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सेहत सुधरी:डेढ़ साल में 55.80% प्रतिशत घटा कुपोषण, अब 1698 बच्चे कुपोषित

जालोरएक महीने पहले
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  • कोरोना की तीसरी लहर से पहले बड़ी राहत, 3841 कुपोषित बच्चों में से 2143 अब सामान्य स्थिति में आ चुके

जिले में कुपोषण का दंश झेल रहे बच्चों का स्वास्थ्य सुधर रहा है। संभावित तीसरी लहर से पहले जिले के लिए अच्छी खबर है कि 55.80 प्रतिशत बच्चों ने कुपोषण को हरा दिया। डेढ़ वर्ष पहले जिले में 3841 कुपोषित बच्चे सामने आए थे, लगातार महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों की मॉनिटरिंग के बाद पहली बार करीब डेढ़ वर्ष के भीतर 2143 बच्चे कुपोषित को हराकर सामान्य हो गए। कुछ समय पहले 1 लाख 8 हजार 450 बच्चों का सर्वे किया गया, इसमे से अब केवल 1698 बच्चे कुपोषित रहे हैं, इनमें से केवल 124 बच्चे ही अति कुपोषित हैं। इधर, कोरोना की संभावित तीसरी लहर भी आ रही है, ऐसे में यह आंकड़े जिले के लिए सुखद होंगे।

ऐसे आया परिणाम : लॉकडाउन के दौरान भी बंटता रहा पोषाहार

जिले में बड़ी संख्या बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने को लेकर कलेक्टर के निर्देशानुसार चलाए जा रहे मिशन स्वास्थ्य बचपन अभियान के तहत कुपोषित को कुपोषण से मुक्त करने को लेकर विभाग ने लॉकडाउन में इस पर जोर दिया। इस पर जिले के सभी आगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा प्रतिदिन बच्चों के घर जाकर पोषण को लेकर जागरूक एवं प्रोटीन युक्त पोषाहार वितरण करने के बाद यह परिणाम सामने आया।

सबसे अधिक कुपोषित थे सायला में

डेढ़ वर्ष पहले जिले में 3841 बच्चे कुपोषित थे। इनमें से सबसे अधिक सायला उपखंड क्षेत्र में 1127 थे। हालांकि बाकी ब्लॉक क्षेत्रों में 500 के भीतर बच्चे कुपोषित थे। अब सायला में भी 342 बच्चे कुपोषित रहे हैं। जिले के 8 ब्लॉकों में 1758 संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों द्वारा लगातार मॉनिटरिंग करने पर यह परिणाम सामने आया।​​​​​​​

मिशन स्वास्थ्य बचपन के तहत प्रशिक्षित कार्यकर्ता द्वारा घर-घर जाकर सर्वे के जुटाए गए आंकड़ों की दैनिक मॉनिटरिंग करते हुए कुपोषित व अतिकुपोषित बच्चों की पहचान करने उनको योजनाओं का लाभ दिया गया।

- रामजीवन विश्रोई, सहायक सांख्यिकी अधिकारी ​​​​​​​

मिशन स्वस्थ बचपन के तहत जिले में पहली बार 1 लाख 8 हजार बच्चे जिसकी उम्र 1 से 6 वर्ष का कुपोषण सर्वे एक महीने की अवधि में अभियान चलाया गया। सभी महिला पर्यवेक्षक को एमयूएसी टेप से कुपोषण श्रेणी नापने की ट्रेनिंग दी। घर-घर सर्वे कर मॉनिटरिंग की गई।

- अशोक बिश्रोई, उप निदेशक महिला एवं बाल विकास विभाग​​​​​​​

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