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शिविर का शुभारंभ:आचार्य ने कहा स्व-दर्शन सुखदायी व पर-दर्शन दुःखदायी है

जालोर11 दिन पहले
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शहर के बड़ा न्याती नोहरा में चल रहे चातुर्मास के दौरान आचार्य जयन्तसेनसूरि के पट्टधर गच्छाधिपति आचार्य नित्यसेनसूरि ने कहा कि सम्यक्त्व की निर्मलता के लिए भिन्न-भिन्न चैत्यों (जिनालयों) में परमात्मा के दर्शन करना चाहिए। जिस तरह गहने की शौकीन स्त्री ज्यादा गहने देखकर ज्यादा खुश होती है, उसी तरह परमात्म दर्शन के शौकीन श्रद्धालु जैसे-जैसे ज्यादा परमात्मा के दर्शन करते हैं, वैसे-वैसे ज्यादा ही आनंदित होते है। मुनि डॉ. संयमरत्न विजय ने कहा कि भावपूर्वक परमात्मा के दर्शन करने से हमारे भव समाप्त हो जाते हैं। राग-द्वेष का जहर प्रभु-दर्शन से दूर होता है।

परमात्मा को वंदन करने से अनंत भवों के बंधन टूट जाते हैं। रागी-द्वेषी के दर्शन अमंगलकारी होते हैं। वीतराग के दर्शन से जीवन मंगलमय बन जाता है। महावीर के दर्शन करने मात्र से ही चंडकौशिक जैसा भयंकर दृष्टिविष सर्प भी सद्गति को प्राप्त हो गया था। जिनालय में परमात्मा के दर्शन हेतु मन में शुभ भाव लाने मात्र से उपवास की तपस्या का फल मिल जाता है। परमात्मा के दर्शन हमें प्रदर्शन से दूर रखता है और आत्मदर्शन की ओर ले जाता है। स्व दर्शन सुखदायी है, तो पर-दर्शन दुखदायी है। इधर, पर्युषण पर्व के पश्चात् रविवार को ओसवाल न्याती नोहरा से चैत्यपरिपाटी रखी गई।

विभिन्न जिनालयों में बिराजमान परमात्मा के दर्शन कर श्रद्धालु गणों का आगमन ओसवाल न्याती नोहरा में हुआ, यहां पर आचार्य ने सभी को मांगलिक श्रवण करवाया। इस अवसर पर श्री संघ के अध्यक्ष रमेशचन्द भंडारी व ट्रस्टी गण व सोहन लाल बोहरा, पुष्पराज बोहरा, राज कुमार जैन, दशरथ चौधरी, हिराचन्द भंडारी, सूरजमल पारख एंव समाज के काफी लोग उपस्थित थे। श्री संघ के मीडिया प्रभारी नेमीचंद पारख ने बताया कि 16 सितंबर से साध्वी तत्वलता श्री जी के निर्देशन में बालिका शिविर का शुभारंभ होगा।

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