भास्कर एक्सप्लेनरक्या गहलोत नहीं बनेंगे राष्ट्रीय अध्यक्ष?:गहलोत-पायलट खेमों की लड़ाई में तीसरे को फायदा होने की संभावना

जयपुर2 महीने पहलेलेखक: गोवर्धन चौधरी

राजस्थान में सवा दो साल पहले आए सियासी संकट का दूसरा पार्ट वापस देखा जा रहा है। इस बार किरदार बदले हुए हैं। अशोक गहलोत खेमे के विधायकों के सचिन पायलट को सीएम बनाए जाने की संभावनाओं पर बगावती तेवर दिखाने से संकट के हालात बने हैं।

इन हालातों के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या...

अब गांधी परिवार अशोक गहलोत को अध्यक्ष के पद पर बैठाएगा?

आखिर गहलोत गुट को किस बात की चिंता है?

अब सचिन पायलट कैंप का रुख क्या होगा?

क्या सरकार गिर सकती है?

इन सभी सवालों का जवाब पढ़िए भास्कर एक्सप्लेनर में....

दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम से अशोक गहलोत की छवि भी प्रभावित हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष पद पर गहलोत का नामांकन और नए मुख्यमंत्री के पद पर चयन के प्रोसेस पर संशय बन गया है। कांग्रेस का टकराव अब लंबा खिंचने के आसार हैं और गहलोत-पायलट खेमों के बीच ग्रासरूट लेवल तक टकराव व खींचतान के आसार हैं।

इस बगावत के बाद अब गहलोत की कांग्रेस अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी को लेकर क्या होगा?
अशोक गहलोत के बारे में अब तक यह धारणा थी कि वे हाईकमान का फैसला तत्काल मानते हैं, लेकिन कल के घटनाक्रम के बाद यह पर्सेप्शन बदल गया है। गांधी परिवार के नजदीक माने जाने वाले गहलोत के समर्थक विधायकों ने जिस तरह का डिमांड चार्टर रखा है, उसने पूरा नरेटिव बदल दिया है।

मैसेज यह पहुंचाया गया है कि अध्यक्ष बनने पर गहलोत गांधी परिवार के फैसलों को आंख मूंदकर नहीं मानने वाले। केंद्र की राजनीति में गहलोत विरोधियों को अब माहौल बनाने का मौका मिल गया है। समर्थक विधायकों के बागी तेवरों के बाद अब अध्यक्ष पद पर नामांकन को लेकर भी संशय है।

एक संभावना यह भी है कि गहलोत के सामने किसी मजबूत नेता को अध्यक्ष पद पर उतार कर उन्हें चुनाव हरवाया जा सकता है। गहलोत समर्थक विधायक इस बात की आशंका दो बैठकों में जता चुके हैं, कई मंत्री खुलकर इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। उनके समर्थकों के मुताबिक गहलोत को अध्यक्ष पद पर चुनाव हरवाने के लिए पहले से एक लॉबी एक्टिव है।

क्या गांधी परिवार गहलोत को अध्यक्ष पद के लिए चुनाव मैदान में उतारेगा?
गहलोत गांधी परिवार के ही उम्मीदवार हैं, उन्होंने सोनिया गांधी से मिलने के बाद केरल जाकर राहुल गांधी से मुलाकात की और नामांकन भरने की बात कही। कल के घटनाक्रम को गांधी परिवार किस रूप में लेता है, इस पर अब आगे तस्वीर साफ होगी। विरोधी खेमा कल के घटनाक्रम को गांधी परिवार के खिलाफ बगावत के तौर पर पेश करेगा।

राजस्थान के घटनाक्रम को लेकर मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन की रिपोर्ट और फीडबैक पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि गांठ तो जरूर पड़ गई है।

इस घटनाक्रम के बाद सचिन पायलट कैंप की रणनीति क्या है?
सचिन पायलट कैंप की रणनीति, वेट एंड वॉच की है। सचिन पायलट को हाईकमान की तरफ से मुख्यमंत्री बनाने का आश्वासन मिला हुआ है। इस बात को गहलोत गुट के मंत्रियों ने भी मान लिया है और उनके बागी तेवर भी पायलट को रोकने के लिए ही हैं। पायलट अब वेट एंड वॉच की रणनीति में हैं।

