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संस्कारों का महत्व:आर्य समाज की वेबिनार में आर्य वीरों ने लिया भाग

जालोर18 दिन पहले
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आर्य वीर दल राजस्थान के तत्वावधान में रविवार को जीवन में संस्कारों का महत्व विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। जिसमें आर्य समाज की प्रसिद्ध भजनोपदेशिका बहन कल्याणी आर्या ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती ने मानव के नव-निर्माण के विचार को क्रियात्मक रूप देने के लिए संस्कार विधि ग्रंथ की रचना की।

उन्होंने कहा कि सत्यार्थ प्रकाश उनकी विचारधारा का सैद्धान्तिक विचारात्मक पक्ष है तथा संस्कार विधि उसी विचारधारा का व्यावहारिक क्रियात्मक पक्ष है। संस्कार विधि संसार का एक ऐसा सर्वश्रेष्ठ एवं उपयोगी ग्रंथ है जिसके द्वारा मानव परिवार के सदस्य बनने वाले बच्चे के निर्माण की रचनात्मक योजना दर्शायीं गई है। बच्चे के गर्भ में आने के दिन से लेकर उसके अंतिम समय तक विविध संस्कारों की व्यवस्था देकर महर्षि दयानन्द ने मानव परिवार का महान उपकार किया है। जोधपुर शहर विधायक मनीषा पंवार ने कहा कि मानव जीवन के विकास, उन्नति एवं निर्माण के लिए संस्कारों का होना अत्यन्त आवश्यक है। अतः महर्षि दयानन्द ने सोलह संस्कारों का विधान संस्कार विधि में करके मानव जाति का कल्याण किया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुवे आर्य समाज कोविड रिलीफ अभियान के संयोजक स्वामी आदित्यवेश ने कहा कि देश सिर्फ अच्छी सरकारों से नही बल्कि अच्छे संस्कारों से भी चलता है। इस दौरान आर्य वीरदल व आर्य समाज जोधपुर द्वारा ऑक्सीजन बैंक में दी गई 2 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन के लिए भी आभार जताया।

कार्यक्रम का संचालन आर्य वीर दल राजस्थान के अधिष्ठाता भंवर लाल आर्य ने किया। वेबिनार में जालोर से एमएल जांगीड, ओम प्रकश खण्डेलवाल, अर्जुन सिंह देलदरी, गणपत सिंह भवरानी, अर्जुन जीनगर, पारसमल गुर्जर, इरफान खान, दलपत सिंह आर्य, विनोद आर्य, शिवदत्त आर्य, नीलम शर्मा, अरुण कवर, रेणु माथुर ने भाग लिया।

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