भीनमाल में किसानों ने मंडी से किया किनारा:दो राज्यों के टैक्स में 50 प्रतिशत अंतर, इसलिए गुजरात में उपज बेच रहे राजस्थान के किसान, तीन साल से घट रही आवक

भीनमाल4 महीने पहले
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रामसीन रोड पर स्थित कृषि उपज मंडी में इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। क्योंकि क्षेत्र के ज्यादातर किसान गुजरात के धानेरा और डीसा जैसे शहरों में उपज बेचने पहुंच रहे हैं। इसका कारण यह है कि राजस्थान और गुजरात में टैक्स की असमानता है।

गुजरात में यहां के मुकाबले सिर्फ आधा टैक्स किसानों को चुकाना पड़ता है। जिससे उनको उनकी उपज का अच्छा मूल्य मिलता है। जिस कारण 80 प्रतिशत किसान गुजरात चले जाते हैं। पिछले 38 सालों से शहर में संचालित हो रही सूरज पाल सिंह कृषि उपज मंडी में पिछले 3 सालों में उपज में कमी आई है।

तीन साल से घट रही मंडी में आवक

कृषि मंडी से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में लगातार उपज के आवक की संख्या घट रही है। मंडी प्रबंधन इसे बढ़ाने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन टैक्स में 50 प्रतिशत का अंतर होने के कारण किसान यहां नहीं आना चाहते। कृषि मंडी से मिले आंकड़े इस प्रकार है...

उपज2018-192019-202020-212021-22
इसबगोल (औषधि)25,338 क्विं.13,837 क्विं.19,271 क्विं.16,787 क्विं.
जीरा5,455 क्विं.3,599 क्विं.6,564 क्विं.1,507 क्विं.
मूंग1,659 क्विं.5,373 क्विं.---798 क्विं.

साल दर साल घट रही मंडी की आय

पिछले 3 वर्ष के आंकड़ों पर नजर डाले तो साल दर साल मंडी की आय में कमी देखी गई है, जिसमें वर्ष 19-20 में 65.13 लाख, 20-21 में 27. 22 लाख, वर्ष 21 से अब तक 15. 4 लाख की आय प्राप्त हुई है।

गांव में बिचौलियों का जाल

कृषि मंडी से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि गांवों में कहीं बिचौलियों का जाल भी फैला हुआ है, जो किसानों से उपज खरीदकर सीधे गुजरात की मंडियों में बेच रहे हैं। इससे उपज यहां नहीं पहुंच पाती है। स्थानीय मंडी को आय भी नहीं होती है।

मंडी में सिर्फ 5 कर्मचारी

साल दर साल मंडी कि आय घटने से राज्य सरकार ने वर्तमान में सिर्फ 5 कर्मचारियों को ही यहां नियुक्त कर रखा हैं। जिसमें दो मंत्रालय कर्मचारी और तीन चपरासी हैं। वर्तमान में मंडी की 39 दुकानों में से सिर्फ 15 दुकानें ही संचालित हो पा रही है।

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