पायलट गुट के पास कांग्रेस हाईकमान का समर्थन है, यही बात उनके लिए प्लस पॉइंट मानी जा रही है। गहलोत खेमे के विधायकों ने बागी तेवर अपनाकर एक बारगी पायलट का रास्ता रोक लिया है और सीएम चयन पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। पायलट के पास अब इंतजार के अलावा दूसरा विकल्प नहीं है, क्योंकि विधायकों के मामले में उनका पलड़ा गहलोत से कमजोर है।

क्या गहलोत और पायलट के अलावा किसी तीसरे को सीएम बनाना ही कांग्रेस हाईकमान के पास विकल्प बचा है?
राजस्थान के अगले मुख्यमंत्री का फैसला अब अशोक गहलोत के अध्यक्ष का नामांकन करने पर निर्भर करेगा। अगर गहलोत अध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें आज नहीं तो कल पद छोड़ना होगा। अजय माकन भी साफ कर चुके हैं कि अध्यक्ष पद पर चुनाव से पहले सीएम का इस्तीफा होगा क्योंकि अगर अध्यक्ष बनने के बाद फैसला होता है तो यह हितों के टकराव का मामला होगा।

कांग्रेस हाईकमान सचिन पायलट के नाम का संकेत दे चुका है, अब ताजा घटनाक्रम के बाद बीच का रास्ता निकालने के लिए किसी गैर विवादित चेहरे का नाम सामने लाया जा सकता है। दो की लड़ाई में तीसरे को फायदा वाली कहावत यहां फिट होती दिख रही है।

कांग्रेस हाईकमान के लिए इधर कुआं और उधर खाई की स्थिति कैसे है?
कांग्रेस हाईकमान के लिए इधर कुआं और उधर खाई की स्थिति बन गई है। अशोक गहलोत और सचिन पायलट दोनों नेता अपनी-अपनी जगह देश-प्रदेश की सियासत में अपनी उपयोगिता रखते हैं। अशोक गहलोत तीन पीढ़ियों से गांधी परिवार के विश्वासपात्र रहे हैं और उनका नाम अध्यक्ष पद के लिए चल रहा है।

उन्हें नाराज करके अपना शुभचिंतक खोने का जोखिम है। सचिन पायलट कांग्रेस के स्टार प्रचारक हैं, उन्हें देश भर में क्राउड कैचर नेता माना जाता है, पायलट से किया कमिटमेंट पूरा नहीं होता है तो गांधी परिवार की नेतृत्व क्षमता और पकड़ पर सवाल उठेंगे। दोनों ही हालत में फैसला करना आसान नहीं है।

फिलहाल पायलट कैंप के पास क्या विकल्प हैं?
सचिन पायलट खेमे के पास हाईकमान का फैसला मानने के अलावा बहुत ज्यादा विकल्प नहीं है। हाईकमान ने उनका नाम सीएम के लिए आगे कर दिया, लेकिन गहलोत खेमे के विधायक नहीं माने, यह भी एक सियासी सच्चाई है। आगे विधानसभा चुनाव हैं और वोट बैंक पर पकड़ के लिए फील्ड में काम जरूरी है।

इसके अलावा पायलट को प्रदेशाध्यक्ष बनाकर गहलोत खेमे से सीएम बनाने का भी विकल्प है। यह भी संभव है कि पायलट को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जाए। कहा जा रहा है कि पायलट अलग पार्टी बना सकते हैं, लेकिन इसकी संभावना बहुत कम है।

कांग्रेस हाईकमान के किसी तीसरे नाम पर सहमत होने के बाद यदि पायलट कैंप बगावत करता भी है तो क्या सरकार पर संकट है?
पायलट कैंप के बगावत करने पर संकट आ सकता है, हालांकि बगावत फिलहाल संभव नहीं है। पायलट कैंप की रणनीति अभी ताजा घटनाक्रम के बाद गहलोत कैंप को हाईकमान के सामने एक्सपोज करने की है। गहलोत कैंप ने कल खुद इसका मौका दे दिया और कई साल से बना पर्सेप्शन एक झटके में खत्म हो गया। ​​​​​​

विधायकों के इस्तीफे का लीगल स्टेटस क्या है?
विधायकों ने जिस फॉर्मेट में इस्तीफा दिया है, वह स्वीकार नहीं होगा। स्पीकर के विवेक पर ही सब कुछ निर्भर है। इस्तीफा केवल प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा है।

