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आरएएस परिणाम:शादी के बाद दूसरे प्रयास में करड़ा की बीनू देवल को 8वीं रैंक, करावड़ी के तीन भाइयों का चयन

जालोर16 दिन पहले
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  • जालोर सीएमएचओ की बेटी हैं बीनू, जिले के 6 युवा बनेंगे राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अफसर
  • करावड़ी के सारण परिवार में तीन भाई चयनित होने पर तीन गुना खुशी
  • बीनू ने शादी के बाद भी जारी रखी तैयारी, प्रदेश की टॉप टेन में शामिल होने से जिलेभर में खुशी

आरपीएससी ने आरएएस-2018 भर्ती का परिणाम मंगलवार देर रात जारी किया। जालोर के करड़ा निवासी बीनू देवल ने प्रदेश में 8वीं रैंक हासिल कर जिले का नाम रोशन किया। परिणाम जारी होते ही देवल का प्रदेश की टॉप टेन रैंक से चयन होने पर जिलेभर में खुशियां छा गईं।

बीनू देवल को दूसरे प्रयास में यह सफलता मिली है। रानीवाड़ा तहसील के करड़ा निवासी बीनू देवल का जयपुर से स्नातक करने के बाद विवाह हो गया था। पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ अध्ययन करते हुए दूसरे प्रयास में 8 वीं रैंक हासिल कर ली।

बीनू देवल के पिता डॉ. गजेन्द्रसिंह देवल अभी जालोर चिकित्सा विभाग में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। बीनू देवल ने बताया कि प्रथम प्रयास में असफल होने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी और उसी का यह परिणाम है। इनके अलावाभीनमाल निवासी होनहार पृथ्वीराज परमार ने 56वीं रैंक हासिल की। रामसीन के सुरेश पुरोहित को 384वीं रैंक हासिल हुई।

आठवीं व दसवीं बोर्ड में जिला मेरिट हासिल की, आरएएस में 56वीं रैंक

भीनमाल कस्बा निवासी होनहार पृथ्वीराज परमार ने आरएएस में 56 वीं रैंक हासिल की। पृथ्वीराज बचपन से ही मेधावी छात्र रहे। इन्होंने आठवीं बोर्ड की जिला मेरिट में 98 व 10 वीं बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत प्राप्त कर जिले में प्रथम स्थान हासिल किया था।

चेन्नई से बी.टेक एसआरएम विश्वविद्यालय में गोल्ड मेडल के साथ उत्तीर्ण की। पृथ्वीराज उसके बाद आरएएस की तैयारी करने लगे एवं इन्होंने प्रथम प्रयास से ही 56वीं रैंक हासिल कर ली। पृथ्वीराज परमार के दादा जवाहरमल परमार भीनमाल नगरपालिका के अध्यक्ष रह चुके हैं। इनके पिताजी डॉ. प्रेमराज परमार वरिष्ठ सर्जन व माता गृहिणी हैं।

रामसीन के सुरेश पुरोहित का 384वीं रैंक से चयन

रामसीन निवासी सुरेश कुमार का भी 384 वीं रैंक से आरएएस में चयन हुआ है। सुरेश कुमार पुत्र कालूराम पुरोहित सिरोही में अध्यापन किया। शुरुआती कक्षाओं से होनहार था। मध्यम वर्ग होने के चलते एक साल गुजरात के सूरत में नौकरी करने लगे। जिसके बाद वापस पढ़ाई शुरू की और इस बार उनका चयन हो गया।

ऐसे हैं तीन भाई; 2016 में एक असफल रहा दो का चयन हुआ, इस बार तीनों चयनित

सांचौर के करावड़ी निवासी तीन भाइयों ने केवल लक्ष्य सिद्धि को प्राप्त नहीं किया किया अपितु आरएएस बनने का ख्वाब देख रहे युवाओं के सामने एक मिसाल भी पेश की हैं। करावड़ी के दिनेश सारण, अनिल सारण व विकास सारण तीनों भाई पेशे से अध्यापक आसुराम सारण के पुत्र हैं।

2016 की परीक्षा में तीनों भाइयों ने दी, लेकिन सबसे बड़े भाई दिनेश का चयन नहीं हुआ, जबकि दोनों छोटे भाई अनिल व विकास का हो गया। इस बार तीनों ने 2018 की परीक्षा दी तो तीनों का वापस चयन हो गया। दिनेश सारण का चयन इस बार 322 रैंक से हुआ है।

दिनेश पटवारी, अनिल प्रशिक्षु आरपीएस और विकास नायब तहसीलदार

दिनेश कुमार का पटवारी के रूप में 2008 में चयन हुआ, 2016 में आरएएस की परीक्षा में थोड़े असफल रह गए, जिनका 2018 में 322 वीं रैंक से वापिस सफलता मिल गई। छोटे भाई अनिल सारण जो पूर्व में शिक्षक रह चुके हैं, जिनका चयन आरएएस 2016 में 74 वीं रैंक से हुआ।

जो अभी प्रशिक्षु आरपीएस के रूप में आरपीए में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। 2016 में चयनित सबसे छोटे भाई विकास सारण अभी नायब तहसीलदार के पद पर आबूरोड में कार्यरत हैं। तीनों भाइयों का एकसाथ चयन होने पर युवाओं के लिए प्रेरणादायी व चर्चा का विषय बना हुआ हैं।

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