पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

प्रदर्शन किया:पहली से आठवीं में प्रवेश के लिए दस्तावेज की आवश्यकता हटाने पर संचालकाें का विरोध

जालोर17 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • बोले- दो साल से स्कूल बंद, इस फरमान से बकाया फीस नहीं आएगी और प्रवेश भी टूटेगा
  • कोरोना के कारण मार्च 2020 से स्कूल बंद हैं, जिससे आर्थिक स्थिति खराब हो गई

सरकार ने प्रदेशभर में पहली से आठवीं कक्षा तक प्रवेश के लिए दस्तावेज की आवश्यकता हटाने पर निजी स्कूल संचालकाें ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर विरोध जताया हैं। निजी विद्यालय संचालकों ने इस बारें में मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को हटाने की मांग रखी।

शिक्षकों ने बताया कि कोरोना महामारी की विभित्सा से अगर कोई सबसे अधिक प्रभावित हुआ है, तो वो निजी शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने वाले संचालक एवं कार्यरत शिक्षक हुए है या विद्यालयों में पढने वाले विद्यार्थी। कोरोना महामारी के कारण दो वर्ष तक स्कूल बंद रहने से ग्रामीण क्षेत्र के कई निजी शिक्षण संस्थान बंद हो चुके है या बंद होने की कगार पर है।

इनमे कार्यरत संचालकों एवं शिक्षकों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है कि जीविकोपार्जन के लिए उन्हें अन्य रोजगार का सहारा लेना पड़ रहा है। विगत दो वर्षो से विद्यालय नही खुलने से बच्चो को अनवरत अगली कक्षा में क्रमोन्नत किया जा रहा है, जिससे अभिभावक विद्यालय की ओर नही आ रहे है। वहीं ऊपर से शिक्षा विभाग द्वारा अन्य स्कूल में प्रवेश के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता हटाने पर निजी स्कूलों के प्रवेश घट रहे है और फीस भी डूबने का खतरा बना हुआ है।

विद्यालय अनलॉक हो, ताकि राहत मिले

कोरोना महामारी के कारण मार्च 2020 से विद्यालय बंद है, जिससे विद्यालयों की आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। इस संबंध में निजी स्कूल संचालकों ने सरकार से स्कूलों को अनलॉक करने की मांग की है। उन्होनें कहा कि अब अनलॉक में मंदिर, बाजार, जीम, रेस्टोरेंट आदि सब-कुछ खुल गया है, ताे अब स्कूलों को भी अनलॉक करना चाहिए। संचालकों ने बताया कि स्कूल लंबे समय तक बंद रहने के कारण विद्यार्थियों को उचित शिक्षण और मार्गदर्शन नही मिल पा रहा है और छात्रो की वास्तविक प्रगति रुक गई है। जिस पर विद्यालय अनलॉक कर शिक्षण गतिविधिया सुचारू करने का आदेश पारित करवाने की मांग की गई।

आरटीई फीस का भुगतान की कही बात

कोरोना महामारी के कारण गत दो वर्ष स्कूल बंद रहे, जिससे शिक्षण संस्थाओ की आर्थिक स्थिति पहले से खराब हो गई। वहीं उच्चतम न्यायलय द्वारा अभिभावकों से शुल्क लेने संबंधी आदेश भी जारी किया है। ऐसे में निजी स्कूल संचालकों ने सरकार व विभाग से आरटीई विद्यार्थियों की फीस राशी विद्यालयों को जारी करने की बात कहीं। इन मांगों को लेकर पूर्व जिला अध्यक्ष केएन भाटी, उपाध्यक्ष तेनसिंह परमार, प्रदेश प्रतिनिधि किशोरसिंह राजपुरोहित, ललित सुंदेशा समेत दर्जनों स्कूल संचालकों ने शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।

बिना दस्तावेज प्रवेश का आदेश हटाने की मांग

निदेशक माध्यमिक शिक्षा बीकानेर की ओर से 7 जुलाई को प्रवेशोत्सव के दौरान बिना किसी दस्तावेज के विद्यार्थियों का अस्थायी प्रवेश के आदेश जारी किये। िजससे अभिभावक मात्र शपथ पत्र के आधार पर अन्य स्कूल में बच्चों को प्रवेश दिलवायेंगे। जो निजी विद्यालयों के हितो के प्रतिकूल है और इससे बकाया शुल्क भी नही आयेगा तथा प्रवेश भी टूटेगा। जिसको लेकर निजी संचालकों ने ऐसे आदेश को वापस लेने की मांग की है।

खबरें और भी हैं...