क्या यह विवाद लंबा खिंचेगा?
कांग्रेस में जारी सियासी विवाद लंबा खिंचने के आसार हैं। गहलोत और पायलट गुट के बीच जारी मतभेद अब मनभेद में बदल चुके हैं। दोनों में से कोई किसी को सहन करने की हालत में नहीं है। पायलट को सीएम नहीं बनाने पर अब उनका खेमा नाराज होगा। हाईकमान अगर पायलट के नाम पर अड़ गया तो गहलोत समर्थक इस्तीफा देकर चुनाव में जाने तक की चेतावनी दे चुके हैं। अगर पायलट नहीं बनते हैं तो आगे कोल्ड वॉर और तेज होगा। दोनों ही हालत में विवाद जारी रहेगा।

सियासी संकट के बीच क्या ऑपरेशन लोटस की भी आशंका नजर आ रही है?
कांग्रेस की फूट का फायदा बीजेपी उठा सकती है। विधानसभा चुनाव में साल भर बचा है, ऐसे में बीजेपी अभी सरकार गिरवाने की जगह कांग्रेस को जनता के बीच एक्सपोज हाेने से सियासी फायदा उठाने की रणनीति में है। सियासी टकराव लंबा चलने का सीधा फायदा बीजेपी को होगा। चुनावी साल से पहले अब चर्चाएं सरकार की योजनाओं से ज्यादा गहलोत पायलट खेमों के बीच लड़ाई की है।

गहलोत नहीं तो अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस का चेहरा कौन हो सकता है?
कांग्रेस में अब राष्ट्रीय अध्यक्ष के दूसरे उम्मीदवारों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। कमलनाथ, दिग्विजय सिंह,शशि थरूर के अलावा भी कई नाम चर्चा में हैं।

क्या इस सियासी संकट में राज्यपाल किसी तरह का कोई दखल दे सकते हैं?
राज्यपाल के पास फिलहाल दखल देने वाला पॉइंट नहीं है। अगर गहलोत खेमे या पायलट खेमे के विधायकों में से कोई सरकार के अल्पमत में होने का दावा करता है तो राज्यपाल बहुमत साबित करने के लिए कह सकते हैं। फिलहाल यह कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी लड़ाई है। चुनावी साल और बजट से पहले कोई भी खेमा सरकार नहीं गिराना चाहेगा।

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1. विधायक दल की बैठक में नहीं पहुंचे गहलोत समर्थक, माकन बोले- अनुशासनहीनता

गहलोत गुट ने विधायक दल की बैठक का बहिष्कार कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने तक यानी 19 अक्टूबर तक ये गुट किसी भी मीटिंग में शामिल नहीं होगा। शर्तें भी रखी हैं। पहली- सरकार बचाने वाले 102 विधायकों यानी गहलोत गुट से ही सीएम बने। दूसरी- सीएम तब घोषित हो, जब अध्यक्ष का चुनाव हो जाए। तीसरी- जो भी नया मुख्यमंत्री हो, वो गहलोत की पसंद का ही हो। पूरी खबर पढ़ें

2. विधायकों को तवज्जो मिलेगी या हाईकमान राय थोपेगा?

अब तक की स्थिति में संख्या बल के मामले में पायलट गुट कमजोर दिख रहा है। गहलोत के समर्थन में शांति धारीवाल के घर हुई बैठक में 70 से ज्यादा विधायक पहुंचे, जबकि सचिन पायलट के घर चुनिंदा MLA ही दिखे।

यदि ऐसा होता है तो पायलट गुट कमजोर पड़ेगा और संख्या बल के सामने हाईकमान भी किसी अन्य नाम पर विचार कर सकता है। पढ़िए पूरी खबर

3.माकन-खड़गे बात करने नहीं, सिर्फ एक लाइन का प्रस्ताव पास कराने आए थे

अशोक गहलोत अगर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाते हैं तो राजस्थान का अगला सीएम कौन होगा? इसको लेकर विधायकों की रायशुमारी के लिए आए केंद्रीय ऑब्जर्वर मल्लिकार्जुन खड़गे और अजय माकन से मिलने से पहले ही कांग्रेस विधायकों ने रविवार को बगावती तेवर अपना लिए। विधायक दल की बैठक से पहले यूडीएच व संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल के घर विधायकों की बैठक हुई और यहां से विधायकों ने एकसाथ विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के घर जाकर इस्तीफा सौंप दिया। पूरी खबर पढ़ें

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