सूरज से ऊर्जावान ब्रह्माकुमारी:आबूरोड के संस्थान में बनती है 17 हजार यूनिट सोलर बिजली, पर्यावरण भी सुरक्षित

आबूरोड4 दिन पहले
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यदि सौर ऊर्जा का भरपूर उपयोग किया जाए तो ऊर्जा की जरुरतों को पूरा किया जा सकता है साथ ही पर्यावरण प्रदूषण से भी बचा जा सकता है। ऐसी ही एक पहल ब्रह्माकुमारी संस्थान आबूरोड ने की है। जिसमें सोलर पावर प्लांट की सौर ऊर्जा के उपयोग से प्रतिदिन 17 हजार यूनिट बिजली पैदा हो रही है। इस उत्पादन से प्रति महीने करीब 20 से 22 लाख रुपए की भारी बचत होती है।

ब्रह्माकुमारी संस्थान में प्रतिदिन 22 हजार यूनिट की बिजली की जरूरत होती है। जबकि इसमें से अधिकांश बिजली की पूर्ति सोलर पावर प्लांट से हो जाती है। संभवत: यह देश का पहला रिसर्च प्रोजेक्ट है जिससे सौर ऊर्जा से स्टीम बनती है और फिर उससे टर्बाइन चलती है जिससे बिजली पैदा हो रही है। इसमें पानी बहुत ही कम मात्रा में लगता है। यह एक ऐसा प्रोजेक्ट है जिसमें इलेक्ट्रिसिटी को हीट सिस्टम से स्टोरेज किया जाता है। जब भी जरूरत हो बिजली का उत्पादन होता है।

80 करोड़ प्रोजेक्ट में ऐसे पैदा होती हैं बिजली

ये रिसर्च प्रोजेक्ट होने के कारण भारत सरकार, जर्मनी और वर्ल्ड रिन्यूवल, स्प्रीचुअल ट्रस्ट के सहयोग से बना है। जिसमें पिछले 3 सालों से बिजली का उत्पादन हो रहा है। करीब 55 एकड़ में बने इस प्रोजेक्ट में सूर्य की रोशनी को एकत्र करने के लिए 770 कांच की डिस्क लगी है। जो रिफ्लेक्टर का कार्य करती है। सूर्य की किरणें रिफ्लेक्ट होकर एक स्थान पर एकत्र होती है और वहां हीटिंग सिस्टम लगा है जिसमें पानी गुजरता है और वह स्टीम में बदल जाता है। फिर यह स्टीम टर्बाइन चलाता है और बिजली पैदा होती है। करीब 80 करोड़ की लागत से बने इस प्रोजेक्ट को स्थानीय लोगों की सहयोग से बनाया गया है। जिससे वह तकनीकी तौर पर सक्षम हो सके और एक नया कारोबार प्रारम्भ कर सकें।

संस्थान में इस प्लांट से मिलती है बिजली
संस्थान में इस प्लांट से मिलती है बिजली

प्रोजेक्ट से होती है 70 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति

वहीं दूसरी तरफ सामान्य सोलर प्लेट से भी बिजली पैदा की जा रही है। इसमें पैदा होने वाली बिजली सीधे पावर ग्रिड में जाती है और फिर ग्रिड से बिजली ब्रह्माकुमारीज संस्थान को दी जाती है। संस्थान में जितनी बिजली खपत होती है उसमें सोलर से पैदा होने वाली बिजली को माइनस कर दिया जाता है। इस तरह से प्रतिदिन दोनों मिलाकर 17 हजार यूनिट बिजली ब्रह्माकुमारी संस्थान पैदा कर रहा है। जिससे संस्थान की 70 प्रतिशत बिजली की आपूर्ति स्वयं के प्रोडक्शन से होती है।

यह सौर ऊर्जा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिणाम है। यदि इसका उपयोग किया जाए तो भविष्य में भारत बिजली के क्षेत्र में आत्म निर्भर हो सकता है। यहां शांतिवन परिसर में भोजन भी सौर ऊर्जा से बनता है। इस प्लांट द्वारा 25 हजार लोगों का भोजन बनता है।

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