जाना कौन हैं जगदीप धनखड़। कैसा रहा उनका बचपन से अब तक का सफर…

जयपुर से करीब 200 किमी दूर झुंझुनूं जिले में एक छोटा सा गांव है किठाना…उपराष्ट्रपति पद के दावेदार जगदीप धनखड़ का गांव। भास्कर टीम गांव पहुंची तो चारों ओर से हरे-भरे खेतों के बीच एक सिंगल सड़क थी। पास में एक खेत और उसमें बना मकान। बाहर कुछ लोग खड़े थे।

हमने कार रोकी और पूछा, ‘जगदीप धनखड़ के घर जाना है, रास्ता बता दीजिए’। महिपाल नाम के एक व्यक्ति आगे आए और बोले, ‘आप सही जगह पर आकर रुके हैं। ये भाईसाहब (जगदीप धनखड़) का ही खेत है’। महिपाल के पास खड़े बुजुर्ग हजारीलाल ने कहा, ‘मेरा बचपन का दोस्त है जगदीप, साथ ही पढ़े हैं दोनों’।

महिपाल और हजारी हमें खेत में बने मकान में ले गए। महिपाल ने बताया कि ‘ये खेत और मकान जगदीप भाईसाहब का ही है। यहां अक्सर आते रहते हैं। अभी उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए भाईसाहब का नाम की घोषणा से 7 दिन पहले ही भाभीजी (जगदीप धनखड़ की पत्नी सुदेश धनखड़) गांव आई थीं। शाम को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बड़े पदाधिकारियों के लिए उन्होंने खुद ही खाना बनाया था’।

जगदीप धनखड़ के सबसे करीबी दोस्त और प्राइमरी तक साथ पढ़े सेना से रिटायर्ड हवलदार हजारीलाल ने बताया कि फरवरी महीने में ही जगदीप गांव आया था। तब मुझे कहा था, ‘सब बंगाल आए तुम कभी नहीं आए’। तब ऐसे ही मेरे मुंह से निकल गया था ‘बंगाल नहीं दिल्ली आऊंगा’। अब ये बात सही होने जा रही है।

स्याही से रंगे रहते थे हाथ
हजारीलाल ने बताया कि जगदीप चार भाई बहनों में दूसरे नंबर के हैं। बड़े भाई कुलदीप धनखड़ और जगदीप से छोटे रणदीप और बहन इंद्रा हैं। चारों में आज भी अटूट प्यार है। कुलदीप तो आज भी जगदीप को डांट-फटकार देते हैं और जगदीप भी इसे सहज लेते हैं। हजारीलाल ने बताया धनखड़ शुरू से पढ़ाई में बहुत होशियार थे। साथ ही मौज मस्ती भी खूब करते थे।

हमेशा हाथ स्याही में रंगे रहते, कई बार ये स्याही दूसरे स्टूडेंट्स के भी लगा देते थे। होशियार इतने थे कि अपनी स्लेट के दोनों साइड में 2-3 मिनट में ही बारहखड़ी और पहाड़े लिख देते थे। यही कारण था कि टीचर भी उन्हें हमेशा प्यार देते थे।

धनखड़ को खेलने का भी बड़ा शौक था। फटे-पुराने कपडे़ इकट्ठे करते और उनसे बड़ी गेंद बना लेते थे। इसके बाद सभी बच्चों को इकट्ठा कर गेंदमार खेल खेलते थे। प्राइमरी तक दोनों गांव के स्कूल में पढ़े। इसके बाद एक साल पास के ही गांव में पढ़ने गए और फिर धनखड़ चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल चले गए।

राजनीति में नहीं आना चाहते थे जगदीप
जगदीप के छोटे भाई और राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) के अध्यक्ष रहे रणदीप ने बताया कि छठवीं क्लास के बाद वो चितौड़गढ़ सैनिक स्कूल चले गए। महाराजा कॉलेज से ग्रेजुएशन की और इसके बाद लॉ। वकालत शुरू की तो थोड़े ही समय बाद उनका नाम बड़े वकीलों में शुमार हो गया।

हम दोनों भाइयों की शादी भी एक ही दिन 1 फरवरी 1979 को हुई थी। वो कभी राजनीति में नहीं आना चाहते थे। कुछ पाॅलिटिशियन से संपर्क था। उन्हीं के कहने पर 1988-89 में जनता दल की ओर से झुंझुनूं से सांसद का चुनाव लड़ा। वे भारी मतों से जीते और पहली बार सांसद बनते ही केंद्रीय कानून मंत्री भी बनाए गए।

14 साल के इकलौते बेटे की मौत से टूट गए थे
हजारीलाल ने बताया कि धनखड़ दिल-दिमाग से बेहद मजबूत हैं। उनके दो बच्चे थे। बेटा दीपक और बेटी कामना। दीपक अजमेर के मेयो स्कूल में पढ़ता था। 14 साल की उम्र में फरवरी 1994 में दीपक को ब्रेन हेमरेज हो गया। आनन-फानन में दिल्ली लेकर गए, लेकिन बचा नहीं पाए।

बेटे की मौत ने धनखड़ को तोड़ दिया था। इसके बावजूद वो उस दर्द से बाहर निकले और पूरे परिवार को संभाला। इकलौती बेटी कामना उनके साथ ही रहती हैं।

स्कूल प्रिंसिपल बोलीं- सर की उपलब्धि पर सभी खुश हैं, स्कूल का भी नाम हो गया
जगदीप धनखड़ जिस प्राइमरी स्कूल में पढ़े, वो अब उच्च माध्यमिक हो गया है। स्कूल प्रिंसिपल ने बताया कि जगदीप सर की इस उपलब्धि पर पूरा गांव खुश है। स्कूल में पढ़ रहे दूसरे बच्चों को भी इससे प्रेरणा मिलेगी। प्रिंसिपल ने बताया जब भी धनखड़ सर गांव आते हैं, स्कूल जरूर आते हैं।

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आज जिस ऑफिस में बैठकर आपसे बात कर रही हूं, ये उनका क्लासरूम था। तब स्कूल में दो ही कमरे होते थे। सुदेशजी का भी स्कूल से लगाव है। सभी बच्चों के लिए स्वेटर और किताबें भेजती हैं। इस बार तो जब आई थीं तो अपने हाथों से चूरमा खिलाकर मेरा जन्मदिन मनाया था।

जीत को लेकर आश्वस्त हैं ग्रामीण, मंदिरों में प्रार्थना
गांव में लोगों ने बताया कि जगदीप भाईसाहब की जीत पक्की है। जब से उनका नाम उपराष्ट्रपति के लिए आया है, गांव के मंदिरों में रोजाना उनकी जीत के लिए प्रार्थना होती है। धनखड़ जब बंगाल के गवर्नर बने थे तो पहली बार गांव आने पर नजदीक के गांव जोड़िया में स्थित कुलदेवता बालाजी के मंदिर में पहुंचे थे।

उन्होंने विशेष पूजा अर्चना करवाई थी और प्रसादी का आयोजन भी हुआ था। मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस बार मंदिर में धनखड़ के लिए विशेष पूजा के इंतजाम किए हैं। उनकी जीत के बाद यहां भव्य आयोजन करवाया जाएगा। वहीं, कई लोग 6 अगस्त को दिल्ली जाने की तैयारी में लगे हैं।